Sunday, October 17, 2021

जानिएं आखिर बांह में ही क्यों लगाया जाता है कोरोना का टीका, क्या होता है इसका फायदा

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चंडीगढ़। बहुत से लोगों को इस बात की जानकारी नहीं होगी कि आखिर बांह में ही कोरोना का टीका क्यों लगाया जाता है। इस बात का भ्रम लोगों में बना रहता है। अक्सर लोगों को आपस में इस बात को लेकर चर्चा करते हुए भी देखा जाता है। इसके बावजूद उनमें असमंजस की स्थिति बनी रहती है। लेकिन इस भ्रम की स्थिति को हरियाणा स्वास्थ्य विभाग की प्रवक्ता ने बहुत ही सरल तरीके से समझाने का प्रयास किया है। आप भी जान सकते हैं कि आखिर कोरोना का टीका बांह में ही क्यों लगाया जा जाता है और इसके क्या लाभ होते हैं।

तो आप भी जान लीजिए

स्वास्थ्य विभाग की प्रवक्ता डा. सुषमा चौधरी ने बताया कि दुनिया के करोड़ों लोगों ने कोविड-19 का टीका बांह पर ही लगवाया है। सभी नहीं लेकिन अधिकतर टीके मांसपेशियों में दिए जाते हैं। कुछ  टीके जैसे रोटावायरस टीके मुंह के रस्ते दिए जाते हैं। वहीं अन्य टीके जैसे खसरा, रूबेला के त्वचा के नीचे दिए जाते हैं। हालांकि कई अन्य मांसपेशियों में दिए जाते हैं। कंधे के ऊपर हिस्से में बाहें की मांसपेशियों को डेल्टॉयड कहा जाता है। मांसपेशियों में प्रतिरक्षण कोशिकाएं होती हैं। मांसपेशियां टीका लगाने का बेहतरीन स्थान होती हैं, क्योंकि मांसपेशियों के उत्सुक महत्वपूर्ण प्रतिरक्षण कोशिकाएं धारण किए होते हैं। यह प्रतिरक्षण कोशिकाएं टीके के जरिए प्रतिरोपित वायरस एवं बैक्टीरिया के टुकड़े एंटीजन की पहचान करती है और एंटीबॉडी बनाने के लिए प्रतिरक्षण प्रणाली को सक्रिय करती है।

कोविड-19 के टीके में एंटीजन नहीं डाले जाते

डा. सुषमा चौधरी ने बताया कि कोविड-19 के टीके में एंटीजन नहीं डाले जाते बल्कि टीके के माध्यम से एंटीजन पैदा करने के लिए खाका डाला जाता है। मांसपेशियों में मौजूद प्रतिरक्षण कोशिकाएं इन एंटीजन को पकड़ती है और उन्हें लसीका पर्व को प्रस्तुत करती है। मांसपेशियों के ऊत्तको में टीका लगाने से टीका स्थानीय स्तर पर ही रहता है और वहां की प्रतिरक्षण कोशिकाएं अन्य प्रतिरक्षण कोशिकाओं को काम करने के लिए आग्रह करती है। प्रतिरक्षण कोशिकाओं द्वारा एक बार टीके की पहचान किए जाने के बाद यह कोशिकाएं एंटीजन को लसीका नलिका में ले जाती है। रक्त का संचार बेहतर होता है। टीका लगाने के स्थान पर लसीका पर्व का झुंड होता है।

कई टीके डेल्टॉयड में लगाए जाते हैं

उदाहरण के लिए कई टीके डेल्टॉयड में लगाए जाते हैं, क्योंकि लसीका पर्व ठीक काख के नीचे होते हैं। जब टीका जांघ में लगाया जाता है, तो लसीका नलिका को उरूसंधि में मौजूद लसीका पर्व के झुंड तक पहुंचने के लिए अधिक दूरी तय नहीं करनी पड़ती। मांसपेशियों की गतिविधियों को स्थानीय रखती हैं। मांसपेशियों के ऊत्तक भी टीके की प्रतिक्रिया को स्थानीय रखते हैं। डेल्टॉयड में टीका लगाने से स्थानीय स्तर पर सूजन या दर्द टीके लगने के स्थान पर हो सकता है। अगर ऐसे टीके के मोटे ऊत्तको में लगाए जाते हैं तो असहजता या सूजन बढऩे का खतरा है, क्योंकि मोटे ऊतको में रक्त का संचार ठीक से नहीं होता। इससे टीके के कुछ अवयव ठीक से नहीं सोखे जाएंगे।

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