Monday, January 17, 2022

इंजीनियर की अच्छी-भली नौकरी छोडक़र ये युवक बन गया कबाड़ी, अब हर साल कमाता है लाखों रुपए

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नई दिल्ली। महामारी के दौरान देश के अनेकों लोगों को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। इस दौरान कई लोगों की नौकरी गई तो किसी को अपना बिज़नस ही बंद करना पड़ गया। लेकिन इस बीच ऐसे भी कई लोग थे जिन्होंने इस मुश्किल समय में नये अवसरों को तलाश कर लिया। ऐसे ही एक शख्स की कहानी हम आपको बताने जा रहे हैं जिन्होंने ऐसे मुश्किल समय में नौकरी को छोड़ अपना बिज़नस शुरू करने का फैसला किया।

शख्स का नाम ओमप्रकाश प्रजापति है

इस शख्स का नाम ओमप्रकाश प्रजापति है। ओमप्रकाश आज अनेकों लोगों के रोल मॉडल बन चुके हैं। ओमप्रकाश एक ऐसे शख्स हैं जिन्होंने इंजीनियर से कबाड़ी वाला बनने का फैसला किया। लेकिन आज इसी काम से वे अच्छी ख़ासी कमाई भी कर रहे हैं। हालांकि इस बीच उन्हें कई मुश्किलों का सामना भी करना पड़ा था लेकिन ओमप्रकाश ने कभी हार नहीं मानी और सफलता की सीढ़ी को चढ़ते गए। आइए जानते हैं ओमप्रकाश प्रजापति के बारे में।

इंजीनियर के पद पर करते थे काम

आज के समय में मुश्किलों में अवसर तलाशने वाला व्यक्ति ही जिंदगी में आगे बढ़ पा रहा है। आज भी ऐसे कई उदाहरण हमारे सामने हैं जिन्होंने मुश्किलों में हार मानने की बजाए आगे बढ़ने का फैसला किया है। इन्हीं में से एक हैं लखनऊ के रहने वाले ओमप्रकाश प्रजापति। ओमप्रकाश आज अनेकों लोगों के लिए एक मिसाल का काम कर रहे हैं। ओमप्रकाश कबाड़ खरीदने और बेचने का काम करते हैं। जिससे उन्हें अच्छी ख़ासी कमाई हो रही है।

इंजीनियर के पद पर थे ओमप्रकाश

हालांकि इससे पहले ओमप्रकाश एक कंपनी में इंजीनियर के पद पर काम कर रहे थे। ओमप्रकाश हमेशा से ही अपना बिज़नस शुरू करना चाहते थे लेकिन कभी भी उनकी नौकरी छोड़कर काम करने की हिम्मत ही नहीं हुई। ओमप्रकाश ने सिविल इंजीनियर में डिप्लोमा किया हुआ है जिसके बाद वे लखनऊ की एक कंपनी में ही नौकरी करने लगे थे। इस नौकरी में उन्हें हर महीने 30 हज़ार रूपये मिला करते थे।

सब कुछ बंद हो गया

लेकिन देश में महामारी आने से पहले ओमप्रकाश अपने घर छुट्टी के लिए आए हुए थे लेकिन इसी दौरान देश में महामारी ने दस्तक दे दी जिसके बाद सब कुछ बंद हो गया। इस दौरान ओमप्रकाश घर पर ही थे और उनके लिए ये एक अच्छा अवसर था जब वे खुद का कुछ बिज़नस शुरू कर सकते थे। जिसके बड़ा घर परिवार के साथ बातचीत के बाद ओमप्रकाश ने 2020 में “लखनऊ कबाड़ीवाला” की शुरुआत की।

ऐसे आया कबाड़ी वाला का आइडिया

मीडिया से बातचीत के दौरान ओमप्रकाश ने बताया कि नौकरी के दौरान ही उन्हें इस काम को करने का विचार आया था। दरअसल नौकरी के दौरान ओमप्रकाश को जगह जगह जाकर स्क्रैप मैनेजमेंट भी करना होता था जहां लोग कबाड़ भी खरीदने आया करते थे। उस दौरान ओमप्रकाश ने सोचा कि यदि इस काम को अच्छे से किया जाए तो इससे अच्छा खासा मुनाफा कमाया जा सकता है।

