कोरोना के बाद अब ब्लैक और व्हाईट फंगस का प्रकोप, फरीदाबाद में 22 मरीजों की पहचान हुई

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Faridabad News (citymail news) कोरोना वायरस महामारी के बीच फरीदाबाद में इन दिनों ब्लैक फंगस के मामलों में तेजी देखी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के हिसाब से शहर के अस्पतालों में अब तक ब्लैक फंगस के 22 मामले सामने आ गए हैं। वहीं ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक कोरोना मरीज महिला की मौंत हुई है। जिसे ब्लैक फंगस का संदिज्ध मरीज भी बताया गया है। इस संबंध में मेडिकल कॉलेज अस्पताल के डिप्टी डीन डॉ. एके पाण्डेय ने बताया है कि महिला के सेम्पल जांच के लिए भेजे गए हैं उसकी मौंत कोरोना से हुई या ब्लैक फंगस से यह रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा।
वहीं अस्पतालों में भर्ती 22 ब्लैक फंगस मरीजों की पुष्टी एमआरआई रिपोर्ट के हिसाब से कोरोना के नोडल ऑफिसर एवं डिप्टी सीएमओ डॉ. रामभगत ने कर दी है। उन्होंने कहा है कि यह सभी मामले ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज, एशियन अस्पताल और मैट्रो अस्पताल में भर्ती हैं। इसमें ईएसआईसी में 7, मैट्रो में 7 और एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में 8 मामले ब्लैक फंगस के आईसीयू वार्ड में भर्ती हैं। उन्होंने कहा है कि हमारे पास सभी अस्पतालों में इस बीमारी से लडऩे के लिए दवा और आईसीयू बेड उपलब्ध हैं।
इसके अलावा देश में भी ब्लैक फंगस के साथ अब व्हाइट फ ंगस के मामले मिलने से भी हडक़ंप मचा हुआ है। हालांकि फरीदाबाद में ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज के नोडल ऑफिसर डॉ. प्रवीण मलिक ने व्हाइट फंगस के मामलें नहीं आने के बात कही है। लेकिन उनका मानना है कि व्हाइट फंगस भी ज्यादा खतरनाक है। ब्लैक और व्हाइट में एक जैसे ही लक्षण पाए जाते हैं। यह भी नाक, कान और आंख में होता है। जिससे मरीज को आंखं भी गवांनी पड़ सकती है। वहीं स्वास्थ्य विभाग की नोडल ऑफिसर डॉ. रितु बताती हैं कि ब्लैक और व्हाइट फंगस के मामलों में सभी मरीजों का इलाज संभव है। हमने सभी बड़े अस्पतालों में आईसीयू वार्ड बनाए हुए हैं। ईएसआईसी में २० बेड का आईसीयू वार्ड बना हुआ है। सभी मरीजों की कंडीशन पहले से बेहतर हैं और वह रिकवरी कर रहे हैं।
ब्लैक फंगस से खतरनाक है व्हाइट फंगस
यह बीमारी ब्लैक फंगस से भी ज्यादा खतरनाक बताई जा रही है। कहा जा रहा है कि व्हाइट फं गस से भी कोरोना की तरह फेफ ड़े संक्रमित होते हैं। वहीं शरीर के दूसरे अंग जैसे नाखून, स्किन, पेट, किडनी, ब्रेन, प्राइवेट पाट्र्स और मुंह के अंदर भी संक्रमण फैल सकता है। अब तक व्हाइट फं गस के मामलों की पुष्टी नहीं की गई है लेकिन ईएसआईसी माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट के हेड ने ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज में भर्ती ब्लैक फंगस के मामलों की जल्द रिपोर्ट आने की बात कही हैं लेकिन उनकी एमआरआई, सिटी स्केन आदि की रिपोर्ट देखने के बाद ब्लैक फंगस की पुष्टी हुई है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
डॉ. प्रवीण मलिक का कहना है कि अगर एचआरआई व सीटी स्केन में कोरोना के लक्षण दिखाई देते हैं तो व्हाइट फंगस का पता लगाने के लिए बलगम कल्चर की जांच जरूरी है। उन्होंने बताया कि व्हाइट फं गस का कारण भी ब्लैक फं गस की तरह की इम्युनिटी कम होना ही है। उन लोगों में इसका खतरा ज्यादा रहता है जो डायबिटीज के मरीज हैं या फि र लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाएं ले रहे हैं।
ब्लैक और व्हाइट फंगस के लक्षण क्या हैं
जिस तरह इस संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं, इससे जुड़े लक्षण और जोखिम भरे संकेतों के बारे में जानना ज़रूरी है। अभी तक जो पता है, वह ये है कि वाइट फं गस संक्रमण शरीर के महत्वपूर्ण कामकाज को प्रभावित कर सकता है, वहीं ब्लैक फंगस सिर्फ  साइनस और फेफड़ों को प्रभावित करता है।
यह भी देखा गया कि जिन चारों मरीजों को व्हाइट फं गस का संक्रमण था, उनमें कोविड जैसे लक्षण दिखाई दिए, लेकिन वे सभी नेगेटिव पाए गए। मेडिकल एक्सपट्र्स ने यह भी सुझाव दिया है कि जिस तरह कोविड-19 के गंभीर मामलों में अतिरिक्त स्कैन की आवश्यकता होती है, उसी तरह व्हाइट फ ंगल संक्रमण का पता लगाने के लिए स्कैन के समान परीक्षण की आवश्यकता हो सकती है।
ब्लैक फं गल इंफेक्शन से वे लोग संक्रमित हो रहे हैं, जिनकी इम्यूनिटी कमजोर है, जो पहले से किसी गंभीर बीमारी के शिकार हैं, जैसे डायबिटीज या फि र स्टेरॉयड्स का इस्तेमाल किया है। जिन लोगों को उच्च ऑक्सीजन सपोर्ट की ज़रूरत पड़ी, इनमें भी इस बीमारी का जोखिम बढ़ जाता है।

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