Sunday, January 16, 2022

तंगहाली में छोड़ी पढ़ाई, चाय बेची मगर नहीं चला काम, फिर हाईटेक खेती से हो गया मालामाल

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नई दिल्ली :कुछ करने का जुनून ही लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। आमतौर पर कई लोग छोटी छोटी मुश्किलों को भी हराने की बजाए उससे हार मानकर बैठ जाते हैं वहीं कुछ लोगों के हौंसलें इतने बुलंद होते हैं कि वे हर बड़ी मुश्किल का सामना भीं बेहद ही आसानी के साथ करते हैं और कड़ी मेहनत से सफलता की कहानी को लिखते हैं।

ऐसे ही एक किसान की कहानी हम आपको बताने जा रहे हैं जिन्होंने कई मुश्किलों का सामना किया लेकिन इरादों को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया। इस किसान का नाम सुंदर लाल चमोली है। सुंदर ने जल्द ही अपनी पढ़ाई को भी छोड़ दिया था। वहीं चाय बेचकर ही वे अपना गुजारा चलाते थे। लेकिन इसके बाद उन्होंने कमर्शियल खेती की शुरुआत की जिससे आज वे अच्छी ख़ासी कमाई कर रहे हैं। आइए जानते हैं खबर को विस्तार से।

12वीं में ही छूट गई थी सुंदर की पढ़ाई

आज कई युवा ऐसी है जो खेती के क्षेत्र में अपना अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। कई युवा तो अपनी बढ़िया नौकरी को छोड़कर खेती में ही अपनी किस्मत को आजमा रहे हैं। आज कहानी एक ऐसे ही किसान जिसने ज्यादा पढ़ाई नहीं की लेकिन आज खेती के क्षेत्र में अपनी पहचान बना रहा है और साथ ही अच्छी ख़ासी कमाई भी कर रहा है। इनका नाम सुंदर लाल चमोली है जो उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल के रहने वाले हैं।

सुंदर ने अपनी जिंदगी में कई काम किए लेकिन उन्हें खास सफलता नहीं मिल पाई। इसके बाद सुंदर ने चाय बेचकर भी गुजारा किया लेकिन वे काम भी नहीं सका। लेकिन आज खेती से सुंदर अच्छी ख़ासी कमाई कर पा रहे हैं और साथ ही लोगों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित भी कर रहे हैं। सुंदर कमर्शियल खेती कर लाखों रूपये भी कमा रहे है।

मीडिया से बातचीत के दौरान सुंदर ने बताया कि उन्होंने ज्यादा पढ़ाई लिखाई भी भी नहीं की है। सुंदर ने 12वीं के बाद ही पढ़ाई लिखाई को छोड़ दिया था। इसलिए जब सुंदर नौकरी के लिए कहीं जाया करते थे तो उन्हें नौकरी भी नहीं मिल पाती थी। इसलिए शुरुआत में सुंदर ने अपने गाँव में ही अपने पिता का खेती में हाथ बटाना शुरू कर दिया। हालांकि उस समय वे पारंपरिक खेती किया करते थे जिससे उन्हें ज्यादा मुनाफा भी नहीं हुआ करता था।

चाय बेचकर चलाया गुजारा

हालांकि जब खेती से भी सुंदर को ज्यादा कमाई नहीं हो पा रही थी तो इसके बाद सुंदर ने एक दुकान खोलने का फैसला किया। लेकिन ये दुकान भी नहीं चल पाई। फिर उन्होंने चाय नाश्ता बेचना शुरू किया कुछ समय तक ये काम अच्छा चला लेकिन इसके बाद ये काम चलना भी बंद हो गया। लेकिन इसके बावजूद सुंदर करीब 7 सालों तक चाय और नाश्ता बेचकर ही गुजारा चलाते रहे।

