अवैध निर्माणों पर गिरेगी गाज या फिर आंखों में धूल झोंकने का होगा खेल, क्या दोषी अधिकारियों पर होगी कार्रवाई

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Faridabad News (citymail News ) अवैध निर्माण पर शिकंजा कसने के लिए निगम आयुक्त ने अलग-अलग वार्ड की टीम बना दी गई है। बुधवार और गुरूवार को सभी टीम अपने अपने वार्ड में घूमकर सर्वे करेगी कि उनके वार्ड में कोई अवैध निर्माण तो नहीं हो रहा है। वहीं शुक्रवार को टीम को सर्टिफिकेट अतिरिक्त आयुक्त के पास जमा कराना होगा कि उनके वार्ड में कोई अवैध निर्माण तो नहीं हो रहा है।  शहर में काफी तेजी से अवैध निर्माण हो रहे है। इसको लेकर आए दिन निगम की ओर से सीलिंग की कार्रवाई की जाती है, लेकिन फिर दोबारा से निगम अधिकारियों की मिलीभगत ही अवैध निर्माण को डी-सील कर दिया जाता है।
प्रदेश सरकार की ओर से हाल में ही एसआईटी का गठन किया गया था। जिसमें संयुक्त आयुक्त, आयुक्त और शहरी स्थानीय निकाय के निदेशक शामिल थे। एसआईटी को 25 अवैध निर्माणों के बारे में रिपोर्ट देेन का आदेश दिया गया था। ताकि दोषी अधिकारियों पर कार्रवाइ्र हो सके। एसआईटी को रिपोर्ट जमा करने के लिए 30 दिन का समय दिया गया है।
आयुक्त की ओर से गठित की 40 टीमों में जेई और एसडीओ नियुक्त किए गए है। यह बुधवार और गुरूवार को अपने अपने वार्ड का निरीक्षण करेंगे। निरीक्षण के दौरान अगर कोई अवैध निर्माण नजर आता है तो उस पर कार्रवाई करेंगे। वहीं निर्माण नहीं नजर आता है तो अतिरिक्त आयुक्त को शपथ पत्र जमा करांएगे।
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हैरत की बात है कि इस पूरी कार्रवाई में ये कहीं भी नहीं बताया गया है कि जिन अधिकारियों के सरंक्षण में ये अवैध निर्माण हुए हैं, उनके खिलाफ सरकार और निगम प्रशासन द्वारा क्या कार्रवाई की जाएगी। हकीकत तो यह है कि बिना अधिकारियों की मिलीभगत से शहर में कोई भी अवैध निर्माण होना संभव नहीं है। अवैध निर्माणों का धंधा पिछले कई सालों से एक बड़ा बिजनेस बना हुआ है। तोडफ़ोड़ विभाग में नियुक्ति के लिए अधिकारी बड़ी-बड़ी सिफारिश करवाते हैं। एक सूत्र के अनुसार एनआईटी जैसे इलाके में ही हर रोज अवैध निर्माणों से चार से पांच लाख रुपए की उगाही होती रही है। जिसके चलते अधिकारी और अवैध निर्माण माफिया खूब फल फूल रहे हैं।

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निगम में तीन जोन हैं, जिनमें ओल्ड फरीदाबाद, एनआईटी और बल्लभगढ़ शामिल हैं। इन तीनों इलाकों में अवैध निर्माण का खेल बड़े पैमाने पर होता है। ओल्ड फरीदाबाद में जहां नहर पार जमकर अवैध निर्माण और अवैध कालोनियां बनाई जा रही हैं, वहीं एनआईटी में रिहायशी इलाकों में कर्मिशियल निर्माण खड़े किए जा रहे हैं। इसके साथ साथ पांच-पांच मंजिला अवैध फ्लैट भी बनाए जा रहे हैं। जिनमें पानी व सीवर के कनैक्शन भी पूरी तरह से अवैध लिए जाते हैं। बल्लभगढ़ में भी यह खेल जमकर हो रहा है।
सूत्रों के अनुसार अवैध फ्लैटों से प्रति छत डालने की एवज में उगाही होती है। एक छत का लैंटर डालने की एवज में एक लाख रुपए निर्धारित है। यानि कि एक बिल्डिंग से करीब चार से पांच लाख रुपए की वसूली करने की खबरें आती रहती हैं। हैरत की बात है कि निगम प्रशासन ने इन अवैध फ्लैटों पर कभी भी कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की है। एनआईटी नंबर-1 से लेकर 2, 3, पांच नंबर और एसजीएम नगर में बड़े पैमाने पर अवैध फ्लैट बनाए जा रहे हैं। जिनकी तरफ ये अधिकारी देखते तक नहीं हैं। इसका सबसे अधिक नुक्सान उन लोगों को भुगतना पड़ता है, जिनके हिस्से का पानी अवैध फ्लैटों में सप्लाई किया जा रहा है। सीवर लाईनों पर बढ़त बोझ भी इन अवैध फ्लैटों की मेहरबानी है। देखना अब यह है कि निगम आयुक्त द्वारा बनाई गई ये टीमें ईमानदारी से कार्रवाई करती हैं या फिर सिर्फ आंखों में धूल झोंकने का खेल खेला जाना है।

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