Sunday, January 16, 2022

कूडाघर बन गया फरीदाबाद, चारों ओर है गंदगी के ढेर, फिर भी मशीन से सफाई पर खर्च हो रहे करोड़ों रुपए

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फरीदाबाद। एक ओर नगर निगम फरीदाबाद का खजाना पूरी तरह से खाली है। वेतन देने के लिए निगम के पास फंड का अभाव है, मगर दूसरी ओर आज भी इस निकाय में जमकर धांधली हो रही है। हैरत की बात है कि लोगों को निगम आयुक्त के तौर पर नियुक्त आईएएस अधिकारी व फरीदाबाद के डीसी रहे यशपाल यादव से काफी उम्मीदे हैं, इसके बावजूद भी निगम में धांधली का खेल रूक नहीं रहा है। जी हां हम बात कर रहे हैं स्विपिंग मशीन की आड़ में होने वाले खेल की। जिसे उजागर किया है सिटीमेल न्यूज ने, पंरतु हैरत की बात है कि इस पूरे मामले पर नगर निगम प्रशासन से लेकर सरकार तक सभी चुप्पी साधे हुए हैं। मजे की बात तो यह है कि इन सभी को अच्छी तरह से पता है कि स्विपिंग मशीन से ना तो शहर की सफाई हो रही है और ना ही इसका लाभ फरीदाबाद के लोगों को मिल पा रहा है। मगर फिर भी नगर निगम के खजाने से लाखों रुपए के बिल जारी हो रहे हैं। इसे सरेआम धांधली नहीं तो और क्या कहेंगे।

इन मशीनों से सफाई कम और प्रदूषण अधिक फैलता है

बता दें कि राज्य सरकार ने नगर निगम फरीदाबाद सहित प्रदेश की अनेक निकायों को शहर की सडक़ों पर सफाई करने के लिए स्विपिंग मशीन दी हैं। इन मशीनों के रखरखाव और उन्हें चलाने के लिए ठेकेदार भी नियुक्त किए गए हैं। आपने इन मशीनों को रात के समय सडक़ के बीच में बनें डिवाईर के साथ धूल उड़ाते हुए देखा होगा। इन मशीनों से सफाई कम और प्रदूषण अधिक फैलता है, मगर फिर भी कहा जा रहा है कि यह सडक़ किनारे जमी मिटटी की सफाई कर रही है। मगर आपको बता दें कि ये मशीन ना तो सफाई कर पा रही है और ना ही गीली मिटटी को हटाने अथवा उठाने की क्षमता रखती है। फिर भी निगम इस काम के लिए मशीन संचालकों को लाखों रुपए का भुगतान करता है। इसके अलावा मशीन को डीजल उपलब्ध करवाने की जिम्मेदारी भी निगम प्रशासन के कमजोर कंधों पर हैं।

निष्पक्ष व उचित जांच करवानी चाहिए

लोगों का कहना है कि एक ओर निगम के पास वेतन देने के लिए पैसे नहीं हैं, ऊपर से सफाई मशीनों को मोटा भुगतान करने की जिम्मेदारी सौंप दी गई है, वह भी एक केवल धांधली के लिए, जिससे आम आदमी का कोई सरोकार नहीं है। इस सारे मामले को लेकर दायर की गई आरटीआई का जवाब भी नगर निगम का सफाई विभाग देना नहीं चाहता। प्रथम अपील लगाने के बावजूद भी संबंधित अधिकारी इस आरटीआई का जवाब इसलिए नहीं दे रहा, ताकि सारा भंडा ना फूट जाए। यदि वह अपनी जिम्मेदारी के प्रति ईमानदार हैं तो उन्हें तत्काल इस आरटीआई का जवाब देना चाहिए। वर्ना तो यही माना जाएगा कि इस सारे खेल में नीचे से लेकर ऊपर तक सभी शामिल हैं। इस मामले में निगम आयुक्त यशपाल यादव को तत्काल संज्ञान लेते हुए निष्पक्ष व उचित जांच करवानी चाहिए, ताकि वह अपने कार्यकाल में इस बड़े गड़बड़ झाले को रूकवा सकें।

वेतन देने तक के पैसे नहीं हैं

बता दें कि नगर निगम अपने खजाने को ऐसे गड़बड़ी करने वालों पर लुटा रहा है। यही वजह है कि निगम के खजाने की बदहाली यहां तक पहुंच गई है कि उसके पास अपने कर्मचारी व अधिकारियों को वेतन देने तक के पैसे नहीं हैं। फिलहाल निगम प्रशासन को राज्य सरकार से आर्थिक सहायता की उम्मीद है। सरकार ने निगम को 200 करोड़ रुपए देने का वायदा किया है। लोगों का कहना है कि राज्य सरकार को इस ओर गंभीरता पूर्वक ध्यान देने की जरूरत है, नहीं तो सरकार के 200 करोड़ रुपए भी देखते ही देखते खर्च हो जाएंगे।

 

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