सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर, अरावली क्षेत्र में फिर मंडराया निर्माणों पर खतरा, MCF ने जारी किए नोटिस

0
- Advertisement -
Faridabad News (citymail news ) अरावली वन क्षेत्र मेंं चल रहे शिक्षण संस्थानों सहित फार्म हाउस पर संकट के बादल मंडरा गए है। सुप्रीम कोर्ट में  लगी एक याचिका पर हरियाणा सरकार से जवाब मांगा गया है। अब नगर निगम ने सभी शिक्षण संस्थानों को नोटिस जारी करके अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया है। इसके बाद सोमवार को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की जाएगी।
बंधुआ मुक्ति मोर्चा ने याचिका दायर की
बंधुआ मुक्ति मोर्चा ने सुप्रीम कोर्ट में अंतरिम याचिका दायर कर सभी निर्माण को तोडऩे और तत्कालीन निगम अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। निगम प्रशासन ने  संस्थानों समेत कई फार्म हाउस मालिकों केा नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। क्योंकि सोमवार को हरियाणा सरकार इस मामले में अपना स्टेटस रिपोर्ट सौंपेगी।
अरावली वन क्षेत्र में बने निर्माण अवैध और गैरकानूनी 
निगम सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बधुआ मुक्ति मोर्चा ने सुप्रीम कोर्ट में अंतरिम याचिका दायर कर अरावली वन क्षेत्र में बने निर्माण को अवैध और गैरकानूनी बताया है। साथ ही कोर्ट से इन संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। चूंकि एमसी मेहता बनाम यूनियन आफ इंडिया के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने वन क्षेत्र में किसी भी निर्माण कार्य को अनुचित बताया है। इसी को आधार बनाकर बंधुआ मुक्ति मोर्चा ने अंतरिम याचिका दायर की है। वर्तमान में अरावली वन क्षेत्र में बड़ी संख्या में फार्म हाउस व बिल्डिंगों का निर्माण किया जा चुका है।
अवैध रूप से कॉलोनियों भी बन गयी है
कई अवैध रूप से कॉलोनियों भी बन गयी है। याचिका कर्ता का कहना है कि सीएलयू करने से पहले किसी ने निगम से एनओसी तक नहीं ली है। ऐसे में उनकी मांग है कि सभी के सीएलयू रद्द किए जाएं। वहां हुए निर्माण को तोड़ा जाए, राज्य सरकार वन को संरक्षित करे और जो अधिकारी इन निर्माण कार्यो को होने दिया उनके खलाफ कार्रवाई की जाए। ज्वाइंट कमिशनर  का कहना है कि सभी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही पटवारी को मौके पर भेजकर रिपोर्ट मांगी है। ताकि जवाब सरकार को भेजा जा सके।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here