Sunday, January 16, 2022

मां बाप ने दिया हौसला, बेटी बन गई देश की पहली नेत्रहीन IFS अफसर

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मन में कुछ करने की चाह हो तो तो जिंदगी में किसी भी चीज़ को आसानी से हासिल किया जा सकता है। आमतौर पर लोग छोटी छोटी शारीरिक समस्या के सामने भी हार मानकर बैठ जाते हैं लेकिन वहीं कुछ ऐसे लोग भी होते हैं जो हर बड़ी से बड़ी मुश्किल का डटकर सामना करते हैं। आज हम आपको एक ऐसी ही महिला सफर के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्होंने 100 फीसदी नेत्रहीन होने के बाद भी हार नहीं मानी।

इस महिला अफसर का नाम बेनो जेफिन है। बेनो आज एक IFS अफसर के पद पर कार्यरत हैं लेकिन आपको बता दें कि बेनो भारत की पहली नेत्रहीन IFS अफसर हैं। इस बड़ी मुश्किल के सामने भी बेनो ने कभी हार नहीं मानी। बेनो के माता पिता ने भी अपनी बेटी का हर कदम पर पूरा साथ दिया। आइए जानते हैं बेनो जेफिन से जुड़ी खास बातें।

पढ़ाई में बेहद होशियार थी बेनो

कहते हैं कि यदि किसी भी चीज़ को पाने के लिए कड़ी मेहनत की जाए तो उसमें सफलता जरूर मिलती है। आज कहानी एक ऐसी ही महिला अफसर के बारे में जिन्होंने नेत्रहीनता को हराकर सफलता के मक़ाम को हासिल किया। बेनो जेफिन तमिलनाडु के चेन्नई की रहने वाली हैं। बेनो ने 2014 में UPSC परीक्षा में सफलता को हासिल किया था लेकिन इस पद को पाने के लिए उन्हें कई मुश्किलों का भी सामना करना पड़ा था।

बेनो शुरुआत से ही पढ़ने में बेहद होशियार हैं। बेनो के पिता का नाम ल्यूक एंथन चार्ल्स है जो भारतीय रेलवे में कर्मचारी के तौर पर कार्यरत हैं। बेनो ने अपनी स्कूली पढ़ाई चेन्नई के एक स्कूल से पूरी की। अपने स्कूल के दिनों में बेनो पढ़ाई में काफी अच्छी थी। इसके बाद बेनो ने स्टेला मैरिस कॉलेज से स्नातक की डिग्री को हासिल किया। इसके बाद बेनो ने लॉयला कॉलेज से अपनी मास्टर्स की पढ़ाई को भी पूरा किया।

हालांकि इस दौरान बेनो को भी कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा लेकिन बेनो ने कभी हार नहीं मानी। बेनो के टीचर्स ने भी उनका हर कदम पर साथ दिया। बेनो के मुताबिक उनका स्कूली जीवन भी बहुत ही अच्छा बीता था।

माता पिता ने दिया हर कदम पर साथ

बता दें कि बेनो के माता पिता ने भी कभी उन्हें ये एहसास नहीं दिलाया कि वे नेत्रहीन हैं। स्कूल के दिनों से ही बेनो ने सिविल सेवाओं में जाने का मन बना लिया था। लेकिन एक नेत्रहीन के लिए इस मक़ाम तक पहुंचा आसान नहीं होने वाला था। परंतु बेनो भी हार मानने वालों में से नहीं थी। इस सफर में उनके परिवार ने उनका पूरा साथ दिया।

सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए बेनो ने ब्रेल लिपि में लिखी गई किताबों को ढूँढना शुरू कर दिया। इसके बाद चेन्नई में ही बेनो ने IAS अफसर की तैयारी करना शुरू कर दिया था। वहीं बेनो के कंप्यूटर में भी ऐसे कई सॉफ्टवेयर डलवाएम गए थे जिसे सुनकर बेनो अपनी परीक्षा की तैयारी आसानी से कर सके। वहीं इस मार्ग में बेनो की माँ पद्मजा ने भी अपनी बेटी को खूब प्रेरित किया।

बेनो की माँ उन्हें रोजाना अखबार पढ़कर सुनाया करती थी वहीं उनकी माँ ही उन्हें सामान्य ज्ञान की बातों को भी सुनाया करती थी। वहीं बेनो के पिता ही ब्रेल में लिखी गई परीक्षा सामग्री को अपनी बेटी के लिए जुटाते थे। करेंट अफेयर्स के लिए बेनो टीवी पर समाचार भी सुना करती थी। दरअसल एक बार बेनो को पता चला कि एक ऐसे रेवेन्यू अफसर की नियुक्ति की गई हैं जो दुर्घटना में अपनी आँखें खो चुके हैं बस इसी बात ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

सफलता के बाद भी करनी पड़ी मशक्कत

अब बेनो UPSC परीक्षा के लिए जमकर तैयार कर रही थी। बेनो ने 2013-14 की परीक्षा को पास किया था जिसमें उन्हें 343वीं रैंक मिली। रैंक के आधार पर बेनो को IFS सर्विस दी गई थी लेकिन नेत्रहीन होने के कारण उन्हें करीब एक वर्ष तक नौकरी नहीं मिल पाई। इसके बाद 2015 में बेनो ने भारत की पहली नेत्रहीन IFS अफसर के तौर पर पद को संभाला और अनेकों के लिए प्रेरणा बन गईं।

बेनो का मानना है कि हमें कभी भी हार नहीं माननी चाहिए। वहीं सफलता के लिए बेनो कड़ी मेहनत को भी आवश्यक मानती हैं। आज बेनो से प्रेरित होकर अनेकों लोग अपनी जिंदगी में आगे बढ़ रहे हैं।

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