Sunday, January 16, 2022

Delhi-NCR के लिए अब सिरदर्द नहीं बनेगी हरियाणा की पराली, इससे बननी शुरू हुई ईंटे, कीमत मात्र 2 से 3 रुपए

Must Read

ये है हरियाणा के एक मजबूर पिता की भावुक कहानी, अपने ही बेटे से लड़ी अस्तित्व बचाने की लड़ाई

हम सभी ने अमिताभ बच्चन की बागबान फिल्म को तो देखा ही है। इस फिल्म में बच्चे जो माता...

प्रेरणादायक कार्य, दिल्ली में हजारों लोगों का पेट भर रही है सीता जी की रसोई

आज भी ऐसे कई लोग हैं जो दो वक़्त की रोटी जुटा पाने में भी असमर्थ हैं। आज भी...

हरियाणा के इस शख्स ने दिखाया रोजगार का नया तरीका, तैयार कर दी ईट बनाने की ऑटोमेटिक मशीन

आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है। आज भी भारत में हुनर की कोई कमी नहीं है। आज भी कई...

नई दिल्ली। हम जानते हैं आज भी कई राज्यों में पराली की समस्या ज्यों की त्यों ही बनी हुई है। आज भी हर साल किसान फसलों की कटाई के बाद पराली को जला देते हैं जिससे वायु प्रदूषण बढ़ जाता है। वहीं किसानों के पास भी पराली का अब तक कोई ठोस विकल्प नहीं है। लेकिन आज हम आपको दो ऐसे युवाओं के बारे में बताने जा रहे हैं जो पराली का सही विकल्प ढूंढ चुके हैं।

पराली से नया आविष्कार

इनका नाम प्रियब्रत राउतराय और अविक रॉय है। दोनों युवाओं ने मिलकर पराली से ईंटों को तैयार कर एक नया आविष्कार कर दिया है। इन ईंटों से दोनों ने IIT हैदराबाद के गार्डरूम को भी तैयार किया है जो बेहद ही खास है। ये गार्डरूम मौसम के अनुसार ही रूम का तापमान रखता है। वहीं अब जल्द ही इस आविष्कार को बड़े स्तर पर शुरू किया जा सकता है। आइए जानते हैं खबर को विस्तार से।

दोनों ने साथ मिलकर शुरू किया बिज़नस

पराली जलाने का बाद उससे होने वाला वायु प्रदूषण आज भी एक बड़ी समस्या बना हुआ है। इसके समस्या के निदान के लिए सरकार और कई लोगों द्वारा कार्य भी किए जा रहे हैं। वहीं दो युवाओं ने भी इस समस्या का हल ढूंढ निकाला है। प्रियब्रत और अविक नाम के दो युवा आज पराली जलाने की समस्या को हल करने और सस्टेनेबल आर्किटेक्चर तैयार करने पर काम कर रहे हैं। दोनों ही युवा ओडिशा के रहने वाले हैं जिसमें से प्रियब्रत एक पीएचडी स्कॉलर हैं तो वहीं अविक KIITS स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर में एक शिक्षके तौर पर कार्यरत हैं। मास्टर्स की पढ़ाई पूरी करने के बाद दोनों अलग अलग क्षेत्र में काम कर रहे थे। लेकिन 2011 में दोनों ने अपना डिज़ाइन फर्म शुरू किया जिसका नाम “R Square Dezign” रखा गया। इस दौरान दोनों ने कई डिज़ाइनिंग प्रोजेक्ट पर काम भी किया।

ऐसे आया पराली से ईंटों को बनाने का विचार

दरअसल कुछ सालों में दिल्ली और उसके आस पास से सटे राज्यों में पराली जलाने से वायु प्रदूषण की समस्या बढ़ने लगी थी। तभी इस तरफ दोनों युवाओं का भी ध्यान गया। वहीं दूसरी तरफ दोनों युवाओं को ध्यान कंसट्रक्शन इंडस्ट्री पर भी गया जहां ईंटों की मांग लगातार बढ़ती ही जा रही थी। प्रियब्रत के मुताबिक किसानों के पास पराली को जलाने के अलावा कोई विकल्प नहीं था ऐसे में वायु प्रदूषण बढ़ रहा था। वहीं कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री भी पर्यावरण को हानी पहुंचा रही है।

