Sunday, October 17, 2021

फेरस बिल्डर ने नहीं लौटाए निवेशकों के 250 करोड़, ग्रीवेंस कमेटी में अपनी पीठ थपथपाते रहे डिप्टी सीएम

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फरीदाबाद। उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने  जिला परिवेदना एवं कष्ट निवारण समिति की मासिक बैठक में कई शिकायतों का निपटारा किया था लेकिन अब कुछ लोग एक शिकायत के निपटारे पर सवाल उठा रहे हैं। कई बार हुई ग्रीवेंस कमेटी की बैठक में  प्रमुख मामला रहा फेरस मेगापोलिस सिटी सेक्टर-70 के बिल्डर और निवेशकों के बीच का , जिसमें उप मुख्य्मंत्री को गुमराह किया गया। ऐसा फेरस के कई निवेशकों का कहना है। निवेशकों ने मीडिया को बताया कि सोमवार को उन्हें हुडा कन्वेंशन सेंटर सेक्टर-12 में प्रवेश करने की अनुमति ही नहीं  मिली और बाहर से ही वापस लौटा दिया गया। कुछ लोगों ने कहा कि उन्हें धक्के मारकर बाहर निकाल दिया गया जबकि पहले की बैठकों में ऐसा नहीं होता था। उन्हें अंदर जाने दिया जाता था। इन निवेशकों ने साइट पर जाकर प्रदर्शन भी किया जिनमे धर्मपाल, राजेश कत्याल, रणवीर सिंह, रविंदर ओबेराय, विनय  गौड़,ओपी शर्मा, मोहन सिंह शामिल थे।

लाखों रूपये के प्लाट खरीदने वालों ने बताया

लगभग 9 -10 साल पहले फेरस मेगापोलिस सिटी सेक्टर-70 में  लाखों रूपये के प्लाट खरीदने वालों ने बताया कि सोमवार शाम उस समय हमारी नींद गायब हो गई जब हमने मीडिया में देखा कि दो लोग ग्रीवेंस कमेटी की बैठक में उप मुख्य्मंत्री दुष्यंत चौटाला का धन्यवाद कर रहे हैं और बोल रहे हैं कि  बिल्डर और प्लाट खरीदनें वालों में बात बन गई है और 90 प्रतिशत लोगों के करीब 250 करोड़ रुपये कंपनी द्वारा वापिस कर दिए गए हैं और  बाकी लोगों का भुगतान भी जल्द मिल जाएगा। निवेशकों ने कहा ये खबर सुन जहाँ हमारे होश उड़ गए तो वहीं अगले दिन फरीदाबाद के कुछ अखबारों में भी इसी तरह की खबरों ने हमारे कलेजे पर पत्थर रौंदने का काम किया।

चौटाला को पूरी तरह से गुमराह किया

निवेशकों का कहना है कि उप मुख्य्मंत्री दुष्यंत चौटाला को पूरी तरह से गुमराह किया है।  निवेशकों ने इन दोनों व्यक्तियों पर आरोप भी लगाए और कहा कि बिल्डर ने इन्हे खरीद लिया है और ये उसी की भाषा बोलने लगे हैं तभी इन लोगों ने दुष्यंत चौटाला को भरी महफ़िल में गुमराह कर उनकी छबि धूमिल करने का प्रयास किया और हमारे पेट पर लात मारने का षड़यंत्र रचा है।  आपको बता दें कि  यह मामला 18 सितंबर-2019 को पहली बार ग्रीवेंस कमेटी की बैठक में आया था। परिवादी  ने शिकायत दी थी कि 102 एकड़ की परियोजना में फेरस मोगापोलिस सिटी के निदेशकों ने 400 से अधिक निवेशकों को धोखा दिया है। कुछ बंजर भूमि को छोड़ कर एक भी भूखंड और साइट पर अन्य कोई काम नहीं हुआ है। बिल्डर और निदेशकों के खिलाफ मुकदमे भी दर्ज हैं। बाद में इस परिवाद पर 25-12-2019 और फिर 15-2-2020 को आयोजित बैठक में भी सुनवाई हुई थी।

एक साल तक बैठक ही नहीं हुई

बाद में कोरोना के चलते एक साल तक बैठक ही नहीं हुई। पिछले बार जब बैठक में उपमुख्यमंत्री ने फिर से दोनों पक्षों की बात सुनी और अब तक हुई प्रगति बारे पूछा। डिप्टी सीएम को बताया गया कि बिल्डर न तो उनकी रकम लौटा रहे हैं और न ही उन्हें फ्लैट या वैकल्पिक स्थान पर उचित जमीन दी जा रही है। आरोपित बिल्डर सुरेंद्र सेठ ने अपनी ओर से सहयोग की बात कही, पर दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहे। इसके बाद  उपमुख्यमंत्री ने अतिरिक्त उपायुक्त की अध्यक्षता में कमेटी गठित कर हर 15 दिन में रिपोर्ट भेजने को कहा।

