Sunday, January 16, 2022

फरीदाबाद के प्राईवेट अस्पतालों के खिलाफ आई 88 शिकायत, सभी को क्लीनचिट, सफेद हाथी साबित हुआ मेडीकल बोर्ड

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फरीदाबाद। प्राईवेट अस्पतालों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए बी.के.अस्पताल का मेडीकल बोर्ड सफेद हाथी साबित हो रहा है। हरियाणा सरकार ने यह सिविल सर्जन की अध्यक्षता में यह 8 सदस्यीय बोर्ड गठित किया हुआ है, ताकि प्राईवेट अस्पतालों के खिलाफ आने वाली शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की जा सके। मगर हैरत की बात है कि इस बोर्ड के पास शिकायतें तो खूब आईं, मगर कार्रवाई किसी भी अस्पताल के खिलाफ नहीं की जा सकी। इससे साबित होता है कि प्राईवेट अस्पताल मालिकों का रूतबा कितना ऊंचा है और यह बोर्ड केवल ढोंग है और एक सरकारी औपचारिकता से ज्यादा कुछ नहीं है।

सिविल सर्जन हैं बोर्ड के अध्यक्ष

इस बोर्ड में सिविल सर्जन अध्यक्ष हैं और बाकि सदस्यों में चार सरकारी और चार प्राईवेट डाक्टर शामिल हैं। इंडियन मेडीकल एसोसिएशन के प्रधान भी इस बोर्ड में सदस्य की हैसियत के तौर पर शामिल हैं। सैनिक कालोनी सैक्टर 49 फरीदाबाद में रहने वाले तरूण चोपड़ा ने एक आरटीआई लगाकर इस बोर्ड की असलियत को सभी के सामने ला दिया है। इस बोर्ड के चेहरे पर पड़े कानूनी नकाब के पीछे जो चेहरा है, वह इस आरटीआई में मिले जवाब के बाद सभी के सामने आ गया है।

4 साल में आई 88 शिकायत

तरूण चोपड़ा ने इस आरटीआई के माध्यम से इस बोर्ड के संदर्भ में जानकारी मांगी थी। चोपड़ा ने इस आरटीआई के माध्यम से पूछा है कि जनवरी 2018 से लेकर नवंबर 2021 तक यानि कि चार साल के कार्यकाल में बोर्ड के पास प्राईवेट अस्पतालों के खिलाफ कुल कितनी शिकायत आई। हैरत की बात है कि इस आरटीआई के जवाब में पता चला कि बोर्ड के पास चार साल की अवधि में कुल 88 शिकायतें आई हैं। आपको यह जानकार हैरत होगी कि शिकायतकर्ता को बोर्ड में अपनी एप्लीकेशन देने के बाद चार से पांच बार चक्कर कटवाए जाते हैं। मगर आश्चर्य की बात है, तब भी उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं होती। इस आरटीआई के जवाब से तो ऐसा ही खुलासा हुआ है।

सभी अस्पतालों को मिली क्लीन चिट

बताया गया है कि 88 शिकायतों के बाद भी किसी प्राईवेट अस्पताल के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। यानि कि किसी अस्पताल को दोषी नहीं पाया गया है और शिकायत देने वाला ऐसे ही शिकायत देकर चला गया। 88 शिकायतों के बाद सभी अस्पतालों को क्लीनचिट दी गई है। जब किसी अस्पताल पर कार्रवाई नहीं की गई तो वह क्लीन चिट ही मानी जाएगी। इस तरह से सरकार व बोर्ड दोनों ही मिलकर आम आदमी को मूर्ख बनाने पर तुले हुए हैं।

फर्जी साबित हो रहा है मेडीकल बोर्ड

आरटीआई के इस जवाब के बाद यह भी साबित हो गया है कि यह बोर्ड पूरी तरह से फर्जी है और उसका कोई भी वजूद नहीं माना जा सकता। हां यदि किसी प्रशासनिक अधिकारी या फिर सरकारी प्रतिनिधि का इन प्राईवेट अस्पतालों से काम पड़ जाए, तब यह बोर्ड पूरी तरह से हरकत में आ सकता है। मगर आम आदमी को इस बोर्ड से इंसाफ नहीं मिल सकता।

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