Sunday, October 17, 2021

ऑटो चालक के जज्बे को सलाम, बेटे ने मेहनत-मजदूरी कर छोटे भाई को बनाया आर्मी अफसर

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अंबाला। ऑटो रिक्शा चलाने वाले पिता ने अपने बेटे को आर्मी में अफसर बनाने का सपना देखा था। इसके लिए वह रात दिन मेहनत भी करते थे। वह जब भी किसी आर्मी अफसर को देखते तो उनके दिल में केवल यही ख्याल आता था कि वह अपने छोटे बेटे नरेंद्र सिंह को देश की सेवा के लिए आर्मी में भेजेंगे। सेना के जवान को देखते ही उनका सीना गर्व से चौड़ा हो जाता था। पंरतु होनी को तो कुछ और ही मंजूर था। शायद इस अभागे पिता की किस्मत में यह नहीं लिखा था कि वह अपने बेटे को आर्मी का अफसर बनते हुए देख सकें । हार्टअटैक के चलते उनका निधन हो गया।

बड़े बेटे ने संभाली घर की जिम्मेदारी

इसके बाद घर की जिम्मेदारी बड़े बेटे ओंकार सिंह जिसकी उम्र महज 16 साल थी, उन पर आ गई। हरियाणा के अंबाला जिले के गांव मिटटापुर में रहने वाले ओंकार ने भी इस जिम्मेदारी को खुशी खुशी स्वीकार कर लिया। छोटे भाई नरेंद्र सिंह की उम्र उस वक्त मात्र 14 साल थी। नरेंद्र के सिर से जब पिता का साया उठ गया तो उसके बड़े भाई ओंकार ने सारी जिम्मेदारी अपने नाजुक कंधों पर ले ली। ओंकार ने अपनी दसवीं की पढ़ाई छोड़ दी, ताकि कोई काम धंधा करके अपने परिवार का पालन पोषण कर सके। पूरे परिवार के सामने रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया। मगर ओंकार ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने तुरंत ही मेहनत मजदूरी करना शुरू कर दिया। उन्होंने अपने छोटे भाई नरेंद्र की पढ़ाई छूटने नहीं दी।

नरेंद्र ने की खूब मेहनत

नरेंद्र ने भी अपने बड़े भाई को पिता का दर्जा दिया और रात दिन पढ़ाई पर ही ध्यान दिया। उन्होंने समलेहडी के सरकारी स्कूल से 12 वीं तक की शिक्षा हासिल की। स्कूल के टीचर भी नरेंद्र के हालातों को देखते हुए उसका पूरा सहयोग करते थे। नरेंद्र भी पढ़ाई में हमेशा से ही अव्वल आता था। इसलिए सभी लोग उसे प्यार भी करते थे। मजदूरी करने के बाद ओंकार ने भी अपने पिता की तरह से ऑटो रिक्शा चलाना शुरू कर दिया और छोटे भाई नरेंद्र को उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए जालंधर रवाना कर दिया। जालंधर यूनिवर्सिटी से नरेंद्र ने 81 प्रतिशत अंक लेकर बीटेक एयरोनॉटिकल की डिग्री हासिल की। पढ़ाई में होशियार होने की वजह से नरेंद्र को कॉलेज से स्कॉलरशिप हासिल हो गई थी।

नरेंद्र ने किया डाकिए का काम

डिग्री हासिल करने के बाद नरेंद्र ने घर वापिस आकर अपने भाई का हाथ बंटाना शुरू कर दिया। उन्होंने अंबाला डाकघर में ग्रामीण डाक सेवक का काम शुरू कर दिया, ताकि परिवार की कुछ आर्थिक सहायता हो जाए। वह सुबह सुबह बच्चों को टयूशन भी पढ़ाते थे। इस दौरान नरेंद्र सिंह ने डिफेंस परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी। नरेंद्र ने अपने पिता का सपना साकार करने के लिए साल 2018 से ही डिफेंस की परीक्षा देनी शुरू कर दी थी।

12 बार दी परीक्षा और बनें लेफ्टिनेंट

2018 से 2020 तक उन्होंने भारतीय सेना और भारतीय नेवी के विभिन्न पदों के लिए करीब 12 बार परीक्षा दी। पंरतु साल 2020 में 12वीं बार वह सफल रहे और भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट रैंक के लिए उनका चयन हुआ। सिलेक्शन के बाद भारतीय सेना में उनकी टे्रनिंग पूरी हुई। हाल ही में 12 जून 2021 को लेफ्टिनेंट के पद पर उनकी नियुक्ति हुई है। नरेंद्र सिंह का कहना है कि आज वह अपने पिता का सपना पूरा कर पाएं हैं। पंरतु वह अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपने मां और बड़े भाई को देते हैं। जिन्होंने इस पद पर पहुंचाने में रात दिन एक कर दिया।

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