सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद नहीं मिली पुलिस फोर्स , टल गई गांव खोरी व लकड़पुर में बड़ी तोडफ़ोड़

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कैप्शन: नगर निगम की टीम थी तैयार, मगर नहीं मिली पुलिस फोर्स

फरीदाबाद। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दिल्ली के बार्डर से सटे फरीदाबाद के दो गांवों में बड़े पैमाने पर होने वाली तोडफ़ोड़ की कार्रवाई को टाल दिया गया है। नगर निगम प्रशासन का कहना है कि पुलिस फोर्स ना मिलने की वजह से इस तोडफ़ोड़ को टाल दिया गया है। निगम के ज्वाइंट कमिश्नर प्रशांत कुमार ने बताया कि उनकी तरफ से इस तोडफ़ोड़ को लेकर पूरी तैयारी कर ली गई थी। मगर ऐनवक्त पर पुलिस फोर्स ना मिलने की वजह से इस तोडफ़ोड़ की कार्रवाई को अमल में नहीं लाया जा सका है। उनके अनुसार निगम के कर्मचारी व अधिकारी तय समय पर पहुंच गए थे। पंरतु उन्हें बताया गया कि पुलिस फोर्स उपलब्ध नहीं हो पा रही है। इसलिए तोडफ़ोड़ नहीं की जाएगी।

बता दें कि जिला एवं नगर निगम प्रशासन ने अपनी ओर से गांव लकड़पुर और खोरी में सरकारी जमीन पर बनें मकानों को तोडऩे की योजना बना ली थी। इसके लिए उपायुक्त यशपाल यादव ने तीन डयूटी मजिस्टे्रट नियुक्त कर दिए थे। इसके लिए बकायदा दोनों गांवों में नोटिस भी लगा दिए गए हैं। इस कार्रवाई हेतु डयूटी मजिस्टे्रट के तौर पर अधिकारियों को नियुक्त कर दिया गया है। इसके लिए जिला मजिस्टे्रट के तौर पर यशपाल यादव ने बडख़ल क्षेत्र के एसडीएम पंकज सेतिया, नगर निगम के ज्वाइंट कमिश्नर प्रशांत अटकान और नगर निगम के सचिव नवदीप सिंह को तैनात किया गया है।

सोमवार को ही सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश जारी कर गांव लकड़पुर और खोरी की जमीन पर बने मकानों को हटाने के आदेश जारी किए थे। एक अनुमान के अनुसार अदालत के आदेश से करीब दस हजार मकानों को तोड़े जाने की संभावना है, जिसके बाद काफी अधिक संख्या में लोगों के सिर से छत छीन जाएगी।

बताया गया है कि बुधवार से शुरू होने वाली इस कार्रवाई को कई दिनों तक जारी रखा जाएगा। यह कार्रवाई लगातार जारी रहेगी, तभी जाकर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को पूरी तरह से अमल में लाया जा सकेगा। इस कार्रवाई से वहां रह रह लोगों में हडकंप मचा हुआ है। लोगों का कहना है कि उन्होंने यहां पर जमीन खरीदकर अपने मकान बनाए हैं। यदि अदालत उन्हें हटाना चाहती है तो कम से कम उनके लिए वैकल्पिक जगह की व्यवस्था करवा दी जाए। हालांकि इसके लिए सुप्रीम कोर्ट पहले ही मना कर चुका है। अदालत में भी इन लोगों ने इस तोडफ़ोड़ को रोकने की मांग की थी, जिसे अदालत ने सिरे से खारिज कर दिया। वहीं दूसरी ओर पुलिस के प्रवक्ता सूबे सिंह का कहना है कि उनकी फोर्स तैयार थी, मगर नगर निगम वालों ने उनसे संपर्क ही नहीं किया।

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