Tuesday, July 27, 2021

सडक़ों पर झाडू मारने वाली महिला बन गई कलेक्टर,जानें आशा की प्रेरणादायक कहानी, कैसे तय किया मुश्किल भरा सफर

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नई दिल्ली। इसके कहते हैं किस्मत में लिखे को कोई नहीं मिटा सकता। इंसान के जीवन में जो लिखा है, वह उसे हर हाल में मिलता है। ऐसे ही कहानी इस महिला की भी है, जिन्होंने सडक़ों को साफ करना ही अपना जीवन मान लिया था। उन्हें कतई उम्मीद नहीं थी कि एक दिन कुदरत उसे इतना बड़ा अवसर प्रदान करेगी, जिसके बाद उसका पूरा जीवन ही बदल जाएगा। इस महिला को भी किस्मत ने इतना बड़ा चांस दिया कि वह फर्श से अर्श पर आ गई। जब लोग पूरी तरह से हताश हो जाते है तो उनको मोटिवेट करने के लिए एक मुहावरे का इस्तेमाल किया जाता है। वह मुहावरा है कि गुच्छे की आखिरी चाबी से भी ताला खुल सकता है। ऐसा ही ताला नगर निगम में सफाई का काम करने वाली स्वीपर आशा कंदरा ने खोला है।

नगर निगम में करती थी सफाई का काम

कुछ समय पहले तक आशा कंदरा नगर निगम में अपना गुजारा चलाने के लिए सफाई का काम करती थी। उनके ऊपर दो बच्चों की जिम्मेदारी है। वह अपने बच्चों को पालने के लिए सफाई कर्मचारी के रूप में काम कर रही थी। सफाई कर्मचारी का काम करते ही उन्होंने राजस्थान प्रशासनिक सेवा की परीक्षा दी, जिसमें वह पास हो गई। अब वह जोधपुर में डिप्टी कलेक्टर के रूप में कार्यरत है।

उम्र को भी एक नंबर कर दिया साबित

जो लोग अपने उम्र के हिसाब से पढ़ाई लिखाई करते है। आशा ने उनको भी राह दिखाई है। आशा ने 40 साल की उम्र में यह परीक्षा पास की है। उन्होंने साबित कर दिया कि पढऩे लिखने के लिए उम्र केवल एक नंबर है। आशा की शादी साल 1997 में हुई थी। लेकिन उनके पति के साथ उनकी अधिक निभ नहीं सकी। आठ साल पहले वह अपने पति से अलग हो गई। उन्होंने अपने दो बच्चों को पालते हुए ग्रेजुएशन पूरी की।

2018 में दी सिविल सर्विस परीक्षा

फाइनेंशियल एक्सप्रेस के अनुसार साल 2018 में आशा ने सिविल सर्विस की परीक्षा दी। किसी वजह से परीक्षा परिणाम आने में देरी हो गई थी। अब परीक्षा परिणाम आया तो आशा ने सफलता हासिल कर ली। वह बताती है कि रिजल्ट नहीं आने तक उनके पास कमाई का कोई और जरिया नहीं था। उनको अपने बच्चों का पेट तो  पालना था। इसलिए उन्होंने निगम में स्वीपर की जॉब की। 13 जुलाई को परीक्षा परिणाम आया तो उनको अपनी मेहनत का फल मिल गया। आशा बताती है कि उन्होंने सभी बाधाओ को पार करके सफलता हासिल की। वह बताती है कि सिंगल मदर होना और साथ में परीक्षा की तैयारी करना मुश्किल था। लेकिन मैने चुनौतियों को स्वीकार करते हुए सफलता हासिल की।

 

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