नवरात्रों के तीसरे दिन वैष्णोदेवी मंदिर में धूमधाम से हुई मां चंद्रघंटा की भव्य पूजा

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कैप्शन: अष्ठमी के शुभ अवसर यानि कि आठवें नवरात्रे पर मंदिर संस्थान के प्रधान जगदीश भाटिया मां महागौरी की पूजा करते हुए । 
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फरीदाबाद। नवरात्रों के दूसरे दिन सिद्धपीठ मां वैष्णोदेवी मंदिर तिकोना पार्क में मां चंद्रघंटा की भव्य पूजा अर्चना की गई। इस अवसर पर मंदिर में प्रातकालीन आरती के दौरान मां चंद्रघंटा की पूजा और हवन यज्ञ किया गया। श्रद्धालुओं ने मां चंद्रघंटा से मन की मुराद मांगी। इस अवसर पर मंदिर में विशेष पूजा के लिए पधारे श्रद्धालुओं ने मां से आर्शीवाद मांगा।

इस मौके पर उनके साथ मंदिर संस्थान के प्रधान जगदीश भाटिया ने आए हुए अतिथि और श्रद्धालुओं का भव्य स्वागत किया। इन सभी को प्रसाद और माता की चुनरी भेंट की गई। मंदिर संस्थान के प्रधान जगदीश भाटिया ने बताया कि पूजा हेतु आ रहे श्रद्धालुओं के लिए कोरोना के अंतर्गत सोशल डिस्टेंस एवं मास्क लगाकर आने की हिदायत दी गई है। सभी श्रद्धालु स्वयं से ही इन नियमों का पालन भी कर रहे हैं।

पूजा अर्चना के अवसर पर श्री भाटिया ने श्रद्धालुओं को बताया कि आखिर मां चंद्रघंटा का असली स्वरूप क्या है। उन्होंने बताया कि मां को दूध की खीर का भोग अति प्रिय है। मां का सबसे पसंदीदा रंग सफेद है, इसलिए मां को सफेद रंग के फू ल अर्पित किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि यह देवी पार्वती का विवाहित रूप है। भगवान शिव से शादी करने के बाद देवी महागौरी ने अर्ध चंद्र से अपने माथे को सजाना प्रारंभ कर दिया और जिसके कारण देवी पार्वती को देवी चंद्रघंटा के रूप में जाना जाता है। वह अपने माथे पर अर्ध-गोलाकार चंद्रमा धारण किए हुए हैं। उनके माथे पर यह अर्ध चाँद घंटा के समान प्रतीत होता है, अतः माता के इस रूप को माता चंद्रघंटा के नाम से जाना जाता है

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