Sunday, January 16, 2022

देश की रक्षा में है इस प्रदेश का अव्वल नाम, हर घर में मिलेंगे सैनिक और शहीद, हंसते हुए देते हैं अपनी जान

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नई दिल्ली। भारतीय युवाओं में सेना में जाने का अलग ही जज़्बा है। भारत के अनेकों युवा भारतीय सेना में भर्ती होने के लिए सालों साल कड़ी मेहनत करते हैं। लेकिन आपको बता दें कि राजस्थान के हर दूसरे तीसरे घर में आपको सैनिक या शहीद मिल जाएंगे। हाल ही में भारत के CDS जनरल बिपिन रावत का जो हेलिकॉप्टर क्रैश हुआ है उसमें राजस्थान के कुलदीप राव झुंझुनु भी सवार थे। लेकिन आपको बता दें कि राजस्थान के अनेकों युवा भारतीय सेना में भर्ती होते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक हर वर्ष राजस्थान से करीब 5 लाख युवा भारतीय सेना में भर्ती की परीक्षा को देते हैं जिसमें से 20 हज़ार का चयन भी होता है। इतना ही नहीं रिपोर्ट्स में ये भी दावा किया गया है। हर वर्ष देश की रक्षा करने वाले शहीदों में 35 शहीद राजस्थान के ही होते हैं। आज भी कई शहीदों की पीढ़ियाँ देश की रक्षा कर रही हैं। आइए जानते हैं इस खबर से जुड़ी कुछ और खास बातें।

कई जांबाज पीढ़ियों से कर रहे हैं देश सेवा

बता दें कि आज भी राजस्थान के ऐसे कई जांबाज हैं जो पीढ़ियों से देश की सेवा में अपना योगदान देते हुए आ रहे हैं। इतना ही नहीं राजस्थान से बेटे ही नहीं बेटियाँ भी देश की रक्षा में बढ़ चढ़कर योगदान दे रही हैं। इसी कड़ी में सीकर की रहने वाली योगेश शेखावत भी उन्हीं में से हैं जिनकी पीढ़ी देश की रक्षा करती आ रही है। योगेश फिलहाल भारतीय वायुसेना में मेजर के पद पर तैनात हैं और उनके पति वीरेंद्र सिंह भी पायलट के तौर पर कार्यरत हैं। इतना ही नहीं योगेश के पिता पूरण सिंह शेखावत भी 1977 में वायुसेना में भर्ती हुए थे और उसके बाद 1997 में ACB का हिस्सा बन गए थे। पूरण सिंह के पिता मोहन सिंह और दादा प्रह्लाद सिंह भी भारतीय सेना में अपनी सेवाएँ दे चुके हैं। पूरण सिंह के पिता ने द्वितीय विश्व युद्ध और दादा ने प्रथम विश्व युद्ध में भी भाग लिया था।

कारगिल युद्ध में भी दिखाया अपना दमखम

हम जानते हैं कारगिल युद्ध में भारत के भी कई जवान शहीद हो गए थे। जिसमें राजस्थान के बनवारीलाल भी शामिल थे। मीडिया से बातचीत के दौरान बनवारीलाल के छोटे भाई सीताराम ने बताया कि उस वक़्त एक बकरी चराने वाले ने उन्हें सूचना दी थी कि देश में कुछ आतंकी घुस आए हैं। जिन्हें पीछे खंदेड़ने के लिए बनवारीलाल को उनकी यूनिट के साथ भेजा गया था। बनवारीलाल को बजरंग पोस्ट पर जाना था जो की काफी ऊंची भी थी। आतंकी भी भारतीय जवानों पर फायरिंग कर रहे थे लेकिन जब तक भारतीय जवानों के पास हथियार थे तब तक भारतीय सेना लड़ रही थी। लेकिन इसके बाद आतंकियों ने जात रेजीमेंट को घेर लिया था और सभी को पाकिस्तान ले गए थे। पाकिस्तान में करीब 24 दिनों तक सभी के साथ बर्बरता की गई। किसी के कान में रोड डाली तो किसी की आँखें निकालकर वापस बार्डर पर ही फेंक गए। लेकिन सभी जवान अपनी अंतिम सांस तक लड़े थे।

