Thursday, September 23, 2021

अरावली वन क्षेत्र में सुप्रीम कोर्ट के कहर से बच सकते हैं कई फार्म हाऊस और संस्थान, प्रशासन ने की तैयारी

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Faridabad News (citymail news) अरावली में बसे अवैध निर्माण को गिराने के लिए वन विभाग और नगर निगम ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है। वन विभाग की ओर से अवैध निर्माण को लेकर बुधवार को ड्रोन सर्वे भी कराया गया। जिसमें देखा गया कि वन विभाग की कितनी जमीन पर अवैध निर्माण हुआ है। वहीं नगर निगम ने ऐसे संस्थानों की फाइल बनाकर सरकार को भेजी है जिन्होंने सीएलयू के आवेदन किया हुआ है। ऐसे में सरकार छह अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखेगी कि इन संस्थानों को कई विभागों से एनओसी दे दी गई। इनको किस कैटेगिरी में रखा जाएगा। फिर कोर्ट अपना अंतिम फैसला सुनाएगा। ऐसे फार्म हाउस और शिक्षण संस्थानों को लेकर वन विभाग और नगर निगम भी उलझन में है।
जंगल की जमीन पर अवैध निर्माण बर्दाश्त नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार वन विभाग की जमीन से अवैध कब्जा हटाने के लिए चार सप्ताह का समय दिया था। ऐसे में शिक्षण संस्थान सहित कई फार्म हाउस संचालकों ने भी कोर्ट में अपना पक्ष रखा कि उन्होंने स्टे लिया हुआ है। लेकिन कोर्ट ने दो टूक जवाब देते हुए कहा कि जंगल की जमीन पर किसी भी तरह का अवैध निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इनको हटाया जाएगा।
वन क्षेत्र में कई शिक्षण संस्थान भी मौजूद
अरावली वन क्षेत्र में इस समय फार्म हाउस, बैक्वट हाल के साथ साथ कई शिक्षण संस्थान भी मौजूद है। जो पिछले कई सालों से चल रहे है। इन संस्थानों को नगर निगम की ओर सीएलयू भी दिया गया है। वहीं कई बैक्वट हाल भी ऐसे है। जिन्होंने नगर निगम से सीएलयू लिया हुआ है। यह नगर निगम के संसाधनों का प्रयोग भी कर रहे है। लेकिन इन संस्थानों ने वन विभाग से एनओसी नहीं ली हुई थी। वन क्षेत्र में केवल दो संस्थान ऐसे है जिन्होंने वन विभाग से एनओसी ली हुई है। इसलिए उनको सुरक्षित माना जा सकता है।
रिपोर्ट तैयार करने में जुटे अधिकारी
सुप्रीम कोर्ट का आदेश के बाद प्लानिंग ब्रांच के अधिकारी रिपोर्ट तैयार करने में जुटे रहे। नगर निगम सूत्रों के अनुसार ऐसे संस्थानों की भी लिस्ट तैयार की जा रही है। जिन्होंने निगम से सीएलयू लिया हुआ है या फिर सीएलयू के लिए आवेदन कर दिया है। इसकी रिपोर्ट बनाकर सरकार के पास भेज दी जाएगी। छह अगस्त के पास पूरी तस्वीर साफ हो जाएगी। निगम सूत्रों का कहना है कि  सबसे पहले गाज अवैध निर्माण पर ही गिरेगी। वहीं दूसरी ओर नगर निगम के कमिश्नर यशपाल यादव का कहना है कि छह अगस्त को मामले की सुनवाई है। इसके बाद तस्वीर पूरी साफ हो जाएगी। जिन्होंने सीएलयू के लिए आवेदन किया हुआ है कि उनकी रिपोर्ट सरकार को भेज दी जाएगी।
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