Friday, October 22, 2021

बढ़ता गया बजट, फिर भी हरियाणा में सरकारी स्कूलों की बुरी हुई दशा, 4 लाख बच्चों ने छोड़ी पढ़ाई

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Chandigarh News (citymail news) हरियाणा सरकार अपने सरकारी स्कूलों की दशा में सुधार करने, सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या को बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। इसके लिए हर साल शिक्षा बजट में भी बढ़ोतरी की जाती है उसके बावजूद न तो सरकारी स्कूलों की दशा में कोई खास गुणात्मक सुधार हुआ है और ना छात्रों की संख्या बढ़ रही है। छात्रों की संख्या कम होने के कारण कई प्राइमरी स्कूलों को बंद भी कर दिया गया है।
गत वर्ष शिक्षा मंत्री ने सार्वजनिक तौर पर कई बार इस बात पर खुशी जाहिर की थी कि 2020 में दो लाख बच्चों ने सरकारी स्कूलों में दाखिला लिया। अब उन्हीं का शिक्षा विभाग कह रहा है कि 2021 में पिछले शिक्षा सत्र के मुकाबले चार लाख से ज्यादा बच्चे सरकारी स्कूलों में कम हो गए हैं या खो गए हैं। इनमें फरीदाबाद जिले के 24680 बच्चों के साथ साथ मुख्यमंत्री के गृह जिले करनाल से 22740 व शिक्षा मंत्री कंवरपाल गुर्जर  के गृह जिले यमुनानगर से 20191 छात्र भी शामिल बताये गए हैं। इस स्थिति से घबराए पंचकूला में बैठे आला शिक्षा अधिकारियों ने आनन-फानन में वर्चुअल मीटिंग के माध्यम से जिला शिक्षा अधिकारियों को इस स्थिति का जिम्मेदार मानते हुए उन्हें कम या खो गए इन बच्चों को ढूंढने और उनको पुनः सरकारी स्कूलों में वापिस लाकर सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या बढ़ाने के हर संभव प्रयास करने के आदेश दिए हैं।
मंच के प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट ओपी शर्मा ने कहा है कि सरकार पहले की तरह ही इस स्थिति के लिए अपने को कसूरवार नहीं मान रही है। जो कि गलत है  हरियाणा अभिभावक एकता मंच का मानना है कि कई सालों से ऐसी स्थिति आने के लिए हरियाणा सरकार खासकर शिक्षा मंत्री व पंचकूला में बैठे और नित नई स्कीम बनाने वाले शिक्षा विभाग के ब्यूरोक्रेट अधिकारी जिम्मेदार हैं। दरअसल सरकार ने सरकारी स्कूलों को एक प्रयोगशाला बना दिया है। सरकारी स्कूलों की दशा में सुधार कराने के लिए कई प्रयोग किए जाते हैं। पहला प्रयोग सफल नहीं हुआ तो फिर कोई दूसरा वह भी सफल नहीं तो तीसरा।
हरियाणा अभिभावक एकता मंच के प्रदेश महासचिव कैलाश शर्मा ने कहा है कि  यह सोचने और देखने की बात है कि सरकारी स्कूलों में निशुल्क पढ़ाई होती है, बच्चों को मुफ्त में मिड-डे-मील मिलता है, किताब कॉपी वर्दी आदि निशुल्क प्रदान की जाती है लड़कियों को साइकिल भी प्रदान की जाती है फिर भी अभिभावकों का रुझान इन स्कूलों की ओर क्यों नहीं हो रहा है। यह अपने आप में बड़ा सवाल है और सरकार एवं शिक्षा विभाग के अधिकारियों को इस ओर ध्यान देने की आवश्यकता है। मंच की अपील है कि जल्द से जल्द सरकार इन कारणों की जांच करवाए कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में बच्चों ने सरकारी स्कूलों से पलायन क्यों कर लिया है।
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