Sunday, January 16, 2022

कल्पना चावला की तर्ज पर हरियाणा की एक और बेटी ने भरी उड़ान,इसरो में मिला देश का गौरव बढ़ाने का सम्मान

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चंडीगढ़। अब देश की बेटियां किसी भी सूरत में बेटों से कम नहीं हैं, वह अब चांद पर पहुंच चुकी हैं। इन बेटियों ने अपनी मेहनत और निष्ठा से ना केवल अपने माता पिता बल्कि देश और प्रदेश का नाम भी रोशन किया है। लोग आज भी कल्पना चावला को भूले नहीं हैं, जिन्होंने हरियाणा प्रदेश से निकलकर पूरी दुनिया में देश का नाम रोशन कर दिया था। कल्पना चावला को दुनिया भर की बेटियां अपनी प्रेरणा मानती हैं और उनके नक्शे कदम पर चलते हुए समूचे विश्व में अपने देश का गौरव बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही हैं। आज हम आपको ऐसी ही एक बेटी ने मिलाने जा रहे हैं, जिन्होंने कल्पना चावला को अपना आईकॉन मानते हुए इसरो में अपना स्थान बनाया है। इसमें खास बात तो यह है कि यह बेटी भी कल्पना चावला के शहर करनाल की रहने वाली है, जोकि हरियाणा प्रदेश का एक अव्वल शहर है। इस बेटी का नाम है सुरभि, जोकि इंद्री के मूल निवासी है और अपनी मेहनत, निष्ठा और काबलियत के दम पर यह उपलब्धि हासिल की है।

मां-बाप को मिल रहे बधाई संदेश

सुरभि के पिता बलदेव राज और मां वीनू अपनी बेटी की इस उपलब्धि पर फूले नहीं समा रहे। उन्हें चारों ओर से बधाईयां मिल रही हैं और प्रदेश भर के लोग हरियाणा की बेटी को शुभकामना संदेश भेज रहे हैं। सुरभि का कहना है कि ईसरो ने जब एक साथ 100 सैटेलाईट लांच किए थे, तभी उन्होंने अपने मन में यह धारण कर लिया था कि उन्हें भी अपने देश की सेवा के लिए कुछ करना होगा। यह सोचते ही सुरभि ने ईसरो में जाने का मन बना लिया था।

बीटेक पास कर मिली जॉब

हालांकि इससे पहले सुरभि ने इलेक्ट्रिोनिक्स व कम्युनिकेशन में बीटेक की थी और फिर गेट परीक्षा की तैयारी में जुट गई। इस बीच सुरभि को टीसीएस में जॉब मिल गई। कुछ समय जॉब की और इसी बीच उसे बीएसएनएल में जूनियर इंजीनियर के तौर पर जॉब ऑफर की गई। मगर सुरभि तो कुछ ऐसा करना चाहती थी, जिससे उसे देश की सेवा करने का अवसर मिले। यह सोचते हुए ही उन्होंने इसरो में जाने का इरादा बना लिया। इसके लिए उन्होंने इसरो में होने वाली प्रतियोगी परीक्षा दी और अपने हौंसले के दम पर ऑल इंडिया में 8 वीं रैंक हासिल कर ली। इस परीक्षा को शानदार तरीके से पास करने पर सुरभि को एक वैज्ञानिक के रूप में इसरो को ज्वाइंन करने का सुनहरा अवसर मिला।

मां-पिता को दिया श्रेय

सुरभि का कहना है कि वह अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता पिता को देना चाहती है। उन्होंने हर कदम पर उसका सहयोग किया और साथ दिया। आज वह इसरो में जाकर अपने देश सेवा के जज्बे को साकार कर पाई है। इसमें उनके माता पिता का पूरा योगदान है। उन्होंने यह भी कहा कि मेहनत करने वालों की कभी हार नहीं होती। इसलिए एक बार जो ठान लिया जाए तो उसे पूरा करने में पीछे नहीं हटना चाहिए। सुरभि ने देश के युआवों के नाम संदेश दिया है कि बड़ी उपलब्धि हासिल करने के लिए दिन रात की मेहनत करनी होती है, तब जाकर सफलता का स्वाद चखने को मिलता है। इसलिए ऐसी कोई भी बड़ी सफलता पाने के लिए हर युवा को तपस्या करनी चाहिए।

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