Monday, January 17, 2022

सडक़ से फिल्मी दुनिया में कैसे छा गए ठग्गू के लड्डू, सडक़ पर बिकने वाला मामूली लडडू बन गया करोड़ों का व्यापार

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कानपुर । लड्डू खाना हर किसी को बेहद पसंद होता है। त्यौहारों में भी बाज़ारों में लड्डू की भरमार मिलती हैं। वहीं कुछ ऐसी जगह भी हैं जहां के लड्डू बेहद फेमस हैं। आज भी कई लोग ऐसी जगहों के लड्डूओं को खाने के लिए दूर दूर से आते हैं। इन्हीं में एक एक हैं “ठग्गू के लड्डू” जिसे लोग बेहद पसंद करते हैं। आज ये दुकान लड्डुओं का ब्रांड बन चुकी है।

लड्डू खाने दूर दूर से आते हैं लोग

आज भी ठग्गू के लड्डू खाने के लिए दूर दूर से लोग आते हैं। वहीं इस दुकान की टैगलाइन भी बेहद आकर्षित है। इन लड्डुओं का सिलसिला करीब 50 वर्ष पहले शुरू हुआ था और आज ये कारोबार करोड़ों का हो चुका है। आज इन लड्डुओं को कई बड़ी हस्तियाँ भी पसंद कर चुकी हैं। वहीं कई फिल्मों और सीरियल में भी इस दुकान पर शूटिंग हो चुकी है। आइए जानते हैं इस सफर के बारे में।

50 साल पहले शुरू हुआ था ठग्गू के लड्डू का सिलसिला

आज जब भी लड्डुओं की बात आती है तो ठग्गू के लड्डुओं को कोई नहीं भूल पाता। आज भी कई लोग इस दुकान के लड्डुओं के दीवाने हैं। बता दें कि इन लड्डुओं का सिलसिला आज से करीब 50-60 वर्ष पहले शुरू हुआ था। राम अवतार नाम के शख्स उत्तरप्रदेश के गाँव परौली में रहा करते थे। लेकिन कुछ समय बाद वे गाँव से कानपुर आ गए। उनके पास उस वक़्त पैसे भी नहीं थे।

नाम ठग्गू के लड्डू रखा 

राम अवतार की पत्नी स्वादिष्ट लड्डू तैयार किया करती थी। बस इसी को राम अवतार ने अपनी आजीविका बनाने का फैसला किया। राम अवतार अपनी पत्नी के बनाए लड्डुओं को कानपुर की सड़कों पर बेचा करते थे। ये लड्डू वे हाथ में एक बड़ी से थाली लकर घूम घूमकर बेचा करते थे। उस वक़्त भी हर कोई इन लड्डुओं को खूब पसंद किया करता था। बहुत कम समय में ही कानपुर के लोगों ने भी इन लड्डुओं को पसंद करना शुरू कर दिया था। अपने लड्डुओं का नाम भी राम अवतार ने ठग्गू के लड्डू रखा था जो बेहद ही रोचक और दिलचस्प था।

आखिर क्यूं रखा लड्डुओं का नाम “ठग्गू के लड्डू”

आज इस दुकान को राम अवतार पांडे की तीसरी पीढ़ी चला रही है। लेकिन उन्होंने अपने लड्डुओं को ठग्गू के लड्डू का नाम क्यूं दिया इस बात को जानने का हर किसी में बेहद उत्साह रहता है। क्यूंकि जहां आज लोग अपने उत्पाद को अच्छे से अच्छा साबित करने में लगे हुए हैं वहीं लड्डुओं का नाम ऐसा होना वाकई हैरानी वाली बात है। लेकिन इसके बारे में राम अवतार के पोते रवि पांडे ने बताया कि उनके दादा महात्मा गांधी  के बहुत बड़े अनुयायी थे। वे महात्मा गांधी के विचारों से भी बेहद प्रभावित थे। रवि के दादा ने महात्मा गांधी  के साथ कई बड़ी बैठकों में भी हिस्सा लिया था। इस दौरान एक बार महात्मा गांधी जी ने चीनी को सफ़ेद जहर बताया था। गांधी जी की इस बात से राम अवतार भी काफी हैरान परेशान हो गए थे।

