Thursday, September 23, 2021

हरियाणा को जल्द मिलेगी अंग्रेजों की 127 साल की गुलामी से आजादी, राज्य में बदल जाएंगे जेल और जेलर शब्द

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चंडीगढ़। अंग्रेजों के शासनकाल के दौरान जेल और जेलर शब्द का ईजाद हुआ था। यह 127 साल पुरानी विरासत है। इन दोनों शब्दों का अर्थ शायद ही आज किसी को बताने की जरूरत है। किसी भी जुर्म के बाद जेल में सजा भुगतनी पड़ती है और वहां के जेलर का कठोर और सख्त मिजाज चेहरा आंखों के सामने घूमने लगता है। अंग्रेजों के शासनकाल की यह दोनों विरासत अब हरियाणा से भी रूखसत होने वाली हैं। यानि कि अंग्रेजों की 127 साल पुरानी गुलामी की याद दिलाने वाली विरासत को हरियाणा अपने प्रदेश से मिटाने का निर्णय ले चुका है। इससे पहले कोलकत्ता भी अंग्रेजों के शासनकाल की इस पहचान को अपनी किताबों से मिटा चुका है। वहां भी जेल और जेलर दोनों शब्दों को हटाकर उनका नया नामकरण कर चुका है।

नया नाम देने की शुरूआत

कोलकत्ता की तरह से ही हरियाणा सरकार ने भी अपने प्रदेश के इन दोनों कठोर नामों को हमेशा के लिए मिटाने का संकल्प ले लिया है। सरकार का मानना है कि सजा के बाद जेल जाना एक अदालती फैसले का प्रारूण होता है, मगर उनका यह मानना है कि जेल सजा काटने की जगह नहीं, बल्कि किसी भी सजायाफ्ता को अपनी गलती का अहसास करवाने की जगह होती है, जहां जाकर व्यक्ति खुद को सुधार सके और फिर से समाज की मुख्यधारा से जुड़ जाए। इसलिए वह इन दोनों शब्दों की जगह नया नाम देने की कवायद कर रहे हैं। इसके लिए कोई सुधारात्मक नामों का चयन किया जाएगा।

तीन सदस्यों की कमेटी बदलेगी नाम

हरियाणा के जेल मंत्री रणजीत सिंह ने बताया कि इन दोनों ही नामों को बदलने की शुरूआत कर दी गई है। गृह सचिव की अध्यक्षता में तीन सदस्यों की एक कमेटी गठित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। वहीं जेल विभाग की ओर से प्रस्ताव भेज दिया गया है। यह कमेटी तय करेगी कि कैसे अंग्रेजों की गुलामी वाले नामों से प्रदेश को आजादी दिलवाई जाए। काबिलेगौर है कि हरियाणा सरकार ने जेल और जेलर शब्दों में जो बदलाव करने का फैसला किया है, उसके बाद राज्य के 1894 प्रिजन एक्ट में संशोधन हो जाएगा। इससे पहले पश्चिम बंगाल में यह प्रयोग सफलता पूर्वक किया जा चुका है। वह जेल विभाग का नया नाम करेक्शन होम कर दिया गया है।

हरियाणा भी रखना चाहता है अच्छा नाम

हरियाणा सरकार भी इसी तर्ज पर कोई अच्छा सा नाम रखना चाहती है। जेल मंत्री ने बताया कि उनका उददेश्य जेल में आने वाले कैदी को यह बताना है कि वह सजा काटने के लिए जेल नहीं आया है, बल्कि भविष्य में उसे अपने जीवन में सुधार लाकर समाज की मुख्यधारा में दोबारा से शामिल होने के लिए खुद में सुधार लाने का प्रयास करना है। इसलिए वह जेल की बजाए सुधारगृह में अपने जीवन स्तर को बदलने के लिए भेजा गया है।

सीएम ने भी दे दी है सहमति

जेल मंत्री रणजीत सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल भी उनके इस निर्णय से बेहद प्रसन्न हैं। वह साकारात्मक बातों का तत्काल समर्थन करते हैं। उन्होंने भी इस प्रस्ताव को लागू करने पर अपनी सहमति प्रदान कर दी है। उनके मार्गदर्शन के बाद जल्द ही हरियाणा को जेल और जेलर शब्द से छुटकारा मिल जाएगा। मंत्री ने बताया कि सीएम की सहमति के बाद तीन सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया गया है। सँभावना है कि जल्द ही हरियाणा में अंग्रेजों की गुलामी वाले दोनों प्रतीकात्मक नामों को बदल दिया जाएगा। जेल मंत्री रणजीत सिंह खुद भी जल्द से जल्द इन नामों को बदलवाने के पक्ष में हैं। इसलिए वह व्यक्तिगत स्तर पर भी इस पूरी प्रक्रिया पर नजर रखे हुए हैं।

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