Wednesday, September 22, 2021

गरीबी में सीखी पहलवानी, अब टोक्यों में जीतकर इतिहास रचने को तैयार है हरियाणा का ये पहलवान

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चंडीगढ़। टोक्यो ओलंपिक में अब हरियाणा के पहलवान पूरी दुनिया में देश का नाम रोशन कर रहे हैं। पहलवान रवि दहिया के बाद बुधवार को हरियाणा के बहादुरगढ़ जिले के रहने वाले पहलवान दीपक पूनिया ने भी पदक की उम्मीद जगाई है। गांव छारा के रहने वाले पहलवान दीपक पूनिया ने नाईजीरिया के रेसलर को 12-1 से करारी मात देकर सेमीफाईनल में एंट्री पा ली है। रवि दहिया और दीपक पूनिया की इस शानदार जीत पर हरियाणा पहलवानी संघ के अध्यक्ष दीपेंद्र हुडडा ने खुशी जाहिर करते हुए दोनों पहलवानों को बधाई दी है।

आर्थिक रूप से कमजोर था दीपक का परिवार

बता दें कि दीपक और रवि दहिया ने विपरित हालातों को पार करते हुए यह मुकाम हासिल किया है। दोनों के परिवार ही आर्थिक रूप से कमजोर थे, इसके बावजूद उन्होंने अपने बेटों को पहलवानी के इस मुकाम पर पहुंचाया, जहां आप वह पूरी दुनिया में ना केवल अपने प्रदेश बल्कि देश का नाम भी रोशन कर रहे हैं। दीपक पूनिया के पिता भी पहलवानी करते थे। पंरतु कमजोर आर्थिक स्थिति के चलते उन्हें अपनी पहलवानी छोडऩी पड़ी थी। दो बहनों के भाई दीपक की जब बात आई तो उनके पिता सतीश ने अपने बेटे को बड़ा पहलवान बनाने की ठान ली।

दूध सप्लाई कर चला रहे थे परिवार

पिता सतीश दूध बेचकर अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे थे। शुरूआत में दीपक अपने गांव में ही मिटटी के अखाड़े में दंगल जीतकर पांच सौ से लेकर पांच हजार रुपए तक का ईनाम जीतता रहा है। इस रकम से परिवार को काफी मदद मिलती थी। 15 साल की उम्र होते ही दीपक के पिता सुभाष उसे वीरेंद्र कोच के पास लेकर गए, जहां उसने मिटटी के दंगल की बजाए मेट पर कुश्ती करना शुरू कर दिया। दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में दीपक ने सुशील कुमार व बजरंग पहलवान के साए में कुश्ती के दांव पेंच सीखने शुरू कर दिए। देखते ही देखते मेट पर दीपक शानदार तरीके से कुश्ती खेलने लगा और अपने परिवार के लिए उम्मीद की किरण भी बन गया।

गाय का दूध पीने का है शौक

दीपक को बचपन से ही गाय का दूध पीने का शौक था, इसलिए उनके पिता ने घर में गाय पाल रखी थी। दीपक को हर रोज बहादुरगढ़ से दिल्ली गाय का दूध लेकर उसके पिता जाते थे। पहलवानी में बेहतरीन प्रदर्शन करने के चलते ही दीपक को सेना में भर्ती कर लिया गया। दीपक ने जूनियर विश्व चैंपियनशिप जीतकर जब अच्छा खासा पैसा कमाना शुरू कर दिया तो सबसे पहले उसने अपने पिता का दूध बेचने का काम बंद करवा दिया। आर्थिक स्थिति बेहतर होते ही दीपक ने अपने पिता का खेतों में काम करवाना भी बंद करवा दिया। जिसके बाद उनका केवल एक ही काम था कि वह गांव से हर रोज अपने बेटे को दूध, दही और मक्खन पहुंचाते थे।

दीपक की सफलता में सुशील कुमार का हाथ

पहलवानी करके दरअसल दीपक एक अच्छी सी नौकरी पाने का सपना देखते थे, ताकि वह अपने परिवार की गरीबी को दूर कर सकें। साल 2016 में दीपक को भारतीय सेना में नौकरी मिल गई, तभी पहलवान सुशील कुमार ने उसे छोटी चीजों को छोडक़र बड़े लक्ष्य की ओर ध्यान देने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद दीपक ने सुशील कुमार की सलाह मानी और फिर कभी पीछे मुडक़र नहीं देखा। दीपक का कैरियर बनाने में पहलवान सुशील का भी विशेष योगदान रहा है। अब दीपक पूनिया ने टोक्यो ओलंपिक में बढिय़ा प्रदर्शन के जरिए ना केवल अपने परिवार बल्कि प्रदेश और देश का नाम भी रोशन कर दिया है।

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