Thursday, September 23, 2021

हरियाणवी टीचर के बेटे को गूगल ने दी शानदार नौकरी, मिलेगा 1.8 करोड़ का सैलरी पैकेज

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नई दिल्ली। चाहे कोई भी क्षेत्र हो हरियाणा के नौजवान हर जगह झंडे गाड़ रहे हैं। पूरी दुनिया में हरियाणा के लडक़े और लड़कियां अपने प्रदेश और परिवार का नाम रोशन कर रहे हैं। खेल जगत से लेकर फिल्मी दुनिया और विदेशी नौकरी हर जगह हरियाणा के युवा छाए हुए हैं। हाल ही में हरियाणा के कई खिलाडिय़ों ने विदेशों में होने वाली प्रतियोगिताओं में गोल्ड मैडल जीतकर अपने प्रदेश का परचम लहराया है। यही नहीं बल्कि अब तो दुनिया के कोने कोने में हरियाणा के लोगों का अपना अलग ही जलवा है। इसी कड़ी में हरियाणा के नाम एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है। प्रदेश के एक नौजवान ने अपनी प्रतिभा के दम पर गूगल में हरियाणा का नाम चमकाया है। इस युवक को करोड़ों रुपए के मेहनताने पर गूगल में बढिय़ा नौकरी मिली है। इससे एक बार फिर साबित हो गया है कि दूध दही का खाना खाने वाला हरियाणा अब दुनिया में अपने नाम का डंका बजा रहा है।

चरखी दादरी का रहने वाला है जितेंद्र फौगाट

इस युवक का नाम है जितेंद्र फौगाट, जोकि हरियाणा के चरखी दादरी का रहने वाला है। जितेंद्र को अपने अथक प्रयासों के बाद यह सफलता मिली है। तमाम प्रयासों व कठिन टेस्ट से गुजरने के बाद जितेंद्र को दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी गूगल में साफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर नियुक्ति मिली है। जितेंद्र की इस सफलता पर उन्हें व उनके परिवार वालों को लगातार बधाई मिल रही है। जिसे भी जितेंद्र की इस उपलब्धि को पता चला है, वही उसे शुभकामनाएं भेज रहा है। इस नौकरी की एवज में जितेंद्र को 1.8 करोड़ रुपए का पैकेज मिला है। खबर है कि जितेंद्र ने गूगल में अपनी पोस्ट को ज्वाइंन कर लिया है। बता दें कि हरियाणा में प्राथमिक शिक्षा हासिल करने के बाद जितेंद्र ने अमेरिका का रूख कर लिया था और वहीं से अपनी उच्च शिक्षा ग्रहण की है।

गूगल में नौकरी पाने के लिए की मेहनत

मीडिया रिपोर्टस के अनुसार जितेंद्र ने गूगल की नौकरी के लिए लगातार सात महीने तक तैयारी की थी। पहली बार जब उन्होंने गूगल में साफ्टवेयर इंजीनियर के लिए टेस्ट दिया तो पहली ही बार में उनका चयन कर लिया गया। जितेंद्र ने अपनी शुरूआती पढ़ाई चरखी दादरी के केएन सीनियर सेकेंडरी स्कूल से ग्रहण की थी। इसके बाद उन्होंने लिगायत यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रोनिक्स एंड कम्युनिकेशन में बीटेक की डिग्री हासिल की। कुछ समय तक इंफोसिस के चंडीगढ़ आफिस में नौकरी करने के बाद जितेंद्र ने विदेश जाने का मन बनाया। उन्होंने अपने परिवार वालों से बात कर अमेरिका में आगे की पढ़ाई करने की अनुमति मांगी।

जितेंद्र के पिता थे अंग्रेजी टीचर

परिवार वालों की सहमति के बाद जितेंद्र ने अमेरिका स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास में एडमिशन ले लिया। जितेंद्र का हमेशा से सपना था कि वह अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद गूगल में नौकरी करें। जिसके लिए वह लगातार सात से आठ घंटे तक पढ़ाई कर अपनी तैयारी करते रहे। जितेंद्र के पिताजी रणबीर सिंह फौगाट एक अध्यापक थे और बच्चों को अंग्रेजी सब्जेक्ट पढ़ाते थे। जबकि उनकी मां घर पर रहकर ही एक सफल गृहिणी की तरह से अपने परिवार के पालन पोषण में जुटी रहती हैं। वहीं जितेंद्र की बहन रोहतक मेडीकल कॉलेज से गाईनोलॉजिस्ट में एमडी की पढ़ाई कर रही हैं।

सच हुआ जितेंद्र का सपना

जितेंद्र फौगाट का कहना है कि उनका शुरू से ही यही सपना था कि वह गूगल में नौकरी कर अपने परिवार और प्रदेश का नाम बुलंद करें। इसके लिए उन्होंने रात दिन तैयारी की और पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। वह लगातार गूगल को सर्च कर वहां निकलने वाली किसी भी वैकेंसी पर पूरी नजर रखते थे। जैसे ही साफ्टवेयर इंजीनियर की पोस्ट निकली तो उन्होंने तत्काल आवेदन कर दिया। वह इस नौकरी को लेकर पहले से ही अपनी तैयारी कर चुके थे। इसका परिणाम यह रहा कि उन्हें पहली ही बार में सिलेक्ट कर लिया गया और आज वह अपने हसीन सपने को पूरा कर गूगल में नौकरी ज्वाइंन कर चुके हैें। जितेंद्र ने अपनी इस कामयाबी के लिए अपने परिवार और गुरूओं को श्रेय दिया है, जिनके मार्गदर्शन से वह अपने सपने को सफल कर पाए हैं।

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