Sunday, January 16, 2022

देश में 1400 करोड रुपए से बनेगा दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्टैचू,36 हाथी, 18 शंख और 18 चक्र भी होंगे

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नई दिल्ली :भारत आए दिन विश्व स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाने का प्रयास कर रहा है। हम जानते हैं कि दुनिया में सबसे बड़ा सिटिंग सिटिंग स्टेच्यू थाईलैंड में मौजूद है जो ग्रेट बुद्धा का है और इसकी ऊंचाई 302 फीट की है। लेकिन आपको बता दें कि अब भारत में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सिटिंग स्टेच्यू तैयार कर लिया है। ये स्टेच्यू रामानुजाचार्य का है। इस स्टेच्यू की ऊंचाई 216 फीट बताई जा रही है।

स्टेच्यू का जल्द किया जाएगा उदघाटन

इस स्टेच्यू का जल्द ही अब उदघाटन भी किया जाएगा। ये स्टेच्यू हैदराबाद में बनाया गया है जिसका उदघाटन खुद PM मोदी करने वाले हैं। खास बात ये भी है कि स्टेच्यू के पास 108 मंदिर भी बनवाए गए हैं। वहीं पूजा के लिए भी 1200 किलों सोने का इस्तेमाल कर एक छोटी मूर्ति भी बनाई गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक स्टेच्यू को बनाने में करीब 1400 करोड़ रूपये का खर्च आया है। स्टेच्यू को “स्टेच्यू ऑफ इक्वालिटी” का नाम दिया गया है। आइए जानते हैं स्टेच्यू से जुड़ी खास बातें।

जानिए स्टेच्यू की बनावट

बताया जा रहा है कि मूर्ति की ऊंचाई 108 फीट है जबकि कुल ऊंचाई 216 फीट बताई जा रही है। वहीं मूर्ति का पद्मपीठ की ऊंचाई भी 27 फीट है। इसके अलावा मूर्ति में 54 कमल की पंखुड़ियां, पंखुड़ियों के नीचे 36 हाथी, 18 शंख और 18 चक्र भी लगे हुए हैं। स्टेच्यू को बनाने से पहले अन्य 14 मूर्तियों को भी बनाया गया जिसे चीफ आर्किटेक्ट आनंद साईं और आर्किटेक्ट प्रसाद स्थपति ने बनाया। इसके बाद 14 में से 4 मूर्तियों को फाइनल किया गया था।

5 वीं मूर्ति सभी को पसंद आई

इन 4 मूर्तियों में किसी की आँखें बेहद सुंदर थी तो किसी का हाथ बहुत सुंदर था। इन चारों के बाद ही 5वीं मूर्ति को तैयार किया गया, इसके बाद 2014 में 5वीं मूर्ति पर सब तैयार हो गए। 5 वीं मूर्ति सभी को बेहद पसंद आई थी। स्टेच्यू को हुबहु दिखाने के लिए उसकी 3D स्केनिंग भी की गई थी। वहीं कंप्यूटर में भी मूर्ति का एक मॉडल तैयार हुआ था। स्टेच्यू को बनाते वक़्त शास्त्रों का भी पूरा ध्यान रखा गया।

हर 15 दिन में टीम जाती थी चीन

जब मूर्ति की स्केनिंग पूरी हुई तो अब इस पर शोध किया गया कि आखिर मूर्ति को कहाँ बनवाया जाए। चीन में कई बड़े स्टेच्यू मौजूद हैं इसलिए टीम ने चीन जाने का फैसला किया। यहाँ चीन की एरोसन कॉर्पोरेशन के साथ भारतीय टीम ने स्टेच्यू बनाने की डील फाइनल कर ली। 2016 में कंपनी ने स्टेच्यू के भागों को बनाना भी शुरू कर दिया था। थर्माकॉल से स्टेच्यू के कई पार्ट्स बनाए गए। वहीं भारतीय टीम भी स्टेच्यू के काम का इंस्पेक्शन करने के लिए हर 10-15 दिन में चीन का दौरा करती थी। हालांकि स्टेच्यू के निचले हिस्से का काम जल्दी निपट गया था लेकिन चेहरे को बनाना वाकई मुश्किल था क्यूंकि चेहरा ही सबसे आकर्षक होने वाला था। चीफ आर्किटेक्ट भी आँखों और चहरे की तस्वीर के साथ तीन बार चीन पहुंचे थे।

