Friday, October 22, 2021

हरियाणा में सडक़ों पर गडढों की जानकारी दें और पाएं इतने रुपए का ईनाम, जानें इस योजना का क्या हुआ अंजाम

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चंडीगढ़। देश भर में हरियाणा ऐसा तीसरा राज्य है, जहां सडक़ों पर होने वाले गडढों की वजह से सबसे अधिक मौतें हुई हैं। इस कलंक को मिटाने के लिए हरियाणा सरकार ने एक ऐसी मोबाईल ऐप शुरू की थी, जिसकी सहायता से सडक़ों पर गडढों की जानकारी जुटाई जा सके। हालांकि इस मोबाईल ऐप की वजह से सरकार के पास तमाम गडढों वाली सडक़ों की जानकारी तो पहुंचनी शुरू हो गई, मगर उसका लाभ लोगों को नसीब नहीं हो पाया। यही वजह है कि राज्य सरकार द्वारा लांच की गई हरपथ ऐप सफल नहीं हो सकी है। सरकार ने हरपथ ऐप की शुरूआत 1 अप्रैल 2020 को शुरू की थी, जिसे एक डेढ साल से भी अधिक हो चुका है।

जानकारी देने पर सौ रुपए का ईनाम

बकायदा हरियाणा सरकार ने अपने बजट में प्रावधान किया था कि इस ऐप के माध्यम से सडकों पर गडढों की फोटो भेजने वाले लोगों को प्रोत्साहन के रूप में सौ रुपए का ईनाम दिया जाएगा। इस ऐप पर फोटो अपलोड करने पर ना केवल लोगों को सौ रुपए का ईनाम देने की घोषणा की गई थी, बल्कि प्रदेशवासियों को भरोसा दिलवाया गया था कि जियो मैपिंग के माध्यम से सडक़ का पता लगाकर संबंधित ठेकेदार से उसे 96 घंटों के भीतर ठीक करवा दिया जाएगा। यदि इस समय के भीतर सडक़ ठीक नहीं होती है तो ठेकेदार पर प्रतिदिन एक हजार रुपए के हिसाब से जुर्माने लगाया जाएगा। इस जुर्माना राशि में से ही शिकायतकर्ता को 100 रुपए का ईनाम दिया जाएगा।

गडढों से जाती है जानें

बता दें कि देश भर में सडक़ हादसों की असली वजह गडढे होते हैं। इनकी वजह से ही सडक़ हादसों में काफी अधिक संख्या में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों को मानें तो साल 2015 से लेकर साल 2018 के बीच ही सडक़ों पर गडढों की वजह से हजारों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। सडक़ों पर गडढों की वजह से होने वाले हादसों में नंबर वन पर महाराष्ट्र है तो दूसरे नंबर पर उत्तर प्रदेश का नाम लिया जा सकता है। इसी कड़ी में हरियाणा भी पीछे नहीं है। सरकार ने प्रदेश की सडक़ों को सुधारने के लिए ही हरपथ ऐप की शुरूआत की थी, मगर सरकार का यह उददेश्य सफल नहीं हो पाया है। आज भी प्रदेश भर में सडक़ पर गडढों की भरमार है और लोगों को रोड एक्सीडेंट में अपनी जान गंवाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

स्मार्ट शहरों में तो और भी बुरा हाल

वहीं दूसरी ओर यदि बात करें सडक़ों पर गडढों की तो अब प्रदेश भर के अधिकांश शहर की सडक़ें अपने गडढों के लिए ही पहचाने जाने लगी हैंं। अब तो यह भी पता नहीं चलता कि सडक़ों पर गडढें हैं या गडढों में सडक़ें। सरकार की यह योजना बुरी तरह से फ्लॉप हो गई है। प्रदेश में यदि उन शहरों की बात करें, जिन्हें स्मार्ट सिटी के अंतर्गत चुना गया है, वहां की स्थिति तो और भी खराब है। राज्य भर के इन प्रमुख शहरों की स्थिति बदत्तर हो गई है। फरीदाबाद औद्योगिक क्षेत्र को भी स्मार्ट शहरों के अंतर्गत चुना गया है, मगर इस शहर की सडक़ें तो भगवान भरोसे हैं और कोई भी विभाग उनकी स्थिति को सुधारने की दिशा में काम नहीं करना चाहता। इसी तरह से करनाल और गुरूग्राम भी भगवान भरोसे ही कहे जा सकते हैं।

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