Thursday, September 23, 2021

इन तीन बहनों ने सफल की अपने माता पिता की मेहनत, सरकारी स्कूल में पढऩे वाली तीनों बहनें बन गई बड़ी सरकारी अफसर

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नई दिल्ली । साल 2016 में आमिर खान की मूवी आई थी दंगल। दंगल मूवी पूरी तरह से बेटियों पर आधारित थी। इसमें आमिर खान एक सीन में कहता है कि हमारी बेटियो बेटो से कम है क्या। यह मूवी हरियाणा की तीन पहलवान बहनों पर आधारित थी। इस फिल्म में दिखाया गया था कि कैसे हरियाणा के गांव बलाली में रहने वाले एक पहलवान पिता ने अपने बेटियों को ऐसा पहलवान बनाया, जिन्होंने अपने माता पिता का नाम पूरी दुनिया में रोशन कर दिया। ठीक इसी तरह से हरियाणा के साथ लगते राजस्थान में भी तीन बहनों ने अपनी काबलियत से अपनी मां के संघर्ष को सफल बनाते हुए उनका नाम रोशन कर दिया।  राजस्थान हनुमानगढ़ जिले के रावतसर की तीन बहनों ने एक साथ सरकारी नौकरी हासिल की है।

तीनों बहने एक साथ बनी आरएसएस अफसर

तीनों बहने सिविल सर्विस परीक्षा पास करके आरएसएस अफसर बनी है। इन्होंने यह भी साबित कर दिया कि अगर बेटियों को सही परवरिश करके अच्छी तालीम दी जाए तो वह आगे निकल सकती है। तीनो बहने राजस्थान प्रशासनिक सेवा की परीक्षा में एक साथ बैठी थी। एक साथ पास भी हो गई। तीनों बहनों ने एक साथ सरकारी स्कूल में पढ़ाई की।

राज्य सहकारिता विभाग में हुआ चयन

साल 2012 में बहन मंजू का चयन राज्य सहकारिता विभाग में हुआ। मंजू ने कड़ी मेहनत से राजस्थान प्रशासनिक सेवा की तैयारी की थी। जबकि इसी विभाग में उनकी बहन रोमा का चयन 2011 में हुआ था। अब और तीनों बहन आरएसएस बन चुकी है।

तीनों बहनों ने हासिल की ये रैंक

तीनों बहनो ने परीक्षा में अलग-अलग रैंक हासिल की। अंशू ने ओबीसी गल्र्स में 31, रीतू ने 96 और सुमन ने 98 रैंक हासिल की। कभी पांचों बहने गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ती थी। फिर माता पिता ने शहर के प्राइवेट स्कूल में इनका दाखिला कराया। तीनों बहनों ने इस बात को साबित कर दिया बेटियों को किसी तरह का अभिशाप नहीं समझना चाहिए। उनकी परवरिश भी बेटों की तरह करनी चाहिए। रावतसर तहसील क्षेत्र के गांव भेरुसरी निवासी किसान सहदेव सहारण की पांच बेटियों में से दो रोमा और मंजू पहले ही आरएएस में चयनित हो चुकी है।

दो बहनों की प्रेरणा से तीन बहनों ने की तैयारी

अशुं सुमन और रितू ने आरएएस में चयनित होने के बाद कहा उन्होंने अपनी दो बहनों से प्रेरित होकर भी राजस्थान सिविल सेवा की तैयारी की। दो बहने पहले भी राजस्थान सेवा में चयनित हो चुकी है। सबसे बड़ी बहन रोमा ने बताया कि यह सब उनके माता पिता की मेहनत का फल है। बिना मेहतन और त्याग के कुछ हासिल नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कड़ी मेहनत करके हमको पढ़ाया लिखाया। उन्होंने हमारे सपने साकार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उनकी बदौलत ही आज हम यहां पर पहुंच पाए है।

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