सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश, फरीदाबाद में खाली करवाया जाए वन क्षेत्र, 10 हजार घरों पर चलेगा बुलडोजर

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद फरीदाबाद में बड़े पैमाने पर तोडफ़ोड़ करने की तैयारी की जा सकती है। अदालत ने लकड़पुर और खोरी गांव के वन क्षेत्र में बने हुए सभी घरों को तोडऩे के आदेश जारी किए हैं। माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के चलते करीब 10 हजार मकानों पर तोडफ़ोड़ की गाज गिर सकती है। कोर्ट ने साफ तौर पर कहा है कि वन क्षेत्र को अवैध निर्माणों से मुक्त किया जाना चाहिए। इसके लिए अदालत ने जिला प्रशासन को 6 हफ्ते का समय दिया है। इसके साथ ही अदालत ने फरीदाबाद के पुलिस कमिश्नर को यह सख्त हिदायत दी है कि तोडफ़ोड़ करने वाले नगर निगम कर्मचारियों को पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध करवाना उनका दायित्व है। यदि इसमें किसी भी प्रकार की ढील बरती गई तो उसकी जिम्मेदारी फरीदाबाद पुलिस की होगी।

यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस ए एम खानविलकर और जस्टिस दिनेश माहेश्वरी की खंडपीठ ने जारी किए हैं। अदालत ने प्रशासन व सरकार को 6 हफ्ते का समय देते हुए स्पष्ट कहा है कि यदि इस आदेश की पालना नहीं की गई तो संबंधित अधिकारी इसके दोषी माने जाएंगे। अदालत ने कहा कि उनके द्वारा साल 2016 में वन क्षेत्र में बने निर्माणों को हटाने का आदेश दिया था, पंरतु पांच साल का समय बीत जाने के बावजूद भी कार्रवाई नहीं की गई है। साल 2020 में भी यही आदेश दिए गए थे, मगर प्रशासन और सरकार ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।

वहीं नगर निगम की ओर से पेश वकील ने कर्मचारियों के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध करवाने की मांग की, जिससे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। जबकि वनक्षेत्र में रहने वाले लोगों की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंजाल्विस ने तब तक इस कार्रवार्ई को स्थगित करने की मांग की, जब तक लोगों का पुर्नवास ना हो जाए। मगर अदालत ने कहा कि 6 साल से आदेश लागू नहीं हुए, इस बीच लोगों को अपने पुर्नवास का प्रबंध कर लेना चाहिए था। मगर अब यह नीतिगत मसला है। अदालत ने साफ कहा कि इन सभी निर्माणों का हटना जरूरी है। इसलिए बेहतर होगा कि लोग स्वयं वहां से मकान खाली करके चले जाएं।

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