Friday, October 22, 2021

बेटों से भी आगे है ये बेटी, पिता का सिर से उठा साया, नहीं मानी हार, हरियाणा रोडवेज में नौकरी कर चलाती है परिवार

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हिसार। कहते हैं कि यदि कुछ करने की हिम्मत और दिल में जज्बा हो तो कोई भी काम मुश्किल नहीं होता। बड़ी से बड़ी मुश्किलें भी आसान लगने लगती हैं। बहुत से लोग संकटों से घबराकर दूर भाग खड़े होते हैं, वहीं अनेक लोग ऐसे भी होते हैं, जोकि संकट को गले लगाकर सफलता की मंजिल को पाते हैं। दुनिया में बहुत से लोगों ने कड़ी मुश्किलों को पार करते हुए ही सफलता को पाया है, जबकि जो लोग संकटों से डर जाते हैं, कामयाबी भी उनसे उतनी ही दूर रहती है।

हरियाणा की इस बेटी ने दिखाया गजब का हौंसला

आज हम आपको हरियाणा के हिसार जिले के गांव राजली में रहने वाली एक ऐसी बहादुर लडक़ी की सच्ची कहानी बताने जा रहे हैं, जिसने अपने पिता के निधन के बाद ना केवल अपने पूरे परिवार को संभाला, बल्कि हरियाणा रोडवेज की वह नौकरी की, जिसे केवल मर्दों के लिए ही बनाया गया है। यह कहानी है सोनी की, जिनके पिता का साया उनके सिर से उठ गया और वह भी ऐसे वक्त में जब परिवार को उनकी बहुत जरूरत थी। परिवार में हर कोई हैरान और परेशान था, किसी को समझ नहीं आ रहा था कि परिवार के मुखिया का सहारा उठने के बाद घर कैसे चलेगा। ऐसे में 22 साल की बेटी सोनी ने ना केवल खुद की हिम्मत को समेटा, बल्कि पूरे परिवार को भरोसा दिलाते हुए हरियाणा रोडवेज में मौकेनिकल हैल्पर की नौकरी ज्वाइंन की।

8 भाई-बहनों में तीसरे नंबर की है सोनी

सोनी आठ भाई बहनों में तीसरे नंबर पर है। सोनी ने अपनी नौकरी के साथ साथ पूरे परिवार को एक सूत्र में पिरो लिया और सभी को बेहतर तरीके से संभाल भी लिया। हिसार डिपो में सोनी रोजाना बसों की मरम्मत का काम करती है और उनकी आय से ही घर का गुजारा भी चल रहा है। जो भी सोनी को बसों की मरम्मत का काम करते हुए देखता है, वह बुरी तरह से हैरान रह जाता है। किसी को भी अपनी आंखों पर विश्वास नहीं होता कि जिस काम को करने से मर्द भी कतराते हैं, सोनी से बहुत अच्छे से कर रही है।

पिता अपनी बेटी को खिलाड़ी बनाना चाहते थे

सोनी के पिता नरसी का साल 2019 में बीमारी की वजह से निधन हो गया था। मां मीना देवी अपने घर का काम ही करती हैं। सोनी ने हिसार बस डिपो में खेल कोटे में मैकेनिकल हेल्पर के पद हेतु 31 जनवरी 2019 को आवेदन किया था। जिसके चलते सोनी को हरियाणा परिवहन डिपो हिसार में इस पद के लिए नौकरी मिल गई थी। हालांकि पिता चाहते थे कि उनकी बेटी खिलाड़ी बनकर देश के लिए मैडल लाए, पंरतु होनी को तो कुछ और ही मंजूर था। पिता की इच्छा को देखते हुए सोनी ने साल 2016 में पहले कबडडी और फिर मार्शल आर्ट के पेंचक सिलाट गेम खेलना शुरू किया। इस खेल में राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित कंपटीशन में सोनी ने तीन बार गोल्ड मैडल जीतकर अपने परिवार का नाम रोशन किया। सोनी को खेल कोटे के चलते ही समूह-डी में हरियाणा रोडवेज में नौकरी मिली थी। मगर पिता के निधन की वजह से उनका यह सपना अधूरा ही रह गया और वह खेल को आगे बढ़ाने की बजाए अपने परिवार की जिम्मेदारी में व्यस्त हो गई। इस तरह से एक बहादुर बेटी ने अपने परिवार को पालने का जिम्मा अपने नाजुक कंधों पर उठा लिया।

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