मूर्ति का वजन 650 टन

वहीं चेहरा बनाने के लिए करीब 1800 बार करेक्शन भी किया गया था। स्टेच्यू के करीब 1600 भाग अलग अलग तैयार हुए थे। लेकिन स्टेच्यू में अब एक भी वेल्डिंग का निशान नज़र नहीं आता है। धीरे धीरे भागों को भारत भी लाया जा रहा था। 18 महीने में कंपनी ने मूर्ति को तैयार कर दिया था। मूर्ति का वजन भी 650 टन बनाया जा रहा है जो 850 टन स्टील की इनरकोर के सहारे खड़ी हुई है। स्टेच्यू में जिंक और टिन के साथ साथ सोने और चाँदी का भी इस्तेमाल किया गया है।

स्टेच्यू के पास बनाए गए 108 भव्य मंदिर

दरअसल रामानुजाचार्य ने वैष्णव संप्रदाय के 108 दिव्य मंदिरों से प्रेरणा को लिया था। इनमें से 105 मंदिर आज भी भारत में मौजूद हैं और 1 मंदिर नेपाल में है। ऐसे में 108 मंदिरों को भी स्टेच्यू के पास बनाने का फैसला किया गया। हालांकि ये मंदिर आकर में थोड़े छोटे हैं। इन मंदिरों को बनाने के लिए भी करीब 12 हज़ार फोटो इकट्ठा किए गए थे। मंदिरों को भी वास्तु के मुताबिक और कृष्णशिला से बनाया गया है।

108 मंदिर भी बनकर तैयार

वहीं स्टेच्यू के लिए पत्थर भी अलग अलग जगह से लाए गए थे। भारत के राजस्थान से गुलाबी पत्थर, आंध्र और तमिलनाडु से काला पत्थर और भैंसलाना से काला मार्बल लाया गया था। वहीं चीन से भी खास काला मार्बल लाया गया था। वहीं मंदिर के कार्यों को पूरा करने के लिए देश के अलग अलग कोने से कारीगरों को बुलाया गया। 108 मंदिर भी बनकर तैयार हो चुके हैं जिसे अब फाइनल टच दिया जा रहा है। बता दें कि परिसर 200 एकड़ मेंफैला हुआ है जिसमें 40 एकड़ पर स्टेच्यू को बनाया गया है। परिसर में 40 फीट ऊंचा म्यूजिकल फाउंटेन भी बनाया गया है। वहीं परिसर के प्रवेश द्वार पर हनुमान जी और गरुड़ जी की प्रतिमा बनाई गई हैं जो 18 फीट ऊंची हैं।

1400 करोड़ रूपये हो चुके हैं खर्च

रिपोर्ट्स की माने तो स्टेच्यू के लिए चीन की कंपनी ने 20 साल की गारंटी भी दी है। वहीं मूर्ति को पंचलोहा यानि ब्रास, कॉपर, सोना, चाँदी और टाइटेनियम से तैयार किया गया है। शुरुआत में इस प्रोजेक्ट का खर्चा 400 करोड़ के करीब बताया गया था लेकिन फिर ये बढ़कर 800 करोड़ हो गया। लेकिन अब तक इस स्टेच्यू को बनाने में 1400 करोड़ रूपये खर्च हो चुके हैं। स्टेच्यू के लिए देश विदेश से दान भी आया है।

ताकि आज की पीढ़ी उन्हें जान सकें

दुनिया में सबसे ऊंचा और बड़ा होता है उसको ज्यादा तवज्जू दी जाती है इसलिए रामानुजाचार्य की मूर्ति बनाने का फैसला किया गया ताकि आज की पीढ़ी उन्हें जान सकें। म्यूजिकल फाउंटेन में भी रामानुजाचार्य के जीवन से जुड़ी कई खास बातें भी बताई जाएंगी। खास बात तो ये भी है कि 108 मंदिरों की जगह को वास्तुशास्त्र के अनुसार ही तय किया गया है। इससे पहले भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी भी साइट का दौरा करने के लिए आए थे। अब जल्द ही देश के प्रधानमंत्री इस स्टेच्यू का उदघाटन करने वाले हैं। जिस जगह पर इस स्टेच्यू को बनाया जा रहा है उस जगह को श्री रामनगर के नाम से भी जाना जाता है।

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