Monday, January 17, 2022

DGP की महिला जागरूकता रैली की फजीहत करवा रही है फरीदाबाद पुलिस, खुला घूम रहा है आरोपी SDO

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फरीदाबाद। एक ओर हरियाणा पुलिस के नवनियुक्त डीजीपी प्रशांत कुमार अग्रवाल राज्य में महिला सुरक्षा को लेकर  जागृति यात्रा का आयोजन कर रहे हैं, वहीं फरीदाबाद पुलिस एक पीडि़त महिला का मुकदमा दर्ज करने की बजाए उसे दर-दर की ठोकर खिला रही है। महिला पुलिस व उच्च अधिकारी इस महिला की शिकायत पर तत्काल कार्रवाई करने की बजाए जांच के नाम पर पूरे मामले को भटकाने की कोशिशों में लगे हैं। इससे साबित होता है कि फरीदाबाद पुलिस का महिला थाना हाथी के दांत खाने के और दिखाने के और नीति पर काम कर रहा है। पीडि़त महिला अपनी शिकायत देने के बावजूद इंसाफ की बाट जोह रही है, मगर महिला थाने को इससे कोई लेना देना नहीं। वह आरोपी को जांच के नाम पर हर रोज थाने बुलाकर पूरे मामले का मजाक बना रही है।

ये है पूरा मामला

बता दें कि सैनिक कालोनी सैक्टर 49 फरीदाबाद की रहने वाली शिखा सिंघल ने नगर निगम फरीदाबाद के एसडीओ सुमेर सिंह के खिलाफ महिला थाना सैक्टर 21 ए में 27-11-2021 को शिकायत दी है। इसमें नगर निगम के एसडीओ सुमेर सिंह पर शरीरिक व मानसिक शोषण के आरोप लगाए गए हैं। जानकारी के अनुसार सैनिक कालोनी सैक्टर 49 में रहने वाली महिला आर्किटेक्ट शिखा सिंघल ने महिला थाना सैक्टर 21 ए को शिकायत देकर आरोप लगाया है कि एसडीओ सुमेर सिंह उस पर बुरी नजर रखता है। वह एक कामकाजी महिला है और काम के सिलसिले में नगर निगम के सर्वे विभाग में जाती है। वह जब भी निगम जाती है तो एसडीओ सुमेर सिंह उससे कंप्रोमाईज करने की बात कहता है, ऐसा ना करने पर वह धमकी देता है और उनका काम ना करने की चेतावनी भी देता है।

सुमेर सिंह की गंदी नजरों का सामना करना पड़ा

वह जब भी निगम में गई, तब उसे सुमेर सिंह की गंदी नजरों का सामना करना पड़ा है। मगर महिला होने की वजह से वह हर बार उसकी बातों को अनदेखा करती रही है, जिसके चलते उसके हौंसले इतने बुलंद हो गए हैं कि वह अब सरेआम उसके साथ अभद्रता करने से भी नहीं चूकता। इससे पहले भी वह सुमेर सिंह के खिलाफ शिकायत कर चुकी है, मगर हर बाज उस पर कई अधिकारियों द्वारा उसे डराकर शिकायत वापिस करवा दी जाती है। महिला होने की वजह से उसे दबा दिया जाता है और सुमेर सिंह के हौँसले बढ़ जाते हैं।

सुमेर ने उसका हाथ पकड़ लिया

25 नवंबर 2021 को भी वह अपने काम से नगर निगम एनआईटी गई थी, वहां उसका सामना एसडीओ सुमेर सिंह से हुआ। सुमेर ने उसका हाथ पकड़ लिया और उसे एक तरफ खींच कर ले गया। वहां उसने कहा कि या तो तू मेरी बात मान ले, जो मैं कहता हूं, वैसे-वैसे करती रह तो इस दफ्तर में तेरा कोई काम नहीं रूकेगा और अगर तूने मेरी बात नहीं मानी तो पहले तो तुझे नौकरी से निकलवाया था, अबकी बार जान से मरवा दूंगा। तूने कमिश्नर को जो शिकायत दी है, उससे मेरा कुछ नहीं बिगेडग़ा। पीडि़त महिला ने आरोप लगाया है कि एसडीओ रसूखदार और सिफारिशी अधिकारी है और उससे मुझे जान का भी खतरा है।

पुलिस को बरगलाने की कोशिश

महिला का कहना है कि वह अपने प्रभाव के दम पर पुलिस को बरगलाने की कोशिश कर रहा है। यदि ऐसा हुआ तो वह पुलिस कमिश्नर से लेकर मुख्यमंत्री तक अपनी बात रखेगी। शिकायत देने के बाद से वह मानसिक रूप से खुद को प्रताडि़त महसूस कर रही है। शिखा सिंघल ने कहा कि सुमेर सिंह अपनी बातों से कमिश्नर नगर निगम को भी बरगला रहा है। यदि कमिश्नर दोनों पक्षों की बात सुनेंगे तो सारी हकीकत उनके सामने स्पष्ट रूप से आ जाएगी और उन्हें यह भी पता चल जाएगा कि आखिर हकीकत क्या है। शिखा सिंघल ने पुलिस से तत्काल रूप से एसडीओ सुमेर सिंह के खिलाफ तत्काल मुकदमा दर्ज किया जाए। इस बारे में एसडीओ सुमेर सिंह का पक्ष जानने का भी प्रयास किया गया,मगर उन्होंने कोई रिप्लाई नहीं दिया।

 


हरियाणा पुलिस द्वारा जागरूकता रैली के दौरान एक कार्यक्रम में महिलाओं को किया गया सम्मानित

 डीजीपी की महिला जागरूकता रैली की फजीहत

 हैरत की बात है कि जहां एक ओर हरियाणा पुलिस के सख्त निर्देश हैं कि पहले महिला द्वारा दी गई शिकायत पर कार्रवाई की जाए, उसके बाद जांच की जानी चाहिए। ताकि महिला को समय रहते इंसाफ मिलने की उम्मीद रहे। मगर फरीदाबाद के इस महिला थाने में अलग ही खेल खेला जा रहा है। हर रोज एसडीओ के साथ अधिकांश वह लोग गवाही के लिए बुलाए जाते हैं, जोकि मौके पर थे ही नहीं। इससे ऐसा लगता है कि फरीदाबाद पुलिस को अपने डीजीपी की महिला जागरूकता रैली की फजीहत करवानी है। यदि पुलिस को ऐसा ही काम करना है तो फिर डीजीपी की महिला जागरूकता रैली का कोई औचित्य नहीं रह जाता। अब हरियाणा पुलिस के उच्च अधिकारियों को देखना होगा कि वह महिलाओं के अधिकारों को लेकर जागरूकता रैली निकाले या फिर शिकायत देने वाली महिलाओं को दर दर की ठोंकर खिलाए।

 

 

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