ईंटों की मांग पूरी नहीं हो पाती

उनके मुताबिक देश में लाख से भी ज्यादा ईंटों की भट्ठियाँ हैं लेकिन इसके बावजूद ईंटों की मांग पूरी नहीं हो पाती और साथ ही इसमें मिट्टी की गुणवत्ता को भी नुक्सान होता है। ईंटों के भट्ठों से भी वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। तभी उन्होंने इस अपशिष्ट से ऐसा कुछ बनाने का सोचा जिससे पर्यावरण को हानी न पहुंचे। इसके बाद दोनों ने गन्ना, चावल और गेहूं जैसी फसलों की कटाई के बाद बचने वाले कचरे पर शोध करना शुरू किया।

बायो ब्रिक बनाने का काम शुरू किया

इसी बीच प्रियब्रत को IIT हैदराबाद में PHD में दाखिला मिला और अविक भी शिक्षक के तौर पर काम करने लगे। इसी के बाद दोनों ने मिलकर बायो ब्रिक बनाने का काम शुरू किया। 2019 में दोनों ने ICED कोन्फ्रेंस Delft यूनिवर्सिटी में बायो ब्रिक पर अपना शोध पत्र भी प्रस्तुत किया। इसके बाद करीब 6 साल की मेहनत के बाद दोनों ने मिलकर पराली से ईंटों को तैयार किया।

तैयार किया पराली की ईंटों से गार्डरूम

बरयो ब्रिक बनाने के बाद उन्होंने इसे Rural Innovators Start Up Conclave 2019 में भी प्रस्तुत किया जिसके लिए उन्हें Special Recognition ट्रॉफी से भी सम्मानित किया गया। इसके बाद दोनों ने इस तकनीक के लिए पेटेंट भी फ़ेल कर दिया था फिर जल्द ही उन्हें 2021 में पेटेंट भी मिल गया। दोनों के मुताबिक पराली से ईंटों को बनाने के लिए वे सीमेंट और चूने का बाइंडर के रूप में इस्तेमाल करते हैं। इसके लिए सबसे पहले पराली को छोटे छोटे टुकड़ों में काट लिया जाता है। जिसके बाद इसमें पानी, चूना और सीमेंट मिला दिया जाता है। इसके बाद इसे मोल्ड में डालने के बाद दो तीन दिन तक सूखने के लिए रखा जाता है जिसके बाद इससे ईंट तैयार हो जाती है। बता दें कि दोनों युवाओं ने मिलकर IIT हैदराबाद में इन्हीं ईंटों से गार्ड रूम को भी तैयार किया है। ये गार्डरूम 6×6 फीट का है।

ऐसे तैयार हुआ ये सस्टेनेबल गार्डरूम

जानकारी के मुताबिक इस गार्डरूम को बनाने के लिए मेटल के फ्रेम का इस्तेमाल किया गया है। प्रियब्रत ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि गार्डरूम को तैयार करने के लिए सबसे पहले मेटल के फ्रेम को तैयार किया गया जिसके बाद इसमें मोल्ड लगाकर रॉ मटेरियल से दीवारों को तैयार किया गया। करीब 2 दिन बाद मोल्ड को हटाना शुरू किया गया।

गार्डरूम बनकर तैयार

मोल्ड हटाने के 10 दिन बाद तक दीवारों को सूखने के लिए छोड़ा गया। ताकि दीवारों को और भी ज्यादा मजबूती मिल पाए। वहीं छत बनाने के लिए PVC शीट का इस्तेमाल किया गया है। जिस पर बायोब्रिक लगाकर दीवार बनाई गई है। वहीं ये छत एक इंसुलेटर के तौर पर भी काम करती है। हाल ही में ये गार्डरूम बनकर तैयार हो गया है। IIT हैदराबाद के बोल्ड यूनिक आइडिया लीड डेवलपमेंट (BUILD) प्रोग्राम के तहत दोनों युवाओं को फंडिंग भी दी गई थी।

पराली बन सकती है किसानों की आय का जरिया

बताया जा रहा है युवाओं द्वारा तैयार किया गया ये गार्डरूम बेहद ही खास है। इस कमरे का तापमान बाहर क मुक़ाबले 6 डिग्री कम ही रहता है। वहीं ईंटों को बनान में चूने और सीमेंट का इस्तेमाल किया गया है जिससे वे आग प्रतिरोधी भी हैं। आज कंस्ट्रक्शन कंपनियों के लिए भी इस तरह कि ईंटें एक अच्छा विकल्प बन सकती हैं। वहीं किसान भी पराली को अपनी अतिरिक्त आय का साधन बना सकते हैं।

