Thursday, September 23, 2021

कई साल से लगातार फेल हो रहा था यह युवक, हरियाणा पहुंचते ही खुल गई किस्मत, इस तरह से जसमीत बना IAS अफसर

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नई दिल्ली यूपीएससी की परीक्षा देने वाले कैंडिडेट कभी पहले प्रयास में सफल हो जाते है। तो कभी कभी सफलता के लिए उनको दो से अधिक प्रयास करने पड़ते है। ऐसा ही कुछ जसमीत सिंह संधू के साथ हुआ। पहले दो प्रयास में वह असफल रहे। लेकिन तीसरे प्रयास में उन्होंने अपनी गलतियों से सबक लेते हुए सफलता हासिल की। उनको आईआरएस मिला। लेकिन उन्होंने फिर प्रयास किया और आईएएस बन गए। साल 2015 में जसमीत ने सिविल सर्विस की परीक्षा पास की। जसमीत ने लुधियाना के सेक्रेड हार्ट कान्वेंट स्कूल से स्कूली पढ़ाई। यहीं से उन्होंने दसवीे और बारहवीं पास की। इसके बाद उन्होंने आईआईटी रुडकी से ग्रेजुएशन किया। साल 2010 में जसमीत ने यूपीएससी परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी।

पहले दो प्रयास में रहने असफल, तीसरे में हासिल की सफलता

जसमीत अपने पहले दो प्रयासों में पूरी तरह से असफल रहे। तीसरे प्रयास में उन्होंने अपनी गलतियों से सबक लिया। इस बार वह पास हो गई। उनकी रैंक 332 आई। उनको आईआरएस दिया गया। लेकिन उनको आईएएस बनना था। इसलिए उन्होंने फिर प्रयास किया और आईएएस बन गई। जसमीत ने जब सिविल सर्विस में सफलता हासिल की,तब वह हरियाणा के फरीदाबाद शहर में आईआरएस की ट्रेनिंग ले रहे थे। इसे इस तरह भी कहा जा सकता है कि कई सालों से फेलियर का झटका सहन कर रहे जसमीत के लिए हरियाणा में आते ही सफलता का दरवाजा खुल गया। जसमीत के लिए हरियाणा का फरीदाबाद शहर लक्की साबित हुआ और वह आईएएस बनने में सफल रहे।

पढ़ाई के लिए तैयार नहीं किया था कोई टाइम टेबल

जसमीत बताते है कि उन्होंने पढ़ाई के लिए कोई टाइम टेबल तैयार नहीं किया था। वह अपने हिसाब से पढ़ते थे। लेकिन जब पढ़ते थे तो पूरे ध्यान के साथ पढ़ते थे। उन्होंने यूपीएससी क्लियर के लिए केवल एक महीने की कोचिंग ली। जसमीत कहते हैं कि किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अर्जुन की तरह मछली की आंख पर निशाना लगाना जरूरी होता है। वह दिन रात केवल एक ही टारगेट साधे हुए थे। तभी लगातार असफल होने के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपना धैर्य नहीं खोया। इसलिए वह यूपीएससी की तैयारी कर रहे युवाओं को भी यही टिप्स देना चाहेंगे कि धैर्य और हिम्मत की बहुत जरूरत होती है। इसलिए बिना हिम्मत हारे अपनी तैयारियों में जुटे रहेें। लोग आपका ध्यान भटकाने की कोशिश भी करेंगे, मगर आपको अपने लक्ष्य से भटकना नहीं है।

सभी विषयों को डिटेल से चाहिए पढऩा

जसमीत कहते है कि सभी विषयों को पूरी डिटेल से पढऩा चाहिए। जसमीत सिलेबस खत्म होने के बाद मॉक टेस्ट भी देते थे। जहां भी उनसे गलती होती थी वह सुधार करने का काम करते थे। वह कहते है कि मॉक टेस्ट के जरिए विषय पर आपकी अच्छी समझ विकसित हो जाएगी। वहीं वैकल्पिक विषय का चयन काफी सोच समझ कर करना चाहिए। जसमीत का वैकल्पिक विषय पंजाब लिटरेचर था। इससे पहले दो प्रयास में उन्होंने मनोविज्ञान और प्रशासनिक सेवा को वैकल्पिक विषय के रूप में चुना था। वह कहते है कि कोई भी चीज मुश्किल नहीं है बस आप अपने भीतर हौसला बनाकर रखिए।

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