फौज में जाना मानो राजस्थान की परंपरा

आपको बता दें कि राजस्थान में ऐसी कई जगह हैं जहां के हर दूसरे घर में आपको शहीद या सैनिक का परिवार मिल जाएगा। शेखावाटी के कई गाँव ऐसे ही हैं जहां घर घर में सैनिक और शहीद हैं। राजस्थान में ऐसे भी कई परिवार जिनकी पीढ़ियाँ देश की सेवा कर रही हैं। इतना ही नहीं जब भी किसी का पिता शहीद होता है तो उसके बच्चों को भी सेना में ही बेचने का प्रण ले लिया जाता है।बता दें कि जोधपुर के शेरगढ़ गाँव से देश को सबसे ज्यादा सैनिक मिलते हैं। इसलिए इस गाँव को सैनिक फैक्ट्री भी कहा जाता है। इस गाँव के हर घर से एक सैनिक बार्डर पर तैनात होकर देश की रक्षा कर रहा है। इतना ही नहीं विश्व युद्ध से अब तक इस गाँव में 100 से भी ज्यादा सैनिक शहादत दे चुके हैं। पिछले वर्ष इसी गाँव में 50 शहीदों की मूर्ति का अनावरण भी किया गया था। राजस्थान राष्ट्रपति की सुरक्षा में भी अपना अहम योगदान देता है। राजस्थान की राजपूत रेजीमेंट और जाट रेजीमेंट को अलग से बनाया गया है। राजपूत और कायमखानी के लिए तो अलग से भर्ती भी निकाली जाती है। राष्ट्रपति की सुरक्षा में भी जाट, राजपूत और सिख जवानों को तैनात किया जाता है।

राजस्थान के कई जवान सेना में सर्वोच्च पदों पर भी रह चुके हैं

बता दें कि राजस्थान के ऐसे भी कई जवान हैं जो सेना मेंसर्वोच्च पदों पर रहकर भी अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। इनमें लेफ़िनेंट जनरल सगत सिंह भी शामिल हैं। सगत राजस्थान में चुरू के रहने वाले हैं जिन्होंने 1967 में चीनी सैनिकों पर बिना प्रधानमंत्री के ऑर्डर के ही टॉप के गोले दाग दिए थे जिसमें 300 सैनिक मारे गए थे। वहीं दूसरा नाम ब्रिगेडियर भवानी सिंह का भी है जो जयपुर के रहने वाले हैं। भवानी सिंह नें 1971 में पाकिस्तानी सीमा में घुसकर दुश्मनों को करारा जवाब दिया था। इन्होंने पाकिस्तान के कई शहरों पर भी कब्जा कर लिया था।

तीसरे नंबर पर झुंझुनु का धनूरी गाँव

इतना ही नहीं देश में शहादत देने वाले टॉप तीन गांवों में तीसरे नंबर पर झुंझुनु का धनूरी गाँव आता है। इस गाँव के 17 जवान शहादत दे चुके हैं। वहीं अभी भी गाँव के 270 जवान सेना में शामिल हैं। 1965 और 1971 के युद्ध में भी राजस्थान के सैनिकों ने अपना अहम योगदान दिया था। वहीं कारगिल युद्ध में भी राजस्थान के कई सैनिकों ने दुश्मनों को धूल चटा दी थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 2020-21 की सेना भर्ती रैली में शेखावाटी रीज़न से 55 हज़ार युवाओं ने रैली में हिसा लिया था। जिसमें से 3200 युवाओं का चयन भी हुआ। यहाँ 57 डिफेंस अकादमी भी हैं। कारगिल में भी शहीद होने वाले जवानों में शेखावाटी जवानों की संख्या ही अधिक थी। शेखावाटी को सैनिकों की जननी भी कहा जाता है। आर्मी भर्ती में भी राजस्थान तीसरे नंबर पर आता है। वहीं वायुसेना भर्ती में राजस्थान का दूसरा स्थान है।

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