Friday, October 22, 2021

अमेरिकी बॉक्सर को हरियाणवी छोरे ने जमकर धोया, मगर बदले में मिला धोखा, जानें मुक्केबाज विकास की दिल छूने वाली कहानी

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भिवानी। हरियाणा के इस तूफानी बॉक्सर ने अपने जानदार और शानदार खेल की बदौलत अच्छे-अच्छों को धूल चटाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। महज 19 साल की उम्र में यह तूफानी बॉक्सर लंदन ओलंपिक की रिंग में पहुंच गया। उसने अपने तूफानी खेल से अमेरिका के बॉक्सर को रिंग में इतनी बुरी तरह से धोया कि वहां मौजूद भारतीयों के चेहरे खिल उठे। अमेरिकी बॉक्सर को 13-11 से मात देने वाले विकास को उस समय जोर का झटका लगा, जब बॉक्सिंग की सबसे बड़ी संस्था एआईबीए ने इस हरियाणवी मुक्केबाज को हरा दिया। इस तरह से विकास जीतकर भी हारकर ओलंपिक से बाहर हो गए।

दस साल की उम्र में शुरू की बॉक्सिंग

दरअसल हरियाणा के हिसार जिले के गांव सिंघवा के रहने वाले विकास ने महज 10 साल की उम्र में बॉक्सिंग खेलनी शुरू कर दी थी। विकास के पिता बिजली विभाग में काम करते थे। विकास की उम्र जब दो साल थी, तब उनके पिता का भिवानी तबादला हो गया। भिवानी आने के बाद दस साल के होते ही विकास ने वहां के एक बॉक्सिंग क्लब को ज्वाइंन कर लिया। विकास की मेहनत और तूफानी मुक्कों के आगे अच्छे अच्छे बॉक्सर पानी मांग जाते थे। इसके चलते ही विकास को महज 19 साल की उम्र में वर्ष 2012 में लंदन ओलंपिक में जाने का मौका मिला। इससे पहले विकास कृष्ण अपने देश के लिए कई मैडल जीत चुके थे। लंदन ओलंपिक के क्वार्टर फाईनल मैच में विकास का मुकाबला अमेरिका बॉक्सर एरल स्पेस के साथ हुआ। इस मैच में विकास ने अमेरिकी बॉक्सर को रिंग में जमकर धोया और 13-11 से जीत दर्ज करने में सफल रहे।

मगर विकास की किस्मत ने दगा दे दिया

पंरतु इस बीच अमेरिकी बॉक्सर ने विकास की जीत को चुनौती देते हुए एआईबीए में आपत्ति दर्ज करवा दी, जिसके बाद विकास की जीत का फैसला पलट दिया गया। बताया गया कि इस मुकाबले में विकास ने 9 फाऊल किए थे और उन्हें केवल एक फाऊल के लिए चेतावनी मिली थी। इसका परिणाम यह हुआ कि अमेरिकी बॉक्सर को चार प्वाइंट और मिल गए और वह विकास से 13-15 से जीतने में सफल रहा। हालांकि भारतीय दल के मुखिया पीके मुरलीधरन ने इस फैसले पर वहां खूब हंगामा किया, मगर उनकी वहां सुनने वाला कोई नहीं था। इस तरह से जीतने के बावजूद विकास को जबरन हराकर बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

इस हार को सहन नहीं कर पाया विकास

19 साल की छोटी सी उम्र में विकास इस झटके को सहन नहीं कर पाया और उसने बॉक्सिंग छोडक़र किताबें उठा ली और दिन रात पढ़ाई में जुट गया। विकास को हरियाणा पुलिस में डीएसपी की नौकरी मिल गई। पंरतु डीएसपी बनने के बाद वह बॉक्सिंग से अधिक दिनों तक दूर नहीं रह पाए। हरियाणा पुलिस में भर्ती होने के बावजूद उन्होंने दोबारा से बॉक्सिंग रिंग में उतरने का फैसला लिया। उनके ज्यादातर दोस्त बॉक्सर ही थे, इसलिए वह भी अपने दोस्तों के साथ बॉक्सिंग के रिंग में कूद गए। भिवानी बॉक्सिंग क्लब के साथ साथ विकास ने आर्मी इंस्टीच्यूट पुणे से भी टे्रनिंग ली। साल 2012 में अमेरिका में हारने से पहले तक विकास ने साल 2010 में तीन गोल्ड मैडल भी जीते थे। एशियन यूथ बॉक्सिंग चैंपिशनशिप, बाक यूथ वल्र्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप और एशियन गेम्स में गोल्ड मैडल जीतकर अपने देश का नाम रोशन किया। समर यूथ ओलंपिक चैंपियनशिप में उन्होंने ब्रांज मैडल भी जीता।

2014 में फिर विकास ने रिंग में उतरने का फैसला किया

साल 2012 की निराशाभरी हार के बाद विकास ने 2014 में एक बार फिर से रिंग में आने का फैसला लिया और एशियन गेम्स से वापसी की तथा ब्रांज मैडल जीतकर देश का नाम रोशन किया। साल 2015 में एशियन गेम्स में विकास ने अपने देश को सिल्वर मैडल दिया। इसके बाद विकास को रियो ओलंपिक में हार का सामना करना पड़ा। साल 2018 में विकास ने शानदार तरीके से वापसी करते हुए कॉमनवेल्थ में अपने देश को गोल्ड मैडल लाकर दिया। इसी साल विकास को तब झटका लगा, जब उनकी आंख में चोट लग गई और वह गोल्ड लाने से चूक गए। तब विकास को ब्रांज से ही सब्र करना पड़ा।

प्रोफेशन बॉक्सिंग में अजमाई किस्मत

इसके बाद विकास ने प्रोफेशनल बॉक्सिंग में अपनी किस्मत आजमाने का फैसला किया। इसमें एक खास बात यह है कि बॉक्सिंग का स्टेटसस दो तरह का होता है। प्रोफेशनल और अमेचर। अमेचर बॉक्सिंग में खिलाड़ी अपने देश के लिए खेलता है और प्रोफेशनल में बॉक्सर खुद के लिए खेलता है, जिसमें उसे जीतने पर ढेर सारा रुपया मिलता है। विकास ने भी प्रोफेशनल बॉक्सिंग में दो मैच खेले और दोनों को ही जीता। अमेचर बॉक्सिंग पर कंट्रोल करने वाली संस्था एआईबीए ने पिछले दिनों ही प्रोफेशनल बॉक्सर को ओलंपिक में खेलने की अनुमति प्रदान की है। जबकि इससे पहले प्रोफेशनल बाक्सर ओलंपिक में नहीं खेलते थे।

देश के लिए गोल्ड लाने को तैयार है विकास

एआईबीए के फैसले के बाद विकास ने फिर से अपने देश के लिए खेलने का निर्णय लिया है। अपने एक खास दोस्त और मुक्केबाज नीरज गोयत के साथ प्रेक्टिस शुरू कर दी है। विकास ने 69 किलोग्राम में खेलने का फैसला लिया है। अब ये हरियाणवी मुक्केबाज अपने देश के लिए गोल्ड मैडल लाने के लिए पूरी तरह से अपनी जान झोंक चुका है। विकास ने रात दिन प्रेक्टिस कर खुद को तैयार करने का निर्णय ले लिया है। विकास का कहना है कि वह अपने देश के लिए गोल्ड लाने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। उनके पास रिंग में विदेशी मुक्केबाजों को धूल चटाने का पूरा अनुभव भी है। बस अब उन्हें इसके लिए एक मौका चाहिए।

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