Sunday, October 17, 2021

इस युवक ने छोड़ी लाखों की नौकरी तो रिश्तेदारों ने मारे ताने, बेकार फूलों से शुरू किया करोड़ों का धंधा

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नई दिल्ली। बड़ी जनसंख्या से वायु और जल दोनों लगातार प्रदूषित होता जा रहा है। इसको बचाने के लिए सरकार की ओर से तरह तरह की स्कीम तो लाई जाती है, लेकिन यह स्कीम काफी कम ही कामयाब हो पाती है। फिर भी कुछ लोग ऐसे है जो पर्यावरण को बचाने में जी-जान से लगे हुए है। यह लोग न केवल पर्यावरण को संरक्षित कर रहे है, बल्कि दूसरों को रोजगार भी दे रहे है। ऐसे लोगों में अंकित अग्रवाल और रोहित प्रताप का नाम शामिल है। जिन्होंंने लाखों के पैकेज की नौकरी छोडक़र एक ऐसा स्टार्टअप शुरू किया, जिसका कोई भविष्य नजर नहीं आ रहा था।

अंकित ने इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की

कानपुर के रहने वाले अंकित अग्रवाल ने आईआईटी कानपुर ने इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। इसके बाद उनको 14 लाख के पैकेज पर नौकरी भी मिल गई। परिवार वाले सभी खुशी से झूम उठे। क्योंकि किसी के लिए इससे खुशी की बात क्या हो सकती है कि ग्रेजुएशन करते ही 14 लाख पैकेज की नौकरी लग जाए। सभी रिश्तेदारों को भी बता दिया गया अंकित ने नौकरी तो हासिल कर ली थी, लेकिन उनका नौकरी में बिल्कुल भी मन नहीं लग रहा था। हालांकि परिवार वाले सभी बहुत खुश थे। उनको लग रहा था कि अंकित के सपने पूरे हो जाएंगे। इधर अंकित के मन में कुछ ओर ही चल रहा था। इस दौरान उन्होंने विदेश में रहने वाले अपने दोस्त से बात की। उन्होंने दोस्त को मन की बात बताते हुए कहा कि वह कुछ नया करना चाहते है। जिससे समाज के दूसरे लोगों को भी फायदा हो। इसके कुछ दिन बाद उनका विदेशी दोस्त भारत घूमने आ गया।

गंगा मां ने दी नई दिशा

अंकित के जीवन को गंगा मां नेे एक नई दिशा दी। जब उनका विदेशी दोस्त भारत आया तो वह अपने दोस्त के साथ गंगा किनारे घूमने के लिए गए। वहां उन्होंने देखा कि बासी फूलों को गंगा में बहाया जा रहा है। लाखो टन बासी फूल गंगा नदी में बहा दिए जाते है। जिससे पानी दूषित होता है। बस इसी दृश्य को देखकर अंकित के मन में नया आइडिया आ गया। अंकित का विदेशी दोस्त तो वापस चला गया, लेकिन उसने अंकित के मन में सवाल छोड़ दिया। उन्होंने विदेश में रहने वाले अपने दोस्तों से बासी फूलों को रिसाईकिल करने के बारे में जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने मंदिरों में जाकर संपर्क किया। ताकि मंदिरों से बासी फूल मिल सके। मंदिर प्रबंधन को क्या दिक्कत हो सकती थी। उनके लिए बासी फूलों का बोझ ही कम होता। उन्होंने फूल देने के लिए तुरंत हा कर दी।

 फूल डॉट काम में 1.4 मिलियन डॉलर का निवेश

सारी जानकारी एकत्र होने के बाद अंकित ने नौकरी छोडक़र फूल डॉट काम शुरू किया। नौकरी छोडऩे पर परिवार वाले काफी नाराज हुए। रिश्तेदारों ने भी ताने देने शुरू कर दिए। लेकिन अंकित मन में कुछ ओर ही सोच कर बैठे थे। उन्होंने अपना कारोबार शुरू कर दिया था। अंकित के फूल डॉट काम पर बासी फूलों को रिसाईकिल करके बनाई गई सामग्री बिकती है। शुरुआत में तो कारोबार को चलाने में थोड़ी परेशानी हुई, लेकिन फिर कारोबार चल निकला। अंकित के इस स्टार्टअप में आईआईएन फंड ने 1.4 मिलियन डॉलर का निवेश किया। जिसके बाद तो अंकित की गाड़ी पूरी तरह से चल निकली। अंकित इस समय 2 करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार कर रहे है।

हरियाणा के रोहित कर रहे करोड़ों का कारोबार

अंकित कई अवार्ड से सम्मानित हो चुके है। संयुक्त राष्ट्र यंग लीडर्स अवार्ड, सीओपी 2018 द नेशंस मोमेंटम आफ चेंज अवार्ड, एशिया सस्टेनेबिलिटी अवार्ड 2020, हांगकांग एलक्किटी ट्रांसफार्मिंग लाइव्स अवार्ड्स, लंदन और ब्रेकिग द वाल आफ साइंस बर्लिन अवार्ड भी अंकित को मिल चुका है। अंकित की कंपनी अब तिरुपति बालाजी से भी बासी फूलों को एकत्र करती है। हरियाणा के रोहित प्रताप भी बेकार फूलों से करोड़ों रुपए का कारोबार कर रहे है। वह बेकार फूलों से अगरबती बनाने का काम करते है। उन्होंने अपने इस काम की शुरुआत हरिद्वार से की है। उनका कहना है कि उनके कारोबार से तीर्थ स्थलों को भी स्वच्छ रखा जा सकता है।

अगरबती बनाने का प्रशिक्षण लिया

रोहित बताते है कि बचपन से ही उनका ऋषिकेश घाट पर आना जाना रहा। वहां पर उन्होंने देखा कि लाखों टन फूलों को बेकार में गंगा नदी में बहा दिया जाता है। ऐसे फूलों को रिसाईकिल करके दूसरे प्रयोग में लाया जा सकता है। जिससे नदी भी स्वच्छ रहेगी और उनको कारोबार भी मिल जाएगा। रोहित ने इसके बाद फूलों सें अगरबती बनाने का प्रशिक्षण लिया। इसके बाद उन्होंने तीन लाख की लागत से पूरा प्रोजेक्ट लगाया। फिर उत्तराखंड में ही गंगा किनारे किराए पर मकान लेकर ओडिनी प्रोडेक्ट प्राइवेट लिमिटेड नाम से कंपनी शुरू की। इसके बाद उनकी कंपनी में बासी फूलों की रिसाईकलिंग होने लगी। तीर्थ नगरी से बासी फूलों को बटोरने में ऋषिकेश नगर निगम भी उनकी मदद करता है

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