स्वामी रामदेव की पतंजलि की लगातार बढ़ रही है कमाई, स्कॉटलैंड में है ट्रस्ट के पास शानदार आईलैंड

स्वामी रामदेव के नेतृत्व वाली पतंजलि ट्रस्ट लगातार तरक्की की ओर है। इस ट्रस्ट के पास स्कॉटलैंड में अपना आईलैंड होने को लेकर भी कई कहानी हैं, जिसे लेकर जांच भी हो चुकी है। आईए जानते हैं पूरी कहानी।

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नई दिल्ली। योगगुरू रामदेव अब अपनी योग शिक्षा के साथ साथ अपने बिजनेस को लेकर भी सुख्रियों में रहते हैं। रामदेव की पतंजलि अब हजारों करोड़ रुपए का साम्राज्य बन चुका है। इस कंपनी के पास हजारों एकड़ जमीन और अच्छी खासी प्रॉपर्टी है। स्वामी रामदेव की पतंजलि अब देश में एक नामी ब्रांड के तौर पर स्थापित हो चुका है। एक रिपोर्ट के अनुसार साल 2006 में अस्तित्व में आई पतंजलि हजारों करोड़ रुपए के मुनाफे में है। इस कंपनी के अधिकांश प्रोडेक्ट काफी डिमांड में रहते हैं।

विदेशों में भी फैला है कारोबार

स्वामी रामदेव ने ना केवल अपने देश में बल्कि विदेशों में भी पतंजलि का विस्तार किया है। देश के विभिन्न राज्यों में तो रामदेव की कंपनी के पास बहुत जमीन है ही, अब उनके एक आईलैंड को लेकर भी खासी चर्चाएं हैं। बीबीसी की एक रिपोर्ट की मानें तो स्कॉटलैंड में पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट के पास अपना एक आईलैंड है। जोकि उन्हें सैम और सुनीता नामक उनके अनुयायी ने दान में दिया है। सैम और सुनीता वहीं हैं, जो यूरोप में पतंजलि का कारोबार संभालते हैं। हालांकि इस आईलैंड को लेकर एक जांच भी बैठी थी।

रामदेव को जांच में मिली क्लीन चिट

इस जांच में आरोप लगाया गया था कि आईलैंड के लेनदेन में विदेशी मुद्रा प्रबंधन कानून को तोड़ा गया है। यह खरीद फरोख्त इस कानून की उल्लघंना करके की गई है। इस पर ईडी ने जांच भी की। लेकिन साल 2014 में स्वामी रामदेव को इस जांच से बाहर कर क्लीन चिट दे दी गई थी। वहीं दूसरी ओर पतंजलि की बात करें तो यह कंपनी इस समय काफी प्रॉफिट में है और लगातार उसके मुनाफे में इजाफा हो रहा है।

इतनी तेजी से बढ़ा है कारोबार

फाईनेशियल ईयर 2019-20 में हरिद्वार में स्थापित इस कंपनी का कुल मुनाफा 21 प्रतिशत बढक़र 425 करोड़ रुपए रहा है। वहीं इससे पहले साल 2018-19 की बात करें तो यह मुनाफा 349 करोड़ रुपए रहा है। इस दौरान पतंजलि के राजस्व को लेकर भी एक रिपोर्ट आई है, जिसमें कहा गया है कि यह करीब 6 प्रतिशत तक बढ़ गया है। पतंजलि की कमाई की बात करें तो यह अब बढक़र 65 करोड़ रुपए से भी अधिक हो गई है। जबकि साल 2018 में यह 18 करोड़ रुपए के आसपास थी।

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