Friday, October 22, 2021

100 रुपए के साथ दिल्ली आए थे महाशय धर्मपाल, चलाते थे तांगा, फिर खड़ी कर दी 5400 करोड़ रुपए की कंपनी

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नई दिल्ली। कहते हैं कि यदि आप किसी काम को रुचि और लगन के साथ करो या सीखो तो उस काम में आपको महारथ हासिल करने से कोई नहीं रोक सकता। किसी भी कार्य को सीखने की लगन ही आपको उस कार्य में निपुण बनती है। आज हम आपको एक ऐसे ही शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने लाख मुश्किलों का सामना किया लेकिन काम सीखने की ललक ने इन्हें कभी हारने नहीं दिया। आज ये शख्स करोड़ों की कंपनी का मालिक बन चुका है लेकिन इस शख्स का ये सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था। आइए जानते हैं बिमल मजुमदार के संघर्ष से भरे सफर के बारे में।

आसान नहीं था बिमल का ये सफर

आज किसी कंपनी का मालिक होना शायद कोई बड़ी बात नहीं है लेकिन जब आप बिमल के संघर्ष के बारे में जानेंगे तो शायद आपको ये काफी मुश्किल लगने लगेगा। बिमल का परिवार बहुत ही गरीब था। परिवार को आर्थिक सहायता देने के लिए बिमल ने 16 वर्ष की उम्र में ही कोलकाता आकर रहना शुरू कर दिया। यहाँ बिमल छोटा मोटा काम करके गुजारा चला लेते थे। इसके चलते बिमल की पढ़ाई भी छूट गई थी। जिससे उनके पिता भी बिमल से नाराज़ हो गए। तब बिमल महज 37 रूपये के साथ घर से निकाल आए और कुछ समय तक अपने दोस्त के साथ रहने लगे।

की थी सेक्यूरिटी गार्ड की नौकरी

घर छोड़ने के बाद बिमल ने मिठाई की दुकान पर काम करना शुरू कर दिया। मिठाई की दुकान पर काम करने के बाद बिमल को छ्त पर बोरियां बिछाकर सोना पड़ता था। इसी बीच बिमल के पिता का निधन हो गया जिससे बिमल पूरे टूट चुके थे। इसके बाद बिमल ने एक लेदर फैक्ट्री में गार्ड की नौकरी करना शुरू कर दिया। इसी के साथ-साथ वे छिप छिपकर काम भी सीखा करते थे। उन्होंने इस कंपनी में लेदर वर्क को अच्छे से सीखा।

आज हैं करोड़ों की कंपनी के मालिक

थोड़े दिन बाद बिमल अब लेदर की फैक्ट्री में काम करने लगे साथ ही बिमल छोटे मोटे ऑर्डर भी लेने का प्रयास करने लगे। लेकिन लोग उनपर विश्वास नहीं कर पाते थे क्यूंकि सभी को लगता था कि ये चोरी का समान है। लेकिन बिमल हार मानने वालों में से नहीं थे। तभी बिमल की मुलाक़ात खादिम के मालिक से हुई जहां से उन्हें 2 लाख रूपये का ऑर्डर मिला। उसके बाद बिमल को सफलता मिलती गई और बिमल ने “लेदर जंक्शन” नाम की कंपनी को शुरू कर दिया। आज बिमल की इस कंपनी का टर्नओवर करोड़ों में है। इस कंपनी में बिमल लेदर का हर उत्पाद बनाते हैं।

एमडीएच ग्रुप को कौन नहीं जानता

एमडीएच ग्रुप को कौन नहीं जानता होगा। भारत में मसालेदार खाने के शौकिन को एमडीएच के नाम से भली भाति से परिचित होगी। लेकिन किसी को शायद यह नहीं पता होगा कि उनकी प्रापर्टी कितनी है। उन्होंने कहां तक पढ़ाई की है। उनके जीवन में कई ऐसे पहलू है जिनसे आम आदमी बिल्कुल भी परिचित नहीं है। ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि मसाला किंग कितने प्रापर्टी के मालिक है। और उनकी शिक्षा कहा तक हुई थी।

97 साल की उम्र में हो गया था निधन

मसाला किंग धर्मपाल गुलाटी के नाम से हर कोई परिचित है। लेकिन किसी को यह नहीं पता कि उन्होंने केवल पांचवी तक ही शिक्षा हासिल की थी। साल 1919 सियालकोट में जन्म लेने वाले धर्मपाल गुलाटी का परिवार आर्थिक रूप से काफी कमजोर था। उनकी आर्थिक स्थिति काफी खराब थी। जिसकी वजह से उनको पांचवी के बाद पढ़ाई छोडऩी पड़ी।

पिता भी करते थे मसालो का काम

धर्मपाल गुलाटी के पिता भी मसालों का काम करते थे। उनकी दुकान का नाम भी एमडीएच था। आजादी के बाद धर्मपाल गुलाटी सियालकोट से दिल्ली आ गए। दिल्ली आने के बाद वह तांगा चलाने का काम करते थे। साल 1952 में उन्होंने दिल्ली के चांदनी चौक से मसालों की दुकान से शुरुआत की। उन्होंने खुद के मसाले बनाने शुरू कर दिए। धीरे धीरे उनके मसाले फेमस होने लगे।

अच्छी इनकम होने के बाद लगा ली मसालों की फैक्ट्री

अच्छी इनकम होने के बाद उन्होंने मसालों की फैक्ट्री लगा दी। वह धीरे धीरे अपने व्यापार को बढ़ाने लगे। उन्होंने अपने व्यापार को बढ़ाने के लिए काफी मेहनत की। धीरे धीरे मसालों का नाम इतना अधिक हो गया कि लोग विदेश में भी इसको जानने लगे। गुलाटी भारत में सबसे अधिक वेतन लेने वाले सीईओ थे। साल 2017 की रिपोर्ट के अनुसार उनकी सैलरी करीबन 17 करोड़ रुपए थी।

चार साल पहले कंपनी का नेट प्रॉफिट था 213 करोड़ रुपए

चार साल पहले कंपनी का नेट प्रॉफिट 213 करोड़ रुपए था। धर्मपाल अपने बिजनेस को चलाने के साथ साथ सामाजिक कामों का भी बड़ा ध्यान रखते थे। उन्होंने सामाजिक काम के लिए अपना एक चैरिटेबल ट्रस्ट बनाया। इस ट्रस्ट के माध्यम से उन्होंने 250 बेड वाला एक अस्पताल बनवाया। इस ट्रस्ट के माध्यम से झोपड़ी में रहने वाले लोगों का मुफ्त इलाज होता था।

भारत आए तो केवल उनकी जेब में थे 100 रुपए

जब वह भारत आए तो उनकी जेब में 100 रुपए थे। लेकिन वह अपनी मेहनत से 5400 करोड़ रुपए के मालिक बन गए। कभी तांगा चलाने वाले धर्मपाल गुलाटी के काफिले में करोड़पति कारो का मेला लगता था। इनके पास ऐसी आलीशान गाडिय़ा थी जो केवल मुकेश अंबानी और किसी मंत्री के पास ही होती होगी। तांगे से शुरुआत करने वाले धर्मपाल गुलाटी कारों के शौकिन थे। उनके काफिले में राल्स रॉय से लेकर मर्सिडीज़ जैसी आलिशान गाडिय़ा था।

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