ईंट की कीमत करीब 2-3 रूपये हो जाएगी

यदि किसानों को पराली के सही प्रबंधन के लिए प्रेरित किया जाए तो किसान भी पराली को नहीं जलाएंगे जिससे वायु प्रदूषण भी नहीं बढ़ेगा और साथ ही पर्यावरण संरक्षण भी किया जा सकेगा। युवाओं के मुताबिक इस तरह की बायो ब्रिक बनाना बहुत ही आसान है इसलिए इन ईंटों को किसानों द्वारा उनके खेतों में भी तैयार किया जा सकता है जिसे वे सप्लाई कर अच्छी ख़ासी कमाई भी कर सकते हैं। वहीं इन ईंटों का वजन मिट्टी की ईंटों से पाँच गुना और सीमेंट की ईंटों से आठ गुना कम होता है। वहीं यदि बायो ब्रिक को बड़े स्तर पर बनाना शुरू कर दिया जाए तो ईंटों की महंगी कीमत भी कमी आएगी और एक ईंट की कीमत करीब 2-3 रूपये हो जाएगी। इस मटेरियल को गाँव और शहरों में छोटे हाउसिंग मॉडल बनाने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

 शुरू हो सकता है बायो ब्रिक बनाने का काम

बता दें कि मीडिया से बातचीत के दौरान IIT हैदराबाद के डायरेक्टर प्रोफेसर बीएस मूर्ति के मुताबिक कचरे से कमाई का ये सबसे बेहतरीन उदाहरण है। इस प्रोजेक्ट को ग्रामीणों तक पहुंचाने के लिए वे जल्द ही कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय को प्रोपोज़ल भी भेजने भेजने वाले हैं। वहीं IIT हैदराबाद के डिज़ाइन विभाग के प्रमुख दीपक जॉन मैथ्यू के अनुसार ये आविष्कार किसानों के जीवन में बदलाव लाने का काम करेगा क्यूंकि अब किसान कचरे कि मदद से भी कमाई कर पाएंगे।

 प्रदूषण से मुक्त हो जाएगा दिल्ली-एनसीआर

यह भी किसी से छिपा नहीं है कि हरियाणा और पंजाब के खेतों में पराली जलने की वजह से दिल्ली-एनसीआर सहित आसपास के राज्यों में प्रदूषण की परेशानी कई गुणा बढ़ जाती है। केंद्र सहित तमाम राज्य सरकारें अभी तक भी इस पराली की वजह से होने वाले प्रदूषण से लोगों को छुटकारा नहीं दिलवा पाई हैं। तमाम कोशिशों के बावजूद दिल्ली, हरियाणा और पंजाब प्रदूषण की समस्या से जूझ रहे हैं। ऐसे में इन युवाओं ने एक बड़ा अविष्कार कर सभी सरकारों का ध्यान इस ओर आकर्षित किया है। पराली से बनने वाली ईंटे ना केवल बेहद सस्ती होंगी, बल्कि इससे किसानों की आय भी बढ़ेगी और पराली का स्थाई समाधान भी हो जाएगा। इसलिए केंद्र सहित, दिल्ली, हरियाणा और पंजाब सरकारों को इस ओर ध्यान देना चाहिए। यदि इस ओर गंभीरता पूर्वक कार्य किया गया तो हरियाणा की पराली की वजह से दिल्ली-एनसीआर में होने वाले प्रदूषण से स्थाई निजात मिल जाएगी।

- Advertisement -
- Advertisement -

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Connect With Us

223,344FansLike
3,123FollowersFollow
3,497FollowersFollow
22,356SubscribersSubscribe

Latest News

ये है हरियाणा के एक मजबूर पिता की भावुक कहानी, अपने ही बेटे से लड़ी अस्तित्व बचाने की लड़ाई

हम सभी ने अमिताभ बच्चन की बागबान फिल्म को तो देखा ही है। इस फिल्म में बच्चे जो माता...
- Advertisement -

More Articles Like This

- Advertisement -
Do NOT follow this link or you will be banned from the site!
error: Content is protected !!