Sunday, October 17, 2021

पिता की नाराजगी के बाद भी पूजा ने बॉक्सिंग को बनाया अपना कैरियर, आज तय किया हरियाणा से टोक्यो का सफर

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नई दिल्ली। कई बार हमारे साथ इतना बुरा हो जाता है कि हम उसी को अंत समझ लेते है, लेकिन वह अंत नहीं होता है। वह शुरुआत भी हो सकती है। जैसा ही बाक्सर पूजा रानी के साथ हुआ। एक समय उनका कॅरियर खत्म होने की कगार पर पहुंच गया थ। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। फिर से खड़ी हुई। अब वह टोक्यो ओलंपिक में पदक के बिल्कुल करीब है।

भिवानी जिले से टोक्यो तक पहुंचने का सफर

पूजा का हरियाणा के भिवानी जिले से टोक्यो तक पहुंचने का सफर आसान नहीं कहा जा सकता। इसके लिए उन्होंने कड़ा संघर्ष और अथक मेहनत की है। परिवार की मर्जी के बिना किसी भी बेटी का खेल की दुनिया को अपना भविष्य बनाना आसान नहीं कहा जा सकता। पंरतु पूजा रानी ने अपने हौंसले और बुलंद इरादों के दम पर ना केवल खुद को साबित किया, बल्कि टोक्यो ओलंपिक की टीम में अपने लिए स्थान भी बनाया। हैरत की बात है कि जो पिता कभी बेटी को बॉक्सिंग खेलते हुए देखकर आग बबूला होते थे, उसी पिता को आज अपनी लाडली पर नाज है।

पहले मुकाबले में हासिल की धमाकेदार जीत

दो बार की एशियाई चैंपियन के लिए टोक्यो तक का सफर बिल्कुल भी आसान नहीं कहा जा सकता है। एशियाई चैंपियन भारतीय मुक्केबाज पूजा रानी ने 75 किलोग्राम ने ओलंपिक में अपनी पहली बाउट में धमाकेदार जीत दर्ज की। उन्होंने अल्जीरिया की इचरक चाएब को 5-0 से रौंदकर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई। अब वह केवल एक पंच दूर है। एक जीत ही उनको पदक के पास पहुंचा देगी।

कंधे की चोट के कारण खतरे में गया था कॅरियर

पूजा के कंधे पर एक समय खतरनाक चोट लग गए थे। ऐसे में कहा जा रहा था कि उनका कॅरियर भी पूरी तरह से खत्म हो सकता है। इसके बाद रही कसर उनके हाथ ने पूरी कर दी। उनका हाथ भी जल गया था। आर्थिक सहयोग की कमी के बावजूद वह अपनी मंजिल की ओर बढ़ती रही। पूजा को विश्वास था कि उनको एक दिन कामयाबी अवश्य मिलेगी। कई बार उनकी आलोचना भी हुई। उन्होंने सभी आलोचनाओं का जोरदार जवाब दिया।

पिता ने बोला मार लग जाएगी

पूजा के पिता एक पुलिस अधिकारी थे। उनको पूजा का बाक्सर बनना बिल्कुल भी पसंद नहीं था। वह सोचते थे कि बाक्सिंग के लिए गुस्सैल होना पड़ता है। वह इसको एग्रेसिव लोगों का ही खेल मानते थे। पूजा ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनके पिता ने कहा था कि मार लग जाएगी। यह बात उनके पिता ने कई बार बोली। हालांकि अब उनके पिता क सारी शिकायते दूर हो गई होंगी।

अनुभव से हासिल की जीत

30 साल की पूजा ने अपने अनुभव से मुकाबले में जीत हासिल की। उन्होंने प्रतियोगिता में अपने से 10 साल छोटी बाक्सर पर पूरा दबदबा बनाए हुए रखा। तीन राउंड में पूजा का पूरी तरह से दबदबा रहा। चाएब अपना पहला ओलंपिक खेल रही थी। ऐसे में वह पूजा से कम अनुभवी थी। पूजा कई इंटरनेशनल प्रतियोगिताएं खेल चुकी है। चाएब मुक्के लगाकर अंक बटोरने का प्रयास कर रही थी, लेकिन वह पूरी तरह से कामयाब नहीं हो पाई।

पूर्व विश्व चैंपियन से होगा मुकाबला

रानी का मुकाबला अब विश्व चैंपियन और दो बार की एशियाई चैंपियन चीनी बाक्सर लि कियान से होगा। इस बाक्सर का पूजा के खिलाफ रिकार्ड शानदार है। लेकिन पूजा का कहना है कि पिछले मुकाबले कोई मायने नहीं रखते है। पदक वहीं जीतता है जो वर्तमान के मुकाबले में बेहतर खेलता है।

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