Sunday, October 17, 2021

मां टीचर और पिता थे डाक्टर, हरियाणा की ये इंजीनियर बेटी बन गई जज, गुजरात में संभालेगी न्याय की कुर्सी

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फरीदाबाद। हरियाणा के फरीदाबाद शहर की बेटी कीर्ति ने गुजरात ज्यूडिशियल सर्विसेज की परीक्षा में देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। कीर्ति पूर्व उपमुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. अनूप कुमार और नेहरू कालेज की पूर्व प्राचार्या संतोष कुमारी की बेटी हैं। उनके परिवार में खुशी का माहौल है। कीर्ति की नियुक्ति बतौर ज्यूडिशियल मैजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास होगी। परिणाम आने के बाद जल्द ही कीर्ति अपना कार्यभार संभाल लेंगी। फिलहाल उन्हें बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है और कीर्ति भी जज बनने के बाद बेहद ही उत्साहित है और उन्हें खुशी है कि वह अपने लक्ष्य को पाने में सफल रही हैं।
तीसरी बार में हासिल की जज की कुर्सी
डा. अनूप कुमार ने बताया कि कीर्ति ने गुजरात ज्यूडिशिलय सर्विसेज की परीक्षा तीसरी बार में उत्तीर्ण की है। इससे पहले दो बार लिखित परीक्षा उत्तीर्ण कर ली, लेकिन गुजराती नहीं आने की वजह से नाकामयाबी हासिल लगती है। इसके लिए उन्होंने आठ महीने में अहमदाबाद में गुजराती पढ़ना एवं लिखना सीखी। उन्होंने बताया कि गुजरात ज्यूडिशियल सर्विसेज में 50 अंक की गुजराती भाषा होती है और इसमें 40 नंबर लाना अनिवार्य होता है।
रिश्तेदार के कहने पर शुरू की थी पढ़ाई
डा. अनूप कुमार ने बताया कि कीर्ति ने एक इंजीनियर थी और बहु राष्ट्रीय कंपनी में अच्छे पद कार्यरत थी। किसी रिश्तेदार के कहने पर उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से वकालत की पढ़ाई शुरू की। नौकरी और पढ़ाई दोनों अच्छी रही थी, लेकिन वकालत में रुचि बढ़ने के साथ ही नौकरी छोड़ दी और पढ़ाई को पूरा समय देने लगी। वकालत पूरी करने के बाद दो वर्षों से ज्यूडिशियल सर्विसेज की तैयारी कर रही थी। कीर्ति ने अपनी सफलता को श्रेय पिता डा. अनूप कुमार और मां संतोष कुमारी को दिया है।
बधाई देने वालों को लगा तांता
जैसे ही डाक्टर अनूप और मां संतोष के रिश्तेदार, पड़ोसी और जान पहचान वाले लोगों को कीर्ति के जज बनने की खबर हुई तो लोग उन्हें बधाई देने के लिए पहुंचने लगे। माता पिता ने भी खुशी जताई की उनकी बेटी ने अथक मेहनत से जज बनने में सफलता पाई है। बता दें कि लगातार तीन बार परीक्षा देने के बाद ही कीर्ति ज्यूडीशियल सर्विस में पास हो पाई है। उन्हें जज बनकर बेहद खुशी हो रही है। कीर्ति ने कहा कि किसी भी चुनौती को पाने के लिए कठिन परिश्रम करना ही पड़ता है। वह भी दो बार इस परीक्षा में पास नहीं हो पाई, मगर उन्होंने हौंसला नहीं छोड़ा और अंतत: उन्हें तीसरी बार में सफलता मिल गई। यदि वह भी निराश होकर बैठ जाती तो अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाती। इसलिए किसी भी लक्ष्य को पाने के लिए निराशा से दूर रहना चाहिए।
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