Tuesday, July 27, 2021

सावन के महीने में छाया हरियाणा के घेवर का जादू, विदेशों तक पहुंची इसकी महक, स्वाद के दीवाने हुए लोग

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झज्जर। हरियाणा प्रदेश जहां अपनी मेहमान नवाजी के लिए जगजाहिर है, वहीं अपने खान पान के लिए भी प्रदेश का नाम पूरी दुनिया में जाना जाता है। हरियाणा प्रदेश अपने दूध दही के खान पान के लिए तो जाना जाता ही है, साथ ही अपनी मिठाईयों के लिए भी लोगों की पहली पसंद है। रोहतक की रेवड़ी की खूश्बू तो लोगों के जेहन में रहती ही है, मगर सावन के दिनों में हरियाणा के घेवर की महक विदेशों तक पहुंच जाती है। विदेशों में रहने वाले लोग भी हरियाणा के घेवर के दीवाने हैं। इसके अलावा गोहाना की जलेबी भी देश-दुनिया में अपनी अलग ही पहचान रखती है।

सावन में बढ़ गई घेवर की बिक्री

पंरतु आज हम बात करेंगे हरियाणा के घेवर की, सावन के महीने में जिसकी बिक्री अपने रिकार्ड तोडऩे लगती है। सावन का महीना शुरू हो चुका है और बारिश के दिनों में घेवर की महक लोगों को दीवाना बनाने लगती है। प्रदेश में कई शहरों में बनने वाला घेवर अपने स्वाद के लिए जाने जाते हैं, मगर जहां तक गोहाना के घेवर की बात है तो उसका स्वाद आपको अपना दीवाना बना लेगा। गोहाना का ये घेवर देसी घी से बनाया जाता है, जिसे एक बार खाने के बाद लोग सालों तक उसका स्वाद महसूस करते हैं।

विदेशों तक जाती है इस घेवर की महक

गोहाना में मातूराम हलवाई के घेवर की महक तो विदेशों तक जाती है। सावन के महीने में मातूराम हलवाई के घेवर की जोरदार तरीके से बिक्री शुरू हो जाती है। देसी घी से बनने वाले इस मालदार घेवर की डिमांड सात समुंद्र पार भी होने लगती है। वहां रहने वाले लोग विशेष तौर पर सावन के महीने में गोहाना का घेवर खाना पसंद करते हैं। बता दें कि मातूराम हलवाई की पहचान सालों पुरानी है। साल 1958 से मातूराम हलवाई का नाम खानपान के क्षेत्र में अपनी अलग और विशेष पहचान बनाए हुए है। मातूराम ने ही विशेष तौर की जलेबी बनाकर मिष्ठान जगत में अपनी अलग और विशेष छवि बनाई। आज मातूराम की जलेबी खाने वाले लोगों की संख्या काफी अधिक है।

इस तरह शुरू किया घेवर बनाना

साल 1970 में मातूराम ने विशेष तरह का देसी घी से घेवर बनाने की शुरूआत की। जिसके बाद देखते ही देखते उनका घेवर लोगों को इतना पसंद आया कि आज देश मेें ही नहीं बल्कि विदेश में रहने वाले लोग भी उसके स्वाद के दीवाने हैं। मातूराम के घेवर को विदेशों में रहने वाले भारतीय विशेष तौर पर अपने पास मंगवाते हैं। हरियाणा के ही नहीं बल्कि कई राज्यों के अफसर भी मातूराम के घेवर खाने के लिए लालायित रहते हैं। मातूराम की दुकान पर घेवर बनाने की शुरूआत सावन के आने से 10 दिन पहल हो जाती है और जन्माष्टमी के बाद इसे बनाना बंद कर दिया जाता है। कहा जाता है कि सावन के महीने में यदि मातूराम का घेवर नहीं खाया तो फिर कुछ नहीं खाया। फिलहाल मातूराम हलवाई का साम्राज्य उनके पोते नीरज गुप्ता और रमन गुप्ता बाखूबी संभाल रहे हैं। यह उनकी तीसरी पीढ़ी है जो इस पुश्तैनी काम को और आगे लेकर जा रहे हैं।

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