इस बेटी ने समाज को दिखाया आईना, अपनी विधवा मां का करवाया विवाह, निभाया अपना फर्ज

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जयपुर। समाज में आज भी विधवा महिला के विवाह को बहुत सम्मान की नजर से नहीं देखा जाता। रूढि़वादी समाज की यह परंपरा है कि पत्नी के निधन के बाद बेशक पति तो दूसरा विवाह कर सकता है, मगर महिला को यह अधिकार नहीं दिया गया है। यदि विधवा महिला अपने खालीपन और सहारे के लिए दूसरा विवाह करने का निर्णय लेती है तो समाज में उसे आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है। पंरतु एक बेटी ने इस पुरानी परंपरा को तोड़ते हुए अपनी विधवा मां की खाली दुनिया को फिर से आबाद करने का निर्णय लिया।

बेटी ने पेश की शानदार मिसाल

बेटी ने अपनी विधवा मां का पुर्नविवाह करवाकर समाज में शानदार मिसाल पेश की है। सोशल मीडिया पर बेटी द्वारा अपनी मां के विवाह करवाने की काफी संख्या में लोगों ने जमकर सराहना की है। हालांकि कुछ लोगों को इस पर एतराज भी हो सकता है, परंतु इस साहसी बेटी ने किसी भी बात की फ्रिक किए बिना अपनी मां की दुनिया फिर से आबाद कर दी है और उसे जीवन जीने की एक नई वजह दे दी है।

जयपुर की रहने वाली है संहिता अग्रवाल

यह कहानी है राजस्थान के जयपुर में रहने वाली संहिता की और उनकी मां गीता अग्रवाल की। दरअसल गीता अग्रवाल के पति का साल 2016 में हार्ट अटैक की वजह से निधन हो गया था। उसके बाद से गीता और उनकी बेटी संहिता ही एक दूसरे का सहारा बनकर जीवन को जी रही थीं। पंरतु पिछले दिनों संहिता की भी गुरूग्राम की एक कंपनी में जॉब लग गई, जिसके बाद उन्हें अपनी मां को अकेला छोडक़र आना पड़ा। तभी से उनकी मां गीता एकाकी जीवन जी रही हैं।

विधवा मां का विवाह करवाने का निर्णय लिया

संहिता से अपनी मां की यह हालत देखी नहीं जा रही थी। इसलिए उन्होंने एक निर्णय लिया और अपनी विधवा मां का विवाह करवाने का फैसला किया। हालांकि उसका यह अपना फैसला था और उनकी मां को इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी। इसके बाद संहिता ने अपनी मां के विवाह के लिए एक मेट्रीमोनियल साईट पर विज्ञापन दे दिया और उनके लिए नया जीवन साथी खोजना शुरू कर दिया। इस दौरान बांसवाडा के रहने वाले एक व्यक्ति ने संहिता से संपर्क साधा।

के.जी. गुप्ता ने कहा, मैं करूगां विवाह

दरअसल राजस्व विभाग में इंस्पेक्टर के.जी. गुप्ता ने संहिता से बात की और इस रिश्ते के लिए अपनी रूचि दिखाई। बता दें कि श्री गुप्ता की पत्नी का भी एक लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था। पत्नी के जाने के बाद से वह भी अकेलेपन का सामना कर रहे थे। इस विज्ञापन के बाद के.जी.गुप्ता और गीता के बीच मुलाकात हुई और फिर बात शादी तक पहुंच गई। संहिता ने भी अपने स्तर पर श्री गुप्ता से बातकर पूरी तसल्ली की और जब उन्हें लगा कि वह उनकी मां के लिए हर तरह से परफेक्ट हैं तब उन्होंने उनका विवाह करवा दिया।

मां के लिए बच्चों को भी निभाना चाहिए फर्ज

संहिता ने इस विवाह के बाद अपनी मां और नए पिता का फोटो सोशल मीडिया पर सांझा किया। उन्होंने कहा कि जब बच्चे दुखी होते हैं तो मां उनका सहारा बनकर खड़ी रहती है। यदि मां दुखी होती है तो उन्हें संभालने के लिए बच्चों को भी अपना फर्ज निभाना चाहिए। इसलिए उन्होंने भी अपनी मां को संभालते हुए उन्हें नए जीवन की डोर में बांधकर एकाकी जीवन से मुक्त किया है। इस तरह से एक बेटी ने अपना फर्ज निभाते हुए अपनी मां के लिए नए जीवनसाथी की ना केवल तलाश की, बल्कि उन्हें रिश्ते की नई डोर से भी बांध दिया।

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