लेकिन इसके बाद उन्होंने इस काम को भी बन कर दिया था। ऐसे में सुंदर काम की तलाश में इधर से उधर भटक रहे थे। तभी उनके गाँव के भी कई लोग दिल्ली में काम के लिए जा रहे थे। इसलिए सुंदर ने दिल्ली जाने का फैसला किया। सुंदर को उम्मीद थी कि दिल्ली जाकर उन्हें अच्छी ख़ासी कमाई हो पाएगी। इसके बाद ही सुंदर ने एक होटल में काम करना शुरू कर दिया।

हालांकि इस होटल से सुंदर को अच्छी ख़ासी सैलरी मिल तो रही थी लेकिन दिल्ली जैसे बढ़े शहर में खर्च काफी बढ़ गया था। ऐसे में उस सैलरी में भी सुंदर के लिए गुजारा करना काफी मुश्किल हो गया था। ऐसे में ही सुंदर ने गाँव वापस आने का फैसला किया और खेती बाड़ी को शुरू करने का मन बना लिया।

परिस्थितियों ने ली सुंदर की कड़ी परीक्षा

जब सुंदर ने गाँव जाकर खेती करने का फैसला किया तो गाँव में भी कई समस्याएँ उनका इंतज़ार कर रही थी। सुंदर ने बेशक खेती का रास्ता चुन लिया था लेकिन ये सफर भी आसान नहीं होने वाला था। दरअसल सुंदर के खेत एक ही जगह पर नहीं थे वहीं उनके खेत पहाड़ी इलाके में थे। वहीं सभी खेतों की देखभाल करने में भी कई समस्या का सामना करना पड़ता है।

इसके बाद इस समस्या के लिए सुंदर ने किसानों से भी बात करने का फैसला किया। हर किसान इसी समस्या का सामना कर रहा था। सुंदर का मानना था कि अच्छी खेती के लिए खेतों का एक जगह पर होना काफी जरूरी है। हालांकि पहले तो कुछ किसान इस बात के लिए तैयार नहीं हो रहे थे लेकिन समझाने के बाद वे भी इस बात के लिए राजी हो गए।

इसके बाद सभी खेतों को एक ही जगह पर कर दिया गया। यहाँ सुंदर ने सेब, अंगूर और नींबू की खेती करना शुरू कर दिया। खाली बची जमीन पर वे गोभी, मिर्च और टमाटर जैसी सब्जियों को भी उगाने लगे थे। वहीं वे जविक तरीके से ही खेती भी कर रहे थे।

सोशल मीडिया के सहारे बढ़ाया काम

जैविक खेती करने के कारण पहली बार में ही सुंदर को अच्छी पैदावार हुई। इसके बाद वे अपनी फसलों को मंडियों में भी बेचने लगे थे उन्होंने लगातार खेती जारी रखी जिससे पौधों में फल आना भी शुरू हो गए और वे लाखों रूपये की कमाई भी करने लगे। वहीं सुंदर ने ये भी बताया कि इस काम में उनके बच्चे भी उनका पूरा साथ देते हैं। शुरुआत में सुंदर सिर्फ फसलों तक ही सीमित थे लेकिन इसके बाद उनके बच्चों ने उनकी मदद करना शुरू किया।

सुंदर के बच्चों ने सोशल मीडिया के सहारे अपने पिता के बिज़नस को एक नई पहचान दिलाने का काम किया। आज कई ज़िलो से सुंदर को ऑर्डर भी मिल रहे हैं जिससे उनकी कमाई भी अच्छी ख़ासी हो रही है। वहीं हिमाचल, दिल्ली और यूपी जैसे कई राज्य भी सुंदर की फसलों को पसंद कर रहे हैं। फिलहाल सुंदर सिर्फ फल और सब्जियों की खेती ही कर रहे हैं। मौसम के मुताबिक सुंदर को हर वर्ष लाखों रूपये का मुनाफा भी हो जाता है। आज सुंदर को देख कई किसान भी कमर्शियल खेती की तरफ रुख कर रहे हैं।

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