Thursday, September 23, 2021

मां के हाथ की पूडी सब्जी खाकर पहलवानी में मैडल लाएगी हरियाणा की ये बेटी, दादी को भी है अपनी पोती से उम्मीद

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नई दिल्ली। जिस तरह से बड़ा अधिकारी बनने के लिए काफी सालों से मन लगाकर पढ़ाई करनी पड़ती है। उसी तरह से खेल में भी आपको कड़ी तपस्या करनी पड़ती है। तभी जाकर मुकाम हासिल होता है। कुछ ऐसा ही पहलवान सोनम मलिक ने किया है। सोनम टोक्यो ओलंपिक में भाग लेने गई हुई है। सभी से उनको मेडल की आस है। 19 साल की महिला पहलवान सोनम मलिक चार साल से अपने रिश्तेदारों के पास नहीं जा सकती है। उसका ध्यान केवल अपने खेल पर रहता है।

रोहतक के अजायब में सोनम का ननिहाल

सोनम की ननिहाल रोहतक के अजायब में है। वह सोनीपत के मदीना की रहने वाली है। 80 साल की चांदी देवी को इंतजार है कि उनकी पोती मेडल जीतकर आएगी। फिर अपने ननिहाल जरूर आएगी। उनके माता पिता ने भी बेरी मंदिर में मन्नत मांग रखी है। बाहर का भोजन कम पसंद किया जाता है। इसलिए सोनम टोक्यो जाते समय अपने साथ मां के हाथ की पूड़ी भी ले गए थी।

पिता को बेटी से आस बनेगी बड़ी पहलवान

सोनम के पिता कहते है कि वह बड़े पहलवान नहीं बन सके। लेकिन उनकी बेेटी ने ओलंपिक में पहुंचकर उम्मीदों को बढ़ा दिया है। सोनम के पिता राजेंद्र दसवीं पास है। उनके पास दो किले खेत है। बेटी को आलू के पराठे, दही, मक्खन बेहद पसंद है। इसलिए परिवार ने घर में भैस पाल रखी है। पहलवान बनने के पीछे राजेंद्र बताते है कि वह भी शुरुआत में पहलवानी करते थे।

अब बेटी के हाथ में देखना चाहते है ओलंपिक मेडल

पिता कहते है कि उनके मन में हमेशा यही मायूसी रहती है कि वह सफल क्यो नहीं हो सके। अक्सर मन में उनके यही बात रहती। असफलता के डर से बेटी और बेटे को खेलों से दूर रखा। जब उनके दोस्त अजमेर सेना से रिटायर होकर लौटे तो उन्होंने गांव में ही कुश्ती अकादमी खोली। उनके दोस्त अजमेर ने कहा कि मेरे पास बेटी को लाओ। उस समय वह छठी क्लास में पढ़ती थी। अब तक सोनम नेशनल और इंटरनेशनल मेडल जीत चुकी है।

चोट लगने के बावजूद नहीं मानी हार फिर जीती

पिता राजेंद्र मलिक ने दैनिक जागरण के कार्यक्रम में एक किस्सा बताते हुए कहा कि ओलंपिक में क्वालीफाई मुकाबले में कजाकिस्तान की पहलवान से मुकाबला था। घुटने में असहनीय दर्द हो रहा था। कोच ने कहा कि अगली बार देख लेंगे। इस बार मुकाबले से बाहर हो जाओ। चोट अधिक बढ़ सकती है। चोट के बावजूद वह फिर से मैदान पर लौटी और 9-6 से मुकाबला जीत लिया। इसी तरह से साल 2012-1& में कंधा चोटिल हो गया। कुछ चिकित्सकों ने कहा दिया कि अब हाथ कभी ठीक नहीं हो सकता। कुछ ने पहलवानी छोडऩे की भी सलाह दे डाली। साल 2015 में गुजरात के गांधी नगर में आयोजित प्रतियोगिता में सोनम ने सिल्वर मेडल हासिल किया।

साक्षी मलिक को कुश्ती में आदर्श मानती है सोनम

रियो ओलंपिक में पदक जीतने वाली साक्षी को सोनम अपना आदर्श मानती है। हालांकि उनको वह चार बार हरा चुकी है। लखनऊ ट्रायल में भी सोनम ने साक्षी को हराया था। उत्तर प्रदेश आगरा में हुए मुकाबले में भी साक्षी को सोनम ने हराया। सोनम बड़ी बहन की तरह साक्षी का सम्मान करती है।

बाहर के खाने पर पूरी तरह से रोक

सोनम बाहर का खाना बिल्कुल नहीं खाती है। इसलिए सोनत किसी भी प्रतियोगिता में जाते समय अपने घर का खाना बनाकर ले जाती है। वह कहते है बाहर का खाना कम खाना पड़े। इसलिए पिता उनके साथ ही रहते है। वह रोटी और सब्जी तैयार करते है। बेटी केे साथ रहने के कारण पिता शुगर मिल गोहाना में स्टोर ब्वाय की नौकरी पर कम ध्यान दे पा रहे है। पिता एक साए की तरह अपनी बेटी के साथ रहते है। पिता राजेंद्र कहते है कि उनकी बेटी ओलंपिक में मेडल जीतकर आती है तो वह जर स्थित माता के मंदिर में जाकर दर्शन करेंगे। एक लाख रुपए भी उनको दान करेंगे। गांव के मंदिर में भी पूजा करेंगे।

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