Thursday, September 23, 2021

टीचर की बेटी की प्रेरणादायक कहानी, बचपन में पापा की एक सीख ने बना दिया आईपीएस अफसर

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नई दिल्ली। सिविल सर्विस की तैयारी करने वाले कैंडिडेट अलग-अलग बैकग्राउंड से आते है। कई कैंडिडेट ऐसे होते है जो बचपन से ही आईपीएस या आईएएस बनने को लेकर सपना देखते है। फिर इसके लिए मेहनत भी करते है। अंत में वह सफल भी हो जाते है। ऐसे ही कैंडिडेट में लकी चौहान भी है। जिन्होंने बचपन में कही गई अपने पिता की बात को पूरी तरह से गाठ बांध लिया। फिर शिक्षिका की यह बेटी आईपीएस बन गई। लकी उत्तर प्रदेश बुलंदशहर के खुर्जा गांव की रहने वाली है। उनके पिता छोटे से बिजनेसमैन है। जबकि मां स्कूल में टीचर है। लकी का बैकग्राउंड कही से भी आईएएस और आईपीएस वाला नहीं था। उनके परिवार में कोई भी सिविल सर्विस में नहीं गया है। लेकिन बचपन में हुई एक प्रतियोगिता ने उनके जीवन की दिशा बदलकर रख दी।

तुमको भी बड़ा होकर डीएम ही बनना है

लकी ने नर्सरी क्लास में एक प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था। जिसमें उन्होंने पहला स्थान हासिल किया। प्रथम स्थान आने पर उनको डीएम और एसपी ने सम्मानित किया। इस पर लकी के पिता ने कहा कि तुमको भी बड़ा होकर डीएम ही बनना है। जिसके बाद तो लकी ने यह बात अपने गाठ बांध ली। उन्होंने तय कर लिया कि वह आईएएस या आईपीएस बनकर ही रहेगी। लकी ने बारहवीं साइंस से की। इसके बाद उन्होंने बीए अंग्रेजी लिटरेचर और इतिहास में किया। उनकी सरकारी नौकरी भी लग गई। लेकिन लकी ने बचपन में ही आईपीएस बनने का सपना पाला हुआ था। ऐसे में उनका किसी और चीज में कैसे मन लगता। उन्होंने सरकारी नौकरी करते हुए ही यूपीएससी की तैयारी की।

यूपीएससी 2012 में 276 रैंक हासिल की

लकी पहले दो प्रयास में सफल नहीं हो पाई। दोनो बार उन्होंने खूब मेहनत की। लेकिन फिर उन्होंने निराशा को पीछे छोड़ते हुए अपनी पुरानी गलतियों से सबक लेकर दोबारा तैयारी की।  उन्होंने यूपीएससी 2012 में 276 रैंक हासिल की। लकी को केंद्र सरकार की ओर से त्रिपुरा कैडर दिया गया। त्रिपुरा में रहते हुए उन्होंने कई अहम पदों पर अपनी सेवाएं दी। अपनी कार्यशैली से जनता को प्रभावित भी किया। लकी कहती है कि आप कोई भी मंजिल हासिल कर सकते है, बस आपके इरादे पूरी तरह से मजबूत होने चाहिए। वही लकी कहती है कि एक या दो बार असफल होने से निराश मत हो। अगर आपकी मेहनत सही दिशा में है तो सफलता अवश्य मिलेगी।

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