Sunday, January 16, 2022

प्रेरणादायक महिला, लाखों के कर्जे के बाद भी नहीं मानी हार, फिर अंगूर की खेती कर खड़ा कर दिया बहुत बड़ा व्यापार

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आमतौर पर माना जाता है कि महिलाएं सिर्फ पुरुषों पर ही निर्भर होती हैं। बिना पुरुषों के महिलाएं कुछ भी नहीं कर सकती। लेकिन आपको बता दें कि आज भी ऐसी कई महिलाएं हैं जिन्होंने बिना पुरुषों की मदद के अपनी जिंदगी में सफलता को हासिल किया। आज भी कई महिलाएं अनेकों लोगों के लिए मिसाल कायम कर चुकी हैं। आज हम आपको एक ऐसी ही महिला के बारे में बताने जा रहे हैं जो वाकई आज नारी शक्ति की मिसाल बन चुकी हैं।

इस महिला का नाम संगीता बोरासते हैं। संगीता आज अंगूर की खेती से अपनी एक अलग पहचान बना चुकी हैं। उनके अंगूर आज विदेशों में भी भेजे जाते हैं। लेकिन एक समय था जब संगीता लाखों रूपये के कर्ज़ में डूबी हुई थी। लेकिन संगीता ने हार नहीं मानी और तमाम मुश्किलों का सामनाम करते हुए सफलता के मुकाम को हासिल किया। आइए जानते हैं संगीता बोरासते के बारे में।

शुरुआत में खेती में हुआ था नुकसान

यदि सीखने की लगन और सफलता हासिल करने का जुनून हो तो सफलता आपके कदम जरूर चूमती है। जहां आज भी कुछ महिलाओं को घर की चार दीवारी में बंद कर रखा जाता है वहीं आज कुछ महिलाएं अपने परिवार का सहारा बन चुकी हैं। इन्हीं में से एक हैं संगीता बोरासते। संगीता महाराष्ट्र के नासिक के निफाड की रहने वाली हैं और फिलहाल वे अंगूर की खेती करती हैं।

मीडिया से बातचीत के दौरान संगीता ने बताया कि 1990 में संगीता की शादी हो गई थी। संगीता की शादी महज 15 वर्ष की उम्र में हुई थी। शादी के समय संगीता के पति एक बैंक में नौकरी किया करते थे। लेकिन इसके बाद उनके कुछ घरेलू विवाद हुए जिसके बाद संगीता और उनके पति को हिस्से की 10 एकड़ जमीन मिली थी। इसके बाद संगीता के पति ने नौकरी छोड़ खेती बाड़ी करने का फैसला कर लिया था।

हालांकि संगीता के पति को खेती के बारे में ज्यादा नहीं पता था। इसलिए जब संगीता और उनके पति ने खेती करना शुरू किया तो उन्हें काफी नुकसान का सामना करना पड़ा था। नुकसान इतना ज्यादा होने लगा था कि दोनों को 10 एकड़ में से ढाई एकड़ जमीन भी बेचने की नोबत आ गई। उनके ऊपर करीब 30 लाख रूपये का कर्ज़ हो गया था।

पति के बड़ा संगीत ने संभाली ज़िम्मेदारी

हालांकि कर्ज़ के बाद भी संगीता और उनके पति ने खेती करना नहीं छोड़ा। इसके कुछ समय बाद उनके खेतों में अच्छी ख़ासी फसल होने लगी थी। अब संगीता को भी एक साल में अच्छा खासा मुनाफा होने की उम्मीद थी जिससे वे कर्ज़मुक्त भी ही सकते थे लेकिन इसी बीच संगीता के पति का निधन हो गया जिसके बाद घर और बच्चों न्की सारी ज़िम्मेदारी संगीता के कंधों पर ही आ गई थी। वहीं संगीता को 30 लाख रूपये का कर्ज़ भी चुकाना था।

संगीता को भी खेती के बारे में ज्यादा कुछ नहीं पता था। वे सिर्फ मजदूरों से काम करवाना ही जानती थी। लेकिन मजबूरी के कारण वे मजदूरों को भी काम पर नहीं रख सकती थी। ऐसे में संगीता खुद को हारा हुआ महसूस करने लगी लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। शुरुआत में संगीता अपने रिश्तेदारों की मदद ले रही थी लेकिन कुछ समय बाद संगीता ने खुद ही खेती के बारे में जानना और समझना शुरू कर दिया।

इसके बाद भी संगीता की जिंदगी में कई मुश्किलें आई लेकिन संगीता ने खुद को कमजोर नहीं पड़ने दिया। इस दौरान उन्हें खेतों का भी पूरा ध्यान रखना होता था जिसके लिए वे लगातार मेहनत कर रही थी। संगीता ने बताया कि अंगूर की बेल पर मौसम का बहुत असर होता है इसलिए कई बार वे बगानों को गरम रखने के लिए रात पर बॉनफायर भी किया करती थी।

आज विदेशों में एक्सपोर्ट होते हैं संगीता के बागानों के अंगूर

इस बीच संगीता की फसल भी अच्छी होने लगी थी और साथ ही उन्हें सह्याद्रि फार्म्स का भी सपोर्ट मिला जिससे संगीता को फसल को बाहर विदेशों में एक्सपोर्ट करने में मदद मिली। संगीता ने भी अपनी फसल की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया ताकि एक्सपोर्ट होने में भी किसी प्रकार की कोई परेशानी का सामना न करना पड़े।

बता दें कि आज अंगूर की खेती से संगीता अच्छी ख़ासी कमाई कर रही हैं। इस खेती से संगीता हर वर्ष करीब 40 लाख रूपये की कमाई भी कर रही हैं और साथ ही इसमें से उन्हें 15 लाख रूपये का मुनाफा भी होता है। आज संगीता ने अपना सारा कर्ज़ भी चुका दिया है। अपनी मेहनत की कमाई से संगीता ने अपनी दो बेटियों की शादी भी कर दी है और तीसरी बेटी की शादी की तैयारियां भी चल रही है।

संगीता का मानना है कि हमें जिंदगी में कभी भी हौंसलें को नहीं छोड़ना चाहिए और कभी भी हार नहीं मानी चाहिए। हालांकि महामारी के दौरान संगीता को कई मुश्किलों का भी सामना करना पड़ा था क्यूंकि महामारी के दौरान वे अपनी फसल को बाहर नहीं बेच पा रही थी। जिसके कारण उन्हें करीब 35 लाख रूपये का नुकसान भी हुआ था। लेकिन एक बार वापस से संगीता की जिंदगी वापस पटरी पर लौट रही है। आज हर कोई संगीता की तारीफ कर रहा है। जहां महिलाएं छोटी छोटी मुश्किलों से हार मानकर बैठ जाती हैं वहीं आज संगीता जैसी महिलाएं परिवार का सहारा बन अनेकों लोगों के लिए उनकी प्रेरणा भी बन जाती हैं।

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