इस बेजुबान घोड़े पर भी पड़ी लॉकडाऊन की मार, चने की बजाए खाने को मिल रहा है भूसा

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Faridabad News (citymail news) कोरोना की वजह से आम लोगों के जनजीवन पर तो असर पड़ा ही है बेजुबान पशु भी इससे अछूते नहीं रह पाए हैं। शादियों में ठाठ-बाट का जीवन जीने वाले और चना खाने वाले सफेद रंग के घोड़े-घोडिय़ां पिछले दो वर्षों से कोरोना के चलते लॉकडाउन की मार झेल रहे हैं और इन दिनों भूसा खा रहे है। सफेद घोड़े और घोडिय़ों के मालिक इन्हें ठाट-बाट से रखते थे। बारात, शोभायात्रा या जुलूस में शरीक होने पर वहां मालिक इनको चने की दाल और गुड़ खिलाते थे। लेकिन लॉकडाउन की मार इन पर भी पड़ी है और इनके मालिक इन्हें अब हरा चारा खिला रहे हैं। ग्रह शुक्र उदित हो चुके हैं और शादियां जुलाई तक हैं। निकाह भी हो रहे हैं लेकिन बारात को अनुमति नहीं है।
अब करना होगा इंतजार
सफेद रंग के कारण विशेष स्थान रखने वाले यह घोड़े-घोडिय़ां इन दिनों भूसा खाकर दिन काट रहे हैं।
 इनके मालिकों के सामने भी चुनौती है कि घोड़े की 300 रुपए रोजाना की खुराक कहां से लाएं।
घोड़े-घोडिय़ों को चना, चापट, जौ, दाना व गुड़ खिलाएं तो वे अपने परिवार का भरण-पोषण कैसे करें।
अब शादी-ब्याह में फिर से रौनक लौटने का इंतजार करना पड़ेगा।
बैंड बाजा एसोसिएशन ने लगाई सरकार से गुहार
एनआईटी-5 स्थिति 65 साल से जनता बैंड का संचालक कर रहे हरियाणा के बैंड बाजा एसोसिएशन के उपाध्यक्ष सुशील कुमार ने बताया कि शादियों के सीजन में वह एक घोड़ी के 4000 रुपए तक लेते हैं। लेकिन पिछले 2 वर्षों से लॉकडाउन में बैंड बाजा वालों की बारात निकल गई है। अब न तो कोई काम मिलता है और न ही लोग रूची ले रहे हैं। फिर भी बैंड संचालक सरकार से अनुमित की गुहार लगाई है।

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