Tuesday, July 27, 2021

पाकिस्तान को ऐसे चटाई धूल, बचाई20 हजार भारतीय जवानों की जान, भारत की शान थे जासूस रविंद्र कौशिक

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नई दिल्ली। फिल्म एक था टाईगर में आपने सलमान खान को भारत के सबसे खतरनाक जासूस के रूप में देखा होगा। वह भारतीय एजेंसियों की आंखों में धूल झोंककर पाकिस्तान की महिला जासूस को भगाकर ले गया था और अपनी ही दुनिया में मस्ती से जीवन काट रहा था। हालांकि जब देश पर विपदा आई तो वह अपनी जान पर खेलकर सैंकड़ों लोगों को बचाकर भी लाया था। मगर यह तो केवल फिल्मी पर्दे पर दिखाई गई एक काल्पनिक कहानी भर थी। मगर आज हम आपको भारत के एक ऐसे जासूस की कहानी बताने जा रहे हैं, जिन्होंने अपनी जान पर खेलकर 20 हजार भारतीय सैनिकों की जान बचाई।

रविंद्र कौशिक उर्फ टाईगर की कहानी

इस जासूस का नाम है रविंद्र कौशिक, जोकि सलमान खान की तरह से नकली नहीं बल्कि असली टाईगर थे। जाबांज जासूस रविंद्र कौशिक के बहादुरी के किस्से सुनकर आप दांतों तले उंगली दबा लेंगे। उन्होंने पाकिस्तान की खतरनाक और खूंखार एजेंसी की आंखों में धूल झोंकते हुए अपने देश के हजारों सैनिकों की जान बचाई। रविंद्र कौशिक ने ना केवल देश की सरहद को पार करते हुए पाकिस्तान की सीमा में घुसने का साहस दिखाया, बल्कि उनकी सेना में भर्ती होने का कारनामा भी दिखाया। रविंद्र कौशिक ने अपनी असली पहचान बदलकर पाकिस्तानी सेना में ना केवल एंट्री पाई, बल्कि सालों तक उसमें बड़े अफसर के रूप में तरक्की भी ली। उनकी बहादुरी और देशभक्ति के जज्बे को देखते हुए भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ ने जासूस रविंद्र कौशिक को टाईगर की उपाधि से नवाजा था।

इस तरह से खुफिया एजेंसी में शामिल हुए रविंद्र

रविंद्र कौशिक का जन्म वर्ष 1952 में राजस्थान के श्रीगंगा नगर में हुआ था। बताया जाता है कि अपने कॉलेज के दिनों में लखनऊ में हुए एक यूथ फेस्टिवल में रविंद्र ने एक इंडियन जासूस की भूमिका निभाई। जो चीन में फंस जाता है, इसके बावजूद परवाह ना करते हुए रविंद्र ने चीन के जुल्मों को सहन किया। रविंद्र की एक्टिंग को वहां मौजूद इंडियन इंटेलीजेंस के अधिकारी भी देख रहे थे। रविंद्र से प्रभावित होकर तभी भारतीय अधिकारियों ने उन्हें अपने साथ ले लिया। रविंद्र को पहले ही मिशन में पाकिस्तान भेजा गया। 1975 में रविंद्र कौशिक का यह मिशन बेहद ही सफल रहा। उनकी इसी सफलता को देखते हुए भारतीय खुफिया एजेंसी ने दोबारा से अहमद शाकिर बनाकर उन्हें पाकिस्तान भेजा।

पाकिस्तान से ली वकील की डिग्री

इस नए रंग रूप में अहमद शाकिर ने पाकिस्तान जाकर वहां अपना रूतबा बढ़ाया और वहीं एक कॉलेज में एडमिशन ले लिया। रविंद्र ने कॉलेज में जाते ही अपने सभी जाली दस्तावेज बनवा लिए और वहीं से उन्होंने एलएलबी की डिग्री भी हासिल कर ली। हालांकि पाकिस्तान में रहते हुए इतना मुश्किल और चुनौती भरा काम करना कतई भी आसान नहीं था। पंरतु रविंद्र ने ऐसा कर दिखाया और किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी। दरअसल रविंद्र कौशिक को पाकिस्तानी फौज में शामिल होने का लक्ष्य दिया गया था।

इस तरह से पाक सेना में भर्ती हुए रविंद्र

इस बीच पाकिस्तानी सेना में भर्ती शुरू हुई। इस भर्ती के समय उनकी एलएलबी की डिग्री और नकली पहचान खूब काम आई और जैसा उन्होंने सोचा था, ठीक वैसा ही हो रहा था। अहमद शाकिर के रूप में उन्हें पाकिस्तानी फौज में अधिकारी के तौर पर एंट्री मिल गई। इस तरह से वह अपने पहले लक्ष्य में सफल रहे। अपने देश तक सभी गोपनीय जानकारी पहुँचाने में किसी भी तरह की परेशानी ना हो, इसके लिए उन्होंने पाकिस्तान के एक बड़े आर्मी ऑफिसर की बेटी से निकाह रचा लिया। ताकि किसी को भी उस पर शक ना हो। हालांकि तब भी पाकिस्तान आर्मी का ही देश की राजनीति में पूरा दखल था। मगर पाक अफसर की बेटी से शादी के बाद रविंद्र का काम काफी आसान हो गया था। किसी को उन पर जरा सा भी शक नहीं हुआ।

बचाई थी 20 हजार सैनिकों की जान

वर्ष 1971 में जब भारत-पाक के रिश्ते बेहद खराब थे, तब रविंद्र की जासूसी अपने देश के लिए बहुत काम आई। उनके द्वारा भेजी गई एक बेहद ही गोपनीय सूचना के आधार पर भारत के 20 हजार सैनिकों की जान बचाई जा सकी थी। इसके अलावा भी रविंद्र ने बहुत सी गोपनीय जानकारियां देश तक पहुंचाई। इस बीच किसी तरह से पाकिस्तान को रविंद्र के जासूस होने की भनक लग गई। तब पूरे पाकिस्तान के होश उड़ गए थे और उन्हें यह बिल्कुल विश्वास नहीं हुआ कि एक भारतीय जासूस इतने सालों तक पाकिस्तानी सेना में अफसर बनकर काम कर रहा है।

जेल में हुआ रविंद्र कौशिक का निधन

पाकिस्तान सेना ने तत्काल उसे गिरफ्तार कर लिया और खूब यातनाएं दी। परंतु रियल टाईगर ने किसी तरह के राज नहीं खोले। उन्हें इतनी यातनाएं दी गई, शायद सुनकर लोगों के रौंगटे खड़े हो जाएं। बाद में उन्हें सियालकोट की जेल में बंद कर दिया गया। रविंद्र कौशिक ने अंत तक अपनी जुबान नहीं खोली। मगर धीरे धीरे वह बीमारियों में घिरते चले गए। उन्हें दिल की बीमारी हो गई और टीबी ने भी खोखला कर दिया था। साल 2001 में पाकिस्तान की जेल में ही उनका निधन हो गया। इस तरह से एक भारतीय जासूस ने अपनी जान पर खेलकर अपने देश के लिए हंसते हंसते कुर्बानी दे दी।

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