दिल्ली-हरियाणा बार्डर के 10 हजार मकानों पर बुधवार से चलेगा बुलडोजर, नोटिस चिपकाए गए , डयूटी मजिस्टे्रट नियुक्त

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फरीदाबाद। दिल्ली और हरियाणा के फरीदाबाद बार्डर पर जंगल की जमीन पर बसे लाखों लोगों को वहां से हटाने के लिए नगर निगम प्रशासन ने तोडफ़ोड़ की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए भारी पैमाने पर पुलिस फोर्स उपलब्ध करवाने के लिए पूरी प्लानिंग पर काम आरंभ हो गया है। मंगलवार को नगर निगम प्रशासन ने गांव लकड़पुर और खोरी में मुनादी करवाकर लोगों को अपने मकान खुद हटाने के आदेश दिए हैं। इसके लिए बकायदा दोनों गांवों में नोटिस भी लगा दिए गए हैं। इसके साथ साथ 9 जून बुधवार को होने वाली भारी तोडफ़ोड़ के लिए डयूटी मजिस्टे्रट के तौर पर अधिकारियों को नियुक्त कर दिया गया है। इसके लिए जिला मजिस्टे्रट के तौर पर यशपाल यादव ने बडख़ल क्षेत्र के एसडीएम पंकज सेतिया, नगर निगम के ज्वाइंट कमिश्नर प्रशांत अटकान और नगर निगम के सचिव नवदीप सिंह को तैनात किया गया है।

बताया गया है कि बुधवार सुबह होते ही भारी पुलिस बल के साथ नगर निगम अधिकारी दर्जनों बुलडोजरों के साथ इन लोगों के सिरों से छत छीनने का काम शुरू कर देंगे। सोमवार को ही सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश जारी कर गांव लकड़पुर और खोरी की जमीन पर बने मकानों को हटाने के आदेश जारी किए हैं। एक अनुमान के अनुसार अदालत के आदेश से करीब दस हजार मकानों को तोड़े जाने की संभावना है, जिसके बाद काफी अधिक संख्या में लोगों के सिर से छत छीन जाएगी।

बताया गया है कि बुधवार से शुरू होने वाली इस कार्रवाई को कई दिनों तक जारी रखा जाएगा। यह कार्रवाई लगातार जारी रहेगी, तभी जाकर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को पूरी तरह से अमल में लाया जा सकेगा। इस कार्रवाई से वहां रह रह लोगों में हडकंप मचा हुआ है। लोगों का कहना है कि उन्होंने यहां पर जमीन खरीदकर अपने मकान बनाए हैं। यदि अदालत उन्हें हटाना चाहती है तो कम से कम उनके लिए वैकल्पिक जगह की व्यवस्था करवा दी जाए। हालांकि इसके लिए सुप्रीम कोर्ट पहले ही मना कर चुका है। अदालत में भी इन लोगों ने इस तोडफ़ोड़ को रोकने की मांग की थी, जिसे अदालत ने सिरे से खारिज कर दिया।

बता दें कि इन दोनों गांवों की सैंकड़ों एकड़ जमीन को वहां रहने वाले कुछ दबंग टाईप के लोगों ने अपनी जमीन बताकर उन लोगों को बेच दिया, जोकि यूपी, बिहार और अन्य राज्यों से फरीदाबाद-दिल्ली में मेहनत मजदूरी करने के लिए आए थे। इन लोगों ने माफियाओं के चंगुल में फंसकर यह जमीन खरीद ली और उस पर अपने मकान बना लिये। हालांकि इन दोनों ही गांवों में इससे पहले भी कई बार तोडफ़ोड़ की जा चुकी है। पंरतु हर बार एकाध दिन की कार्रवाई के बाद नगर निगम का दस्ता वापिस चला जाता था। मगर इस बार सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रूख दिखाया है और 6 सप्ताह के भीतर तोडफ़ोड़ पूरी करके अदालत को जवाब देने का निर्देश भी दिया है। अदालत ने पुलिस कमिश्नर को भी यह हिदायत दी है कि वह तोडफ़ोड़ करने वाले कर्मचारियों को पूरी सुरक्षा मुहैया करवाएं।

पंरतु दूसरी ओर सवाल यह भी है कि जिन लोगों ने सरकारी जमीन को बेचकर करोड़ों रुपए कमाए हैं, उनके खिलाफ पुलिस और प्रशासन ने सालों बाद भी अभी तक चुप्पी क्यों साधी हुई है। जिन लोगों ने झांसे में आकर माफियाओं से जमीन खरीदकर अपने जीवन भर की पूंजी उनके हवाले कर दी, उनके मकानों पर तो बुलडोजर चल जाएंगे, मगर जिन लोगों ने यह धोखाधड़ी की, उनके प्रति पुलिस व प्रशासन का नरम रूख कई सवाल खड़े कर रहा है। वहां रहने वाले लोगों का भी यही आरोप है कि बिना अधिकारियों की मिलीभगत के सरकारी जमीन को बेचना मुमकिन नहीं है। इसलिए उन माफियाओं के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।

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