Monday, November 29, 2021

हाथ में 60 पैसे तक नहीं थे, 300 रुपए कमाते थे पिता, बेटी ने खड़ी कर दी 2000 करोड़ रुपए की कंपनी

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 नई दिल्ली।  किसी ने सच ही कहा है कि मेहनत और संघर्ष के आगे गरीबी या प्रतिकूल परिस्थितियाँ नहीं टिक पातीं| सच्ची लगन और मेहनत के आगे सफलता को झुकना ही पड़ता है| आज के लेख को पढ़कर अवश्य ही आपको किसी फिल्म की याद आ जाए लेकिन आज का हमारा लेख आपके लिए प्रेरणास्त्रोत जरूर साबित होगा| आज का लेख हम एक ऐसी महिला को समर्पित करने जा रहे हैं जिसने प्रतिकूल परिस्थितियों को हराकर पूरे देश में अपना और अपने परिवार का नाम रोशन किया है| आज की कहानी एक ऐसी महिला की है जिसने सामाजिक उपेक्षाओं का सामना कर खुद को समृद्ध बनाया और जिसके पास कभी 60 पैसे तक नहीं थे वह आज 2000 करोड़ की कंपनी की मालकिन बन चुकी हैं|
कमानी ट्यूबस की मालकिन कल्पना सरोज
जी हाँ अभी तक शायद आपने अंदाज़ा भी लगा लिया होगा क्यूंकि जिस महिला के बारें में हम आज बताने जा रहें हैं आज उन्हें किसी परिचय की आवश्यकता नहीं है| हम बात कर रहे हैं कमानी ट्यूबस की मालकिन कल्पना सरोज के बारें में| कल्पना सरोज महाराष्ट्र के अकोला जिले की रहने वाली हैं| कल्पना का जन्म एक दलित परिवार में हुआ| कल्पना की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी| कल्पना के पिता कमाई का एकमात्र साधन थे| कल्पना के पिता हवलदार की नौकरी करते थे जिसके लिए उन्हें मात्र 300 रुपये मिलते थे, इन पैसो से कल्पना के पूरे परिवार का खर्च चलता था| लेकिन कल्पना इन सभी परिस्थितियों से बाहर आना चाहती थी, जिसके लिए उन्होंने खूब संघर्ष किया और आज वह 2000 करोड़ की कंपनी की मालकिन हैं, कल्पना सिर्फ एक नहीं ,दो नहीं बल्कि छ्ह कंपनियों की मालकिन हैं|
ससुराल वाले नहीं देते थे खाना
कल्पना ने बचपन से ही बहुत दुख देखे थे क्यूंकि वह एक दलित परिवार से थीं और एक लड़की थी| लड़कियों को समाज में बोझ समझा जाता है इसलिए इस बोझ को कम करने के लिए उनका 12 साल की उम्र में विवाह कर दिया गया| शादी के बाद कल्पना के हालत बद से बद्तर हो गए| कल्पना के ससुराल वाले उन्हें खाने के लिए खाना तक नहीं देते थे साथ ही उनके साथ जानवरों जैसा बर्ताव करते थे| कल्पना ने बताया कि एक बार उनके पिता घर आए उन्होंने जब ये सब देखा तो वह कल्पना को वापस उनके घर ले गए| लेकिन हमारे समाज में ससुराल से आई लड़की का मायके में रहना इतना आसान नहीं होता| इतना दुख झेलने के बाद कल्पना ने आत्महत्या का प्रयास किया लेकिन भगवान को कुछ और ही मंजूर था|
 मुंबई आई और बदल गया जीने का तरीका
16 साल कि उम्र में कल्पना अपने चाचा के पास मुंबई आ गईं और सिलाई की नौकरी करनी शुरू कर दी लेकिन वह इस काम को भी अच्छे से नहीं कर पाई| धीरे-धीरे उन्होंने वापस मशीन पर अपना हाथ बैठाया और 16-16 घंटे काम करने लगी| उसके बाद कल्पना जी के पास एक आदमी आया जो अपना प्लॉट 2.5 लाख में बेच रहा था उसने कहा आप मुझे एक लाख रुपये देदो बाकी बाद में दे देना , कल्पना की किस्मत ने उनका साथ दिया और रातों-रात वह प्लॉट 50लाख का हो गया|
कमानी ट्यूबस के लिए कल्पना बनी मसीहा
1985 में विवाद के कारण कमानी ट्यूबस कंपनी बंद हो गई जिसके बाद कमानी के वर्कर्स कल्पना के पास गए ,लेकिन जब कल्पना को पता चला कि कंपनी 116 करोड़ के कर्ज़ में डूबी हुई है तो उन्होंने कंपनी को अपनाने से मना कर दिया लेकिन जब कल्पना को पता चला कि कंपनी के कारण वर्कर्स भूखे मर रहे हैं तो उन्होंने अपनी किस्मत आज़माने का फैसला किया और परिणाम आज आपके सामने है| आज जिस महिला के पास गाँव के रास्ते एक जगह से दूसरी जगह जाने तक के पैसे नहीं थे आज उनकी कंपनी के नाम पर मुंबई जैसे बड़े शहर के दो रस्तों के नाम हैं, ‘राजाभाई कमानी और कुर्ला कमानी|” आज यह कंपनी 500 करोड़ की कंपनी बन गई है| इस सराहनीय कार्य के लिए कल्पना को 2013 में पद्म श्री से भी सम्मानित किया गया था| आज कल्पना करोड़ो महिलाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत बन चुकी हैं| कल्पना जी की कहानी हमें साफ तौर पर बताती है कि लड़कियां किसी से कम नहीं हैं और न ही वह बोझ हैं|
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