Sunday, October 17, 2021

फरीदाबाद के महारानी वैष्णोदेवी मंदिर में तीसरे नवरात्रे पर हुई मां चंद्रघंटा की भव्य पूजा, भक्तों ने लगाई अपनी अरदास

Must Read

दिल्ली में बन रही है सबसे बड़ी सुरंग सडक़, बिना जाम के फर्राटा भरेंगे एनसीआर और हरियाणा के लोग

नई दिल्ली। दिल्ली के लोगों के लिए यह बड़ी खुशखबरी हो सकती है। अब उन्हें दिल्ली के जाम से...

खूबसूरत होने के साथ ही बेहद ही इंटेलीजेंट हैं IAS टीना डाबी, UPSC स्टुडेंटस को देती हैं टिप्स

नई दिल्ली। यूपीएससी पास करने के बाद आईएएस अधिकारियों को कौन सी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। यह...

केंद्रीय मंत्री गुर्जर ने कहा, राशन कार्ड है तो जरूर मिलेगा मुफ्त अनाज, टेंशन लेने की जरूरत नहीं

फरीदाबाद । प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना जरूरतमंद परिवारों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण महत्वकांक्षी योजना है। यह विचार ऊर्जा एवं...
फरीदाबाद। तीसरे नवरात्रे पर महारानी वैष्णोदेवी मंदिर में मां चंद्रघंटा की भव्य पूजा अर्चना की गई। मां चंद्रघंटा की पूजा करने के लिए मंदिर में सुबह से ही भक्तों का तांता लगना आरंभ हो गया। इस अवसर पर मंदिर संस्थान के प्रधान जगदीश भाटिया ने सभी श्रद्धालुओं का भव्य स्वागत किया तथा उनके बीच प्रसाद का वितरण करवाया। इससे पहले श्री भाटिया ने मंदिर में प्रातकालीन पूजा का शुभारंभ करवाया। इस अवसर पर शहर के जाने माने उद्यमी एवं लखानी अरमान समूह के चेयरमैन केसी लखानी ने माता रानी के दरबार में अपनी हाजिरी लगाई तथा पूजा अर्चना में हिस्सा लेकर देश की खुशहाली और सुख समृद्धि की कामना की। मां चंद्रघंटा की पूजा के अवसर पर मंदिर में एसपी भाटिया, विनोद पांडे, नीलम मनचंदा, गुलशन भाटिया, प्रताप भाटिया, रमेश , जोगिंद्र एवं नरेश मौजूद थे।
माता रानी की चुनरी एवं प्रसाद भेंट किया
मंदिर संस्थान के प्रधान जगदीश भाटिया ने सभी अतिथियों को माता रानी की चुनरी एवं प्रसाद भेंट किया। मंदिर में आए हुए श्रद्धालुओं को मां चंद्रघंटा महिमा का बखान करते हुए जगदीश भाटिया ने कहा कि यह देवी पार्वती का विवाहित रूप है। भगवान शिव से शादी करने के बाद देवी महागौरी ने अर्ध चंद्र से अपने माथे को सजाना प्रारंभ कर दिया और जिसके कारण देवी पार्वती को देवी चंद्रघंटा के रूप में जाना जाता है। वह अपने माथे पर अर्ध-गोलाकार चंद्रमा धारण किए हुए हैं। उनके माथे पर यह अर्ध चाँद घंटा के समान प्रतीत होता है ।
माता चंद्रघंटा के नाम से जाना जाता है
अतः माता के इस रूप को माता चंद्रघंटा के नाम से जाना जाता है अत्र-शस्त्र: दस हाथ – चार दाहिने हाथों में त्रिशूल, गदा, तलवार और कमंडल तथा वरण मुद्रा में पाँचवां दाहिना हाथ। चार बाएं हाथों में कमल का फूल, तीर, धनुष और जप माला तथा पांचवें बाएं हाथ अभय मुद्रा में रहते हैं, शांतिपूर्ण और अपने भक्तों के कल्याण हेतु  सदैव अपने भक्तों के कल्याण की प्रार्थना करती हैं। श्री भाटिया ने बताया कि मां को शुक्र ग्रह प्रिय है तथा प्रसाद में उन्हें खीर का प्रसाद अच्छा लगता है तथा उन्हें सफेद रंग काफी अधिक पसंद है।

- Advertisement -
- Advertisement -

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Connect With Us

223,344FansLike
3,123FollowersFollow
3,497FollowersFollow
22,356SubscribersSubscribe

Latest News

दिल्ली में बन रही है सबसे बड़ी सुरंग सडक़, बिना जाम के फर्राटा भरेंगे एनसीआर और हरियाणा के लोग

नई दिल्ली। दिल्ली के लोगों के लिए यह बड़ी खुशखबरी हो सकती है। अब उन्हें दिल्ली के जाम से...
- Advertisement -

More Articles Like This

- Advertisement -
Do NOT follow this link or you will be banned from the site!