वेबसाइट भी तैयार करवा ली

हालांकि इस काम के बारे में ओमप्रकाश ने सोच भी लिया था और इसके लिए एक वेबसाइट भी तैयार करवा ली थी लेकिन इस प्रोजेक्ट को अमल में लाना अभी बाकी था। जब देश में सब कुछ बंद हुआ था उसी दौरान ओमप्रकाश ने इस काम को करने का मन बना लिया था। वहीं उनके परिवार ने भी इस काम को शुरू करने में ओमप्रकाश का पूरा पूरा साथ दिया था। परिवार का साथ मिलने के बाद ही ओमप्रकाश ने नौकरी को छोड़ दिया और इस काम को शुरू कर दिया।हालांकि उस दौरान कई लोगों ने ओमप्रकाश के इस फैसले को गलत बताया क्यूंकि उस वक़्त स्थिति ऐसी थी कि वाकई नौकरी छोड़ना किसी बड़ी समस्या से कम नहीं था। लेकिन अब ओमप्रकाश ने बिज़नस को शुरू करने का फैसला ले लिया था इसलिए अब वे अपने इस फैसले से पीछे नहीं हटना चाहते थे। ओमप्रकाश का मानना था कि अग्र्ब उन्हें असफल होना ही है तो क्यूँ न कोशिश करने के बाद ही असफल हों।

क्या है ओमप्रकाश का बिज़नस मॉडल

बता दें कि ओमप्रकाश ने अपनी वेबसाइट पर 33 सामानों का मूल्य डाला हुआ है। जिसमें तांबा, किताबें, कूलर, केबल जैसे कई उत्पाद शामिल हैं। आज जो लोग बेकार सामान को बेचना चाहते हैं वे इस वेबसाइट का प्रयोग कर सकते हैं। वहीं आप लखनऊ कबाड़ीवाला की वेबसाइट पर जाकर या फिर फोन पर बातचीत के सहारे भी जानकारी हासिल कर सकते हैं। बातचीत के बाद ओमप्रकाश की टीम ही लोगों के घरों से कबाड़ इकट्ठा करने के लिए पहुँचती है।

गोदाम भी बना लिया

वहीं ओमप्रकाश घर घर जाकर ठेले पर सामान इकट्ठा करने वाले लोगों से भी कबाड़ का सामान खरीदते हैं। वहीं ओमप्रकाश के मुताबिक सोशल मीडिया ने भी उन्हें इस काम में खूब मदद की है। आज ओमप्रकाश ने एक गोदाम भी बना लिया है जिसमें काफी सारा सामान उन्होंने इकट्ठा करना शुरू कर दिया है। अपने इस सामान को ओमप्रकाश कई बड़े डीलर्स को भी बेचते हैं। हालांकि अभी उनका काम सिर्फ लखनऊ में ही होता है।

5 हज़ार ग्राहक हो चुके हैं

आज उनके शहर में लगभग 5 हज़ार ग्राहक भी हो चुके हैं। इतना ही नहीं अपने इस सराहनीय कार्य से ओमप्रकाश ने तीन लोगों को रोजगार देने का भी सराहनीय कार्य किया है। आज अपने इस काम से ओमप्रकाश हर महीने 70 हज़ार रूपये की कमाई भी कर रहे हैं। हालांकि इस बीच ओमप्रकाश को कई मुश्किलों का सामना भी करना पड़ा लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। ओमप्रकाश के परिवार ने भी उनका हर कदम पर साथ दिया।

कई शहरों में फैलाना चाहते हैं काम

बता दें कि ओमप्रकाश के मन में कई बारा ऐसे विचार आए थे जब उन्हें लगने लगा था कि अब उन्हें इस काम को बंद कर देना चाहिए लेकिन तब उनके परिवार ने उनका खूब साथ दिया। फिलहाल वे सप्ताह के तीन दिन ही कबाड़ को इकट्ठा करने का काम करते हैं जिसे वे भविष्य में सातों दिन तक बढ़ाना चाहते हैं। वहीं फिलहाल ओमप्रकाश सिर्फ लखनऊ में ही इस काम को कर रहे हैं।

प्रेरणा स्त्रोत बन चुके हैं ओमप्रकाश

लेकिन अब वे धीरे धीरे राज्य के अलग अलग शहरों में भी अपनी पहुँच बनाना चाहते हैं और उसके बाद कई दूसरे राज्यों में भी अपने इस काम को पहुंचाने पर काम कर रहे हैं। वहीं ओमप्रकाश कई नये डीलर्स और ग्राहकों के साथ भी जुड़ने की चाह रखते हैं। ओमप्रकाश का मानना है कि बिज़नस की रणनीति बनाने में ज्यादा वक्त खर्च करने से सिर्फ और सिर्फ इच्छाशक्ति ही कम होती है। ओमप्रकाश के मुताबिक बिज़नस के कुछ पहलू ऐसे भी हैं जिन्हें सिर्फ बिज़नस करने के बाद ही समझा जा सकता है। ओमप्रकाश आज वाकई अनेकों लोगों के लिए प्रेरणा स्त्रोत बन चुके हैं। आज कई लोगों को ओमप्रकाश की कहानी आगे बढ़ने और जिंदगी में सफलता हासिल करने के लिए प्रेरित कर रही है।

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