ग्राहकों के साथ धोखा नहीं करेंगे

तब राम अवतार ने सोचा कि आखिर वे कैसे बिना चीनी के लड्डुओं को तैयार करेंगे। इसलिए उन्होंने सोचा कि बेशक उन्हें चीनी के साथ ही लड्डुओं को तैयार करना पड़े लेकिन वे अपने ग्राहकों के साथ धोखा नहीं करेंगे। इसलिए उन्होंने अपने लड्डुओं का नाम ठग्गू के लड्डू रखा। जो इस बात को बताता है कि वे अपने लड्डुओं में चीनी का प्रयोग कर रहे हैं जो एक धोखा है। वहीं उन्होंने अपनी ब्रांड की टैगलाइन भी बना दी जिसमें कहा गया कि “ऐसा कोई सगा नहीं, जिसको हमने ठगा नहीं।”

 दूर दूर से चखने आते हैं लड्डुओं का स्वाद

बता दें कि राम अवतार बेहतर रणनीति के साथ अपने उत्पादों को बेचा करते थे। अपने उत्पाद की टैगलाइन और ब्रांड के नाम से राम अवतार ने कई लोगों को बेहद प्रभावित किया था। जानकारी के मुताबिक जब इन्होंने कानपुर के नेता बाजार में दुकान खोली को लड्डुओं को “नेता बाज़ार के लड्डू” नाम दिया और साथ में टैगलाइन रखी कि “दिखने में कुछ और खाने में कुछ और” 1973 में कानपुर में ठग्गू के लड्डू की दुकान को शुरू किया गया था।

दुकान में आग लग गई

हालांकि जब उनका बिज़नस अच्छा खासा चलने लगा तो कुछ ही वर्षों बाद इस दुकान में आग लग गई थी। जिसके बाद 1990 में सरकार के द्वारा दिए गए मुआवजे से उन्होंने दोबारा इस दुकना को शुरू किया था। वहीं रवि के मुताबिक लड्डुओं को बेहद सरल और सामान्य तकनीक से ही बनाया जाता है। आज वे इस दुकान पर काजू लड्डू, विशेष लड्डू और दूध पेडा भी बेचते हैं।

दुकान पर बदनाम कुल्फी भी बिकती है

वहीं उनकी दुकान पर बदनाम कुल्फी भी बिकती है। क्यूंकि इस कुल्फी को सड़कों पर बेचा जाता था इसलिए इस कुल्फी का नाम बदनाम कुल्फी रखा गया था। वहीं आज इस दुकान में राम अवतार के गाँव के कई लोग भी काम करते हैं जिन्हें लड्डुओं को बनाने की विधि भी सिखाई जाती है। वहीं इन लोगों को दुकान के मालिकों द्वारा हीआवास भी दिए जाते है।

हो चुकी है कई फिल्मों और सीरियल की शूटिंग

बता दें कि आज कानपुर की ये दुकान बेहद चर्चा का विषय बन चुकी है। लेकिन इस दुकान ने 2004 में सुर्खियां बटोरना शुरू किया जब इस दुकान पर बंटी और बबली फिल्म की शूटिंग की गई थी। शूटिंग के लिए फिल्म के लीड किरदार भी इस दुकान पर पहुंचे थे। इसके अलावा भी इस दुकान “लापतागंज” और “रग रग में” सीरियल में भी दिखाया जा चुका है। वहीं कई बड़ी हस्तियाँ भी इस दुकना के लड्डुओं की दीवानी हैं। आज इस दुकान का सालाना टर्नओवर 4 करोड़ रूपये तक हो चुका है।

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