Thursday, September 23, 2021

देश में सबसे छोटा है हरियाणा, मगर जीते हैं सबसे ज्यादा मैडल, खिलाडिय़ों के लिए स्वर्ग से कम नहीं है अपना प्रदेश

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 चंडीगढ़। हरियाणा देश की आबादी का 2% है लेकिन ओलंपिक में भाग लेने वाले 25% भारतीय खिलाड़ी हरियाणा से है तथा ओलंपिक पदक जीतने वाले हरियाणवी खिलाड़ियों का प्रतिशत 40 से अधिक है। ओलंपिक में कुश्ती दल के सभी पहलवान (पुरुष-महिला) हरियाणा के है। अधिकांश मुक्केबाज़ और महिला हॉकी टीम की 9 खिलाड़ी भी हरियाणा से ही है। बीते दो दशकों से देश और दुनिया के तमाम बड़े स्पोर्ट्स इवेंट्स जैसे कॉमन वेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स, वर्ल्ड चैम्पियनशिप, ओलम्पिक इत्यादि में राज्य के खिलाड़ियों ने जिस तरह से प्रदर्शन किया है, उसके लिए प्रदेश की विभिन्न सरकारों की खेल नीतियों को श्रेय देना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय खेलों में विभिन्न श्रेणी के पदक जीतने पर खिलाड़ियों को राज्य सरकार DSP, इन्स्पेक्टर स्तर की नौकरी, करोड़ों की नगद प्रोत्साहन राशि, फ़्लैट, रियायती क़ीमतों पर प्लॉट, खेल एकेडमी खोलने के लिए ज़मीन इत्यादि प्रदान करती है।

हरियाणा में खेलों की अपनी संस्कृति है

हरियाणा में (SAI) स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के तहत बने कुल 22 सेंटर्स हैं। इसके अलावा राज्य सरकार की ओर से भी तमाम इलाकों में विश्वस्तरीय स्टेडियम और स्पोर्ट्स यूनिट्स को बनाने पर काम हो रहा है। हरियाणा में अपनी खेल यूनिवर्सिटी है। हरियाणा में खेलों की अपनी संस्कृति है। यहाँ के हट्टे-खट्टे, लंबे-तगड़े, हष्ट-पुष्ट युवा ज़ोर-आज़माइश वाले खेलों जैसे कबड्डी, कुश्ती, मुक्केबाज़ी, भाला भेंक, हॉकी इत्यादि में अधिक रुचि लेते है। हरियाणा के अधिकांश खिलाड़ी किसानी क़ौमों और साधारण किसान परिवारों से ताल्लुक़ रखते है तथा उनकी सामाजिक आर्थिक पृष्ठभूमि लगभग एक समान है।

हरियाणा का खेल बजट यूपी-बिहार से अधिक 

हरियाणा में एक लंबे वक्त से खिलाड़ियों को जितनी सुविधाएं दी जा रही हैं उतनी किसी अन्य राज्य में उपलब्ध नहीं हैं। बड़ी स्पर्धाओं में चयनित होने वाले ऐसे हर खिलाड़ी को सिर्फ उसकी तैयारियों के लिए 5 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी जाती है। उन्हें अच्छी कोचिंग के लिए विदेश भेजा जाता है। खिलाड़ियों के लिए न्यूट्रिशन और खान-पान के लिए प्रतिदिन 250 दिए जाते है। हरियाणा का खेल बजट यूपी-बिहार जैसे राज्यों से अधिक है।

हॉकी खिलाड़ी को बनाया खेल मंत्री

हरियाणा की खेल नीति ही नहीं बल्कि सरकार का अपने खिलाडिय़ों के प्रति समर्पण भाव इस बात से जगजाहिर होता है कि राज्य के खेल मंत्रालय की कमान भी भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान संदीप सिंह को सौंपी गई है। हरियाणा के मौजूदा खेल मंत्री संदीप सिंह स्वयं हॉकी के इतने बड़े प्लेयर रहे हैं कि उनके ऊपर भी सूरमा नाम की फिल्म बनाई जा चुकी है। इस फिल्म में संदीप सिंह के जीवन संघर्ष को बाखूबी दिखाया गया है और उनकी मेहनत को साकार किया गया है। हरियाणा सरकार ने संदीप सिंह को ही राज्य के खेल मंत्रालय की बागडौर सौंपी है। इससे साबित होता है कि प्रदेश सरकार अपने राज्य के खेलों को लेकर कितनी गंभीर है।

जान की बाजी लगाकर जीते हैं मैडल

हरियाणा के तमाम खिलाडिय़ों ने अपनी मेहनत और सरकारी प्रोत्साहन के दम पर हर खेल में बेहतर प्रदर्शन किया है। यही वजह है कि बलाली की बबीता और गीता फौगाट पर बनी फिल्म दंगल ना केवल बॉक्स आफिस पर हिट रही है, बल्कि इस फिल्म ने फौगाट परिवार के खेलों के प्रति समर्पण भाव को बेहतरीन तरीके से प्रदर्शित किया है। दंगल फिल्म के अलावा हरियाणा के खिलाडिय़ों ने अपनी खेल भावना के दम पर मैडल पर मैडल जीते हैं। आज प्रदेश में कई बड़े खिलाड़ी शानदार तरीके से सरकारी नौकरियों में शामिल किए गए हैं। हरियाणा के पानीपत जिले के रहने वाले नीरज चोपड़ा ने गोल्ड मैडल जीतकर हरियाणा की खेल नीति को दुनिया भर में पहचान दी है। इसी प्रकार से बजरंग पूनिया, रवि दहिया, बिनेश फौगाट, महिला और पुरूष हॉकी टीम में शामिल प्रदेश के खिलाडिय़ों को जब भी मौका मिला है, उन्होंने अपनी जान की बाजी लगाकर मैडल जीते हैं। हरियाणा के सभी खिलाडिय़ों ने अपने शानदार और गजब प्रतिभा के दम पर प्रदेश का नाम दुनिया भर में रोशन किया है।

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