Sunday, January 16, 2022

मात्र 28 रुपए का कर्ज चुकाने अमेरिका से हरियाणा आया ये शख्स, साल 1954 में ली थी इस हलवाई से उधारी

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हिसार। कहते हैं कि जीवन में यदि आपने किसी से उधार लिया है तो वह आपको अगले जन्म में भी चुकाना पड़ता है। कर्मों के यही फल हैं कि आपको किसी भी जन्म में लिया गया उधार देना ही पड़ता है। कई बार तो ऐसी भी कहावत सामने आई है कि फ्लां व्यक्ति अपना उधार वसूलने के लिए किसी के घर में बेटे, पिता या फिर पत्नी के रूप में भी जन्म ले लेता है और जैसे ही उसका उधार चुकता होता है, वह वहां से चला जाता है। मगर हरियाणा के हिसार में एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां एक व्यक्ति अपनी उधारी चुकाने के लिए सात समुंंद्र पार से चला आया और वह भी मात्र 28 रुपयों के लिए। इस व्यक्ति को शायद यह अच्छी तरह से पता होगा कि यदि इस जन्म में उसने अपना उधार नहीं चुकाया तो अगले जन्म में वह जरूर चुकाना होगा।

इस मामले ने सभी को चौंका दिया

जिसे भी इस व्यक्ति के सात समुंद्र पार से अपना उधार चुकाने के लिए हिसार आने की जानकारी मिली, वह बुरी तरह से चौंक गया। दरअसल हिसार के रहने वाले 67 साल के बीएस उप्पल नामक व्यक्ति ने मोती बाजार के एक हलवाई से 28 रुपए की उधारी की थी। श्री उप्पल के बारे में बता दें कि वह भारतीय नौसेना से रिटायर हो चुके हैं और अपने बेटे के पास अमेरिका चले गए थे। श्री उप्पल को हमेशा ये याद रहता था कि उन्हें हिसार के शंभू हलवाई की उधारी चुकानी है, जिससे वह खुद को बैचेन समझा करते थे और हमेशा उन्हें अपने सिर पर एक बोझा सा महसूस होता था।

साल 1954 में की थी उधारी

श्री उप्पल ने बताया कि यह उधारी उन्हें 1954 से देनी है। उन्होंने दुकान के मालिक विनय बंसल को जो किस्सा बताया, वह बेहद रोचक है। दरअसल श्री उप्पल ने जो बात बताई वह शुरू हुई थी विनय बसंल के दादा शम्भू दयाल के साथ से। श्री उप्पल ने बताया कि साल 1954 में वह उनकी दुकान पर आए थे और दही की लस्सी में पेडे डालकर पिए थे। वह अक्सर उनकी दुकान पर आया करते थे और उनका वहां उधार खाता था। मगर उस दिन वह 28 रुपए की उधारी करके चले गए और उसके बाद उनकी नौसेना में भर्ती हो गई। उसके बाद से उनका दोबारा शंभू हलवाई की दुकान पर आना नहीं हुआ। इसके बाद रिटायर होने के बाद वह अपने बेटे के पास अमेरिका चले गए।

अमेरिका में उन्हें उधारी सताती थी

श्री उप्पल ने बताया कि बेशक वह अमेरिका चले गए थे, मगर श्ंाभू जी के 28 रुपए की उधारी और हरजीराम हिन्दू हाई स्कूल उन्हें कभी भूले नहीं थे। इस स्कूल से उन्होंने दसवीं पास की थी। इसके बाद उनका इस स्कूल में कभी जाना ही नहीं हुआ। वह इस स्कूल को देखने के लिए बेहद उत्सुक थे। अब जैसे ही उन्हें भारत आने का मौका मिला तो वह सबसे पहले उनकी दुकान पर अपनी उधारी चुकाने के लिए आए हैं । यह कहकर श्री उप्पल ने विनय बसंल के हाथ में 28 रुपए की उधारी और उसके ब्याज के तौर पर 10 हजार रुपए रख दिए। हालांकि विनय बसंल ने यह रकम लेने से साफ इंकार कर दिया, मगर श्री उप्पल ने उनसे आग्रह किया कि वह इस राशि को स्वीकार कर लें, नहीं तो उनके सिर पर यह बोझ हमेशा के लिए रह जाएगा।

पाकिस्तान की पनडुब्बी डुबोई थी

वह अमेरिका से यह उधारी चुकाने के लिए ही विशेष तौर पर आए हैं। काफी आग्रह करने के बाद विनय ने यह रकम स्वीकार कर ली। जिसके बाद उन्होंने राहत की सांस ली। इसके बाद वह अपना स्कूल देखने गए, मगर वहां की स्थिति देखकर उन्हें निराश ही हाथ लगी। बता दें कि बीएस उप्पल ने भारत-पाक युद्ध में मुख्य भूमिका निभाई थी। कमांडर के तौर पर वह उस पनडुब्बी पर तैनात थे, जिसने पाकिस्तान के जहाज को डुबो दिया था और अपने हजारों सैनिकों को सुरक्षित वापिस ले आए थे। इस बहादुरी के लिए उन्हें नौसेना पुरस्कार से भी नवाजा गया था।

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