Thursday, September 23, 2021

घर चलाने के लिए करती रही मजदूरी, खाने के लिए नहीं होते थे पैसे, अब मैडल जीतकर किया देश का नाम रोशन

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नई दिल्ली। सिक्किम की मीराबाई चानू ने पावरलिफ्टिंग में सिल्वर मेडल जीतकर भारत का खाता खोल दिया। यह भारत का ओलंपिक में पहला पदक था। आज पूरी दुनिया चानू के नाम से परिचित हो गई। इससे पहले शायद ही कोई इनको जानता होगा। मीराबाई ने वेटिलिफ्टिंग की 49 किलोग्राम वर्ग में सिल्वर मेडल हासिल किया। ओलंपिक में भारत का खाता खोलने वाली चानू के पास कभी डाइट के लिए भी पैसे नहीं होते थे। परिवार आर्थिक परेशानियों से गुजर रहा था।

पावरलिफ्टिंग तो चुनी लेकिन कई बार हुई परेशानी

चानू ने पावरलिफ्टिंग खेल को तो अपने भविष्य के लिए चुन लिया था। लेकिन अब उनके सामने आर्थिक परेशानी थी। उनको डाइट के लिए रोजाना 500 से एक हजार रुपए के बीच चाहिए होता था। क्योंकि उनको डाइट में चिकन और दूध चाहिए होता था। ऐसे में डाइट न मिलने के कारण उनका खेल भी प्रभावित हो सकता था। लेकिन चानू ने हार नहीं मानी। वह धीरे धीरे पावरलिफ्टिंग का अभ्यास करती रही।

आम परिवार के लिए नहीं थी पावरलिफ्टिंग

चानू मेहनत करके अपनी डाइट के लिए पैसे इक्कठे करती थी। उसके सामने केवल एक ही टारगेट था कि ओलंपिक में मेडल जीतना है। इसके लिए वह रोजाना तीन से चार घंटे अभ्यास करती थी। चानू को भरोसा था कि उसकी मेहनत एक दिन रंग अवश्य लाएगी। चानू को उनकी मेहनत का परिणाम ओलंपिक में मेडल जीतकर मिल गया।

गांव में नहीं था ट्रेनिंग सेंटर, करना पड़ता था लंबा सफर

चानू के गांव में कोई भी ट्रेनिंग सेंटर नहीं था। ऐसे में उनको लंबा सफर करना पड़ता था। वह करीबन 50 से 60 किलोमीटर दूर अभ्यास के लिए जाती थी। मीराबाई ने अपने मुश्किल सफर के सामने किसी भी परेशानी को आड़े नहीं आने दिया। मीराबाई चानू ने अपना घर चलाने के लिए लकडिय़ों का बंडल उठाने का भी काम किया। साल 2015 में 31 अगस्त को चानू ने इंडियन रेलवे को ज्वाइन कर लिया। उनको बेहतरीन खेल के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया।

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