Thursday, September 23, 2021

हरियाणा की एक और बेटी ने विदेश में लहराया तिरंगा, प्रिया के बाद कोमल ने भी कुश्ती में जीता गोल्ड मैडल

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नई दिल्ली।ओलंपिक के बाद अब देशवासियों को विश्व कैडेट कुश्ती चैंपियनशिप से लगातार खुशखबरी सुनने को मिल रही है। पहले हरियाणा की प्रिया मलिक ने गोल्ड जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। अब हरियाणा की ही महिला पहलवान कोमल ने 46 किलोग्राम भार वर्ग में पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया है। किसान की बेटी ने हंगरी में आयोजित हो रही विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में गोल्ड जीतकर बता दिया कि भारत की बेटिया भी बेटों से कम नहीं है। बेटी की जीत पर मां ने कहा कि यह तो अभी मेरी शुरुआत है।

कोमल ने अजरबैजान की पहलवान को दी पटखनी

कोमल का नाम ही कोमल है, लेकिन उसके दांव पेच ऐसे है जो बड़े से बड़े पहलवान को चित कर दे। विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में कोमल ने अजरबैजान की पहलवान को 7-2 से हराकर गोल्ड अपने नाम किया। हरियाणा के पानीपत जिले के पट्टीकल्याणा गांव की रहने वाली कोमल को बचपन से ही कुश्ती को शौक था। वह पहले शौकिया तौर पर कुश्ती करती थी। धीरे धीरे उसका यह शौक जुनून में बदल गया। बेटी की कामयाबी पर पूरे गांव में खुशी का माहौल है।

चार दूसरे देशों में भी जीत चुकी है मेडल

कोमल ने हंगरी में पहली बार मेडल नहीं जीता है। इससे पहले वह चार अन्य देशों में भी मेडल जीत चुकी है। जिसमें चीन, जापान, कजाकिस्तान और बुल्गारिया शामिल है। उन्होंने कहा कि बेटी ने अपनी मेहनत से मुकाम हासिल किया है। वह बताती है कि उनकी बेटी घर के काम में भी पूरा हाथ बटाती है। उनको अपनी बेटी पर गर्व है।

पिता किसान और मां करती है मिड डे मील का काम

मां कुसुम ने कहा कि कोमल के पिता खेती बाड़ी का काम करते है। वहीं मैं सरकारी स्कूल में मिड डे मील बनाने का काम करती है। एक समय वह था जब हम बेटी से घर का काम करवाना चाहते थे। लेकिन बेटी आज देश के लिए गोल्ड मेडल लेकर आई है। अभी तो यह बेटी की सिर्फ शुरुआत है। उम्मीद है कि वह आगे गोल्ड मेडल लेकर आएगी। वहीं उन्होंंने कहा कि हरियाणा में बेटी और बेटे के भेद को लेकर बदनाम किया जाता है। यहां पर कोई भेद नहीं किया जाता है। तभी बेटियों में खेलों में इतना आगे रहती है।

गांव के सरकारी स्कूल से की 12वी की पढ़ाई

कोमल ने गांव के ही सरकारी स्कूल से बारहवीं की पढ़ाई की है। वह पांच भाई बहन है। कोमल तीसरे नंबर पर है। मां बताती है कि अब हरियाणा के लोगों की सोच पूुरी तरह से बदल गई है। पहले हरियाणा में लड़कियों को घर से बाहर नहीं निकलने नहीं दिया जाता था, लेकिन अब लड़कियां विदेश में जाकर भारत का नाम ऊंंचा कर रही है।

14 साल की उम्र से जीत रही है कई इंटरनेशनल प्रतियोगिता

गांव के अखाड़े से खेलकर ही आज विदेश में झंडे गाड़ रही है। 14 साल की उम्र से वह लगातार कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पदक जीत रही है। अनिल पहलवान ने बताया कि इस साल उड़ीसा में 17 से 20 फरवरी तक आयोजित 22वी सब जूनियर गल्र्स राष्ट्रीय कुश्ती चैंपियनशिप में कोमल ने अंडर-17 से 40 किलो वर्ग में गुजरात की पहलवान भारती को भी हराया था।

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