बिल्डर ने हमें कोई भुगतान नहीं किया

सोमवार को हुई बैठक में डिप्टी सीएम को बताया गया कि बिल्डर और निवेशकों में सहमति  बन गई है और बिल्डर ने निवेशकों का बकाया पैसा दे दिया है। इन लोगों ने दुष्यंत चौटाला का आभार भी जताया। जब ये खबर अन्य निवेशकों तक पहुँची तो उनके होश उड़ गए । जिनका कहना है कि बिल्डर ने हमें कोई भुगतान नहीं किया है। कई निवेशकों का कहना है कि इस जगह पर प्लाट खरीदने के लिए हमने बैंक से लोन लिया और प्लाट खरीदा और अब भी हर महीने बैंक की क़िस्त भर रहे हैं। उम्मीद है कि न्याय मिलेगा और हमारा प्लाट हमारे पास होगा, लेकिन अब तक हमारे साथ अन्याय ही होता आ रहा है। निवेशकों ने बताया कि कोर्ट में हम कोई वकील भी खड़े करते हैं तो बिल्डर उन वकीलों को लाखों रूपये देकर खरीद लेता है, इसलिए हम सब अब तक न्याय के लिए धक्के खा रहे हैं।

तब से  निवेशक खून के आंसूं रो रहे हैं

मालूम हो कि 2012 में फेरस ग्रुप  ने अख़बारों में विज्ञापन निकलवाया था जिसमे आईएमटी से लगती जमीन सेक्टर-70 में लग्जरी सुविधाएं जैसे पार्क, स्कूल, अस्पताल, शापिंग कांप्लेक्स, स्वीमिंग पूल आदि जैसी चीजों का सपना दिखाकर निवेशकों को प्लाट बेच दिया था । लोगों से 85 फीसदी तक रकम की वसूली कर ली और इस दौरान वहां कुछ मजदूर लगा दिए कि सड़क सीवर का काम चल रहा है जल्द प्रोजेक्ट पूरा होगा। लोग पैसा जमा करते चले गए।  कई वर्षों तक मौके पर कोई ईमारत नहीं बनी। तब से  निवेशक खून के आंसूं रो रहे हैं। अब उनका कहना है कि 2012 से अब तक हम धक्के खा रहे हैं, हमें न्याय नहीं मिला। अब तक वो जमीन उसी हालत में है। निवेशक पूरी तरह से ठगों के चक्कर में  आकर अपनी जमा पूंजी गँवा चुके हैं।

बिल्डर ने नहीं लौटाए 250 करोड़

बता दें कि ग्रीवेंस कमेटी की बैठक में डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला के सामने फेरस ग्रुप द्वारा 400 निवेशकों का करीब 250 करोड़ रुपए हड़पने की शिकायत रखी गई थी। मगर जैसे ही यह शिकायत डिप्टी सीएम के सामने आई तो उन्हें बताया गया कि यह मामला निपट चुका है और बिल्डर ने अधिकांश निवेशकों का रुपया लौटा दिया है, बाकि जो लोग हैं जल्द ही उनकी रकम भी बिल्डर द्वारा वापिस दे दी जाएगी। इस आधार पर डिप्टी सीएम ने ग्रीवेंस कमेटी में अपनी उपलब्धि के तौर पर यह बयान दे दिया और अपनी पीठ खुद ही ठोंककर यह बयान जारी करवा दिया कि बिल्डर ने अपने 400 निवेशकों को उनका रुपया वापिस लौटा दिए हैं। जैसे ही यह बात बाहर आई तो निवेशकों ने हंगामा कर दिया।

डिप्टी सीएम की करवा दी फजीहत

पीडि़त निवेशकों ने आरोप लगाया कि उन्हें ग्रीवेंस कमेटी की बैठक में शामिल ही नहीं होने दिया गया और वह बैठक के बाहर ही रोक दिए गए और उन्हें अपनी शिकायत रखने के लिए अंदर जाने ही नहीं दिया गया। पीडि़त निवेशकों ने यह भी बताया कि इस मामले में डिप्टी सीएम को गुमराह किया गया है। वहीं निवेशकों ने यह आरोप भी लगाया है कि इस बिल्डर की जमीन को सत्ता से जुड़े दो बड़े लोगों ने अपने अधीन कर लिया है और अब वह इस पूरे प्रोजेक्ट को किसी दूसरे नाम से बेच रहे हैं। इनमें से एक बिल्डर है और सत्ता के भीतर उसकी गहरी पैठ है और दूसरा सत्ता में शामिल बड़ा उद्योगपति है। मगर इस पूरे मामले में जिस तरह से डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला की फजीहत करवाई है, वह शहर भर में चर्चा बना हुआ है।